03/09/2026
बोडकदेव चुनाव मामला : उम्मीदवार द्वारा महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने के आरोपों पर कानूनी लड़ाई तेज
उम्मीदवारी के दौरान जानकारी छिपाने के आरोप — देवांग दाणी के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई की मांग।
शपथपत्र में महत्वपूर्ण जानकारी छिपाना गंभीर मामला हो सकता है — मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का 25-08-2026 का महत्वपूर्ण फैसला!
अहमदाबाद के बोडकदेव वार्ड नं. 19 की वर्ष 2021 की चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवारों द्वारा आवश्यक जानकारी छिपाए जाने के आरोपों को लेकर कानूनी कार्यवाही चल रही है। इस मामले में गुजरात हाईकोर्ट द्वारा मामले को Rule किया गया था और शीघ्र सुनवाई के निर्देश दिए गए थे। मामला वर्तमान में अंतिम सुनवाई के चरण में बताया जा रहा है।
इसी चुनाव से जुड़े उम्मीदवार देवांग दाणी द्वारा वर्ष 2026 में पुनः चुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल किए जाने और उस समय गुजरात हाईकोर्ट तथा स्मॉल कॉज कोर्ट में लंबित कार्यवाही से संबंधित आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
इस संबंध में मूल याचिकाकर्ता द्वारा लंबित Election Petition में आवेदन प्रस्तुत कर उक्त विषय को न्यायालय के संज्ञान में लाया गया है। आवेदन में देवांग दाणी के विरुद्ध कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करने तथा नामांकन एवं चुनाव संबंधी रिकॉर्ड के आधार पर पूरे मामले की जांच करने की मांग की गई है। इस आवेदन पर न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के फैसले का संदर्भ
इस बीच, 25-08-2026 के W.A. No. 2757/2026 में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा उम्मीदवार के नामांकन/शपथपत्र में कानूनन अनिवार्य जानकारी के खुलासे और उसके दमन के गंभीर कानूनी परिणामों पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की गई हैं।
फैसले में यह सिद्धांत सामने आता है कि यदि नामांकन दाखिल करने की तारीख को किसी जानकारी का कानून के अनुसार खुलासा करना अनिवार्य था और उम्मीदवार ने उसका खुलासा नहीं किया, तो बाद में हुई acquittal अथवा किसी अन्य घटना से उस समय की कथित omission अपने-आप समाप्त नहीं हो जाती।
न्यायालय ने यह भी माना है कि material information का suppression केवल मामूली तकनीकी त्रुटि नहीं माना जा सकता, बल्कि परिस्थितियों के अनुसार यह गंभीर statutory non-compliance हो सकता है और कुछ परिस्थितियों में चुनाव कानून के तहत corrupt practice के प्रश्न को भी जन्म दे सकता है।
यह भी महत्वपूर्ण है कि नामांकन की scrutiny के समय यदि कोई आपत्ति नहीं उठाई गई हो, तो भी कानून के अनुसार दायर Election Petition के माध्यम से चुनाव संबंधी वैधानिक अनियमितताओं को चुनौती दी जा सकती है।
बोडकदेव मामले में यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?
क्योंकि बोडकदेव वार्ड नं. 19 के मामले में भी आरोप यह है कि 2026 में देवांग दाणी की उम्मीदवारी के समय लंबित न्यायिक कार्यवाही से संबंधित आवश्यक जानकारी का खुलासा नहीं किया गया।
यह मुद्दा अब लंबित Election Petition में आवेदन के माध्यम से न्यायालय के समक्ष रखा गया है और न्यायालय द्वारा इस संबंध में आगे की कार्यवाही की जा रही है।
हालांकि, देवांग दाणी द्वारा वास्तव में कोई जानकारी छिपाई गई थी या नहीं, उसका कानूनी प्रभाव क्या है और उनके विरुद्ध क्या कार्रवाई बनती है — इसका अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालय द्वारा रिकॉर्ड, दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर ही किया जाएगा।
मूल याचिकाकर्ता की मांग
मूल याचिकाकर्ता की मांग स्पष्ट है—
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए। यदि किसी उम्मीदवार द्वारा कानून के अनुसार अनिवार्य कोई महत्वपूर्ण जानकारी जानबूझकर छिपाई गई हो, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और कानून के अनुसार जिम्मेदारी तय की जाए।
अब सवाल — क्या गुजरात चुनाव आयोग संवेदनशीलता दिखाएगा?
क्या उम्मीदवारों के शपथपत्र और नामांकन में दी गई जानकारी की गंभीरता से जांच होगी?
क्या लंबित न्यायिक कार्यवाही के संबंध में अनिवार्य खुलासे की जांच की जाएगी?
और यदि रिकॉर्ड से कोई गंभीर अनियमितता सामने आती है, तो क्या कानून के अनुसार कार्रवाई होगी?
अब सबकी नजर न्यायालय की आगे की कार्यवाही और संबंधित चुनाव प्राधिकरण की भूमिका पर है।
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