29/08/2026
गीत ही मेरे दुनियादारी, गीत ही मेरे हैं जीवन।
धन की नहीं लालसा मुझको, गीत ही मेरे तन-मन-धन।
ग़ज़ल-वज़ल न आये मुझको, मैं गीतों का राजकुँअर,
मुझको गीतों से जानेगा, ये सारा ही जन-गण-मन।
(2)
अधर मेरे नहीं गाते, किसी का दर्द गाता है।
मगर जब गीत लिखता हूँ, कलेजा मुँह को आता है।
ये भीतर कौन है मेरे, नहीं मालूम है मुझको,
ये अन्दर कोई बैठा है, जो हरदम गुनगुनाता है।
आगे पढ़ें
https://shopizen.app.link/RLkUrJg0Z5b
ऐसा स्तरीय साहित्य आपको सिर्फ Shopizen पर ही मिलेगा।
आप भी अपने सुविचार ,संस्मरण, लेख, कविता, कथा हमारे साथ साझा करें और अपने साहित्य को सुरक्षितता प्रदान करें।
अभी तक Shopizen ऐप डाउनलोड नहीं किया!
बड़े ही अचरज की बात है!
आज ही Shopizen डाउनलोड करें और मनोरंजन के सागर में गोते लगाएँ
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.shopizen
पुस्तकों के विश्व में आपका स्वागत है!
पुस्तकें पढ़ें, पुस्तकें भेंट दें!
हिन्दी साहित्य को समृद्ध करें!
Shopizen पर आप अपनी पुस्तकें प्रकाशित कर सकते हैं
निःशुल्क प्रकाशन
निःशुल्क मुखपृष्ठ
निःशुल्क प्रचार
लेखकों को रॉयल्टी
सशुल्क व निःशुल्क साहित्य पढ़ने के लिए Shopizen की ऐप डाउनलोड करें । इस लिंक पर क्लिक करें:
https://play.google.com/store/apps/details?id=com.shopizen
Email : [email protected]
www.shopizen.in
संपर्क: 9926576455