09/07/2026
आगरा में पशु चिकित्सा विभाग का 25 लाख का फर्जीवाड़ा: कागजों में खरीदी दवाइयां, भुगतान हो गया, जांच में सब कुछ खुला, फिर भी नहीं हुई कार्रवाई."पूर्व अधिकारी ने डिजिटल हस्ताक्षर का किया दुरुपयोग, नए CVO की अनभिज्ञता खारिज, फिर भी विभाग सोया, अब शासन से उम्मीद".आगरा- जिले के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (CVO) कार्यालय में कागजों पर दवाइयों और उपकरणों की फर्जी खरीद दिखाकर करीब 25 लाख रुपये का भुगतान कर दिया गया। जांच में पूर्व अधिकारियों की भूमिका सामने आई, लेकिन अब तक किसी पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है। शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने रिपोर्ट में साफ कहा कि यह फर्जीवाड़ा है, फिर भी विभागीय कार्रवाई पर अमल नहीं हुआ।
क्या है पूरा मामला?
- शिकायत: सतीश चंद्र शर्मा और अतुल सिरोही ने फर्जी खरीद की शिकायत की।
- जांच: मुख्य विकास अधिकारी (CDO) के निर्देश पर जांच समिति बनी।
- रिपोर्ट: जांच में खुलासा हुआ कि बिना सामान खरीदे 24,44,923 रुपये का भुगतान कर दिया गया।
- धोखाधड़ी: पूर्व कार्यवाहक CVO डॉ. जयंत यादव ने पूर्व अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर का दुरुपयोग कर बिल पास किए।
जांच में क्या-क्या आया सामने?
- CVO डी.के. पांडेय ने 17 सितंबर 2024 को कार्यभार संभाला।
- इसके बाद भी 18 सितंबर 2024 को पूर्व CVO की ID का उपयोग कर भुगतान किया गया।
- डॉ. जयंत यादव और तत्कालीन लेखाकार (स्वर्गीय ज्ञानेंद्र भारद्वाज) को प्रथम दृष्टया जिम्मेदार माना गया।
- CVO डी.के. पांडेय की अनभिज्ञता को जांच समिति ने खारिज कर दिया।
कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
जांच रिपोर्ट में दोषियों के नाम सामने आने के बावजूद विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मुख्य विकास अधिकारी प्रतिभा सिंह ने बताया कि:जांच में अनियमितताएं सामने आई हैं। भुगतान में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। कार्रवाई के लिए रिपोर्ट शासन को भेज दी गई है। शासन स्तर से आगे की कार्रवाई होगी।
अब सारी नज़रें शासन पर हैं कि वह कितनी जल्द और कितनी सख्त कार्रवाई करता है। यह मामला सरकारी विभागों में पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। MYogiAdityanath
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