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गीत ही मेरे दुनियादारी, गीत ही मेरे हैं जीवन।धन की नहीं लालसा मुझको, गीत ही मेरे तन-मन-धन।ग़ज़ल-वज़ल न आये मुझको, मैं गीतों...
29/08/2026

गीत ही मेरे दुनियादारी, गीत ही मेरे हैं जीवन।
धन की नहीं लालसा मुझको, गीत ही मेरे तन-मन-धन।
ग़ज़ल-वज़ल न आये मुझको, मैं गीतों का राजकुँअर,
मुझको गीतों से जानेगा, ये सारा ही जन-गण-मन।
(2)
अधर मेरे नहीं गाते, किसी का दर्द गाता है।
मगर जब गीत लिखता हूँ, कलेजा मुँह को आता है।
ये भीतर कौन है मेरे, नहीं मालूम है मुझको,
ये अन्दर कोई बैठा है, जो हरदम गुनगुनाता है।

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अस्सी के दशक की बात है जब हम लोग अपने दादा-दादी से कहानियां सुनाने को कहते और वे हम लोगों को कभी रामायण-महाभारत तो कभी र...
29/08/2026

अस्सी के दशक की बात है जब हम लोग अपने दादा-दादी से कहानियां सुनाने को कहते और वे हम लोगों को कभी रामायण-महाभारत तो कभी राजा-महाराजाओं, कभी भूत-प्रेत तो कभी जीवन की सच्ची घटनाओं को कहानियां बनाकर सुनाया करते थे ! सभी बच्चे कहानियों में इतना खो जाते कि बस उसी कहानी के किसी किरदार की मानिंद स्वयं को पाते ! हम लोग अपनी -२ उम्र के हिसाब से गांव में ही बने प्राइमरी व मिडिल स्कूल में पढ़ने जाते ! स्कूल से घर आकर रोजाना खेलने चले जाते, घर आकर खाना खाते और दादा-दादी से कहानियां सुनते -२ सो जाते और इस तरह पूरा दिन आराम से कट जाता !

उन्हीं दिनों की बात है, एक दिन हम सभी बच्चों ने दादी जी से उनकी आप-बीती सुनाने को कहा ! हमारी दादी जी महज़ कक्षा तीन तक पढ़ी थीं लेकिन अपने हिस्से का हिसाब बड़ी ईमानदारी व समझदारी से कर लेती ! आज भी उनकी बताई ट्रिक से बिना कैलकुलेटर के जोड़ घटाना कर लेता हूं तो नि:संदेह फख्र होता है उनकी काबिलियत पर लेकिन यह देख-सुन बेहद अफसोस होता है कि आजकल के डिग्री धारक युवक, युवतियां चंद पैसे जोड़ने-घटाने में मोबाइल निकलना शुरू कर देते हैं !

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लिख् सेव त् अवश्य लिखोंआपलो समाज का नेंगदस्तूर लिखों ।भाषा वैभव बढ़ावन साती,सावन ना बसंत पर भी सुंदर गीत लिखों।।लिख् सेव...
29/08/2026

लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज का नेंगदस्तूर लिखों ।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
सावन ना बसंत पर भी सुंदर गीत लिखों।।

लिख् सेव त् अवश्य लिखों
आपलो समाज की संस्कृति पर लिखों।
भाषा वैभव बढ़ावन साती,
पुण्यभूमि भारत पर भी साहित्य लिखों ।।

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*नयी आवाज में आज पढ़ते हैं....*जब अन्विता स्कूल से वापिस आई तो उसने देखा, माँ अपने कमरे में बिस्तर पर पड़ी रो रही है । “...
29/08/2026

*नयी आवाज में आज पढ़ते हैं....*

जब अन्विता स्कूल से वापिस आई तो उसने देखा, माँ अपने कमरे में बिस्तर पर पड़ी रो रही है ।

“ क्या हुआ मम्मी ? “ अन्विता ने माथे पर हाथ रखते हुए कहा ।

“ कुछ नहीं । “ मम्मी ने हाथ झटकते हुए कहा । “ चल पहले खाना खा ले।” माँ ने उठते हुए कहा ।

“ दादी ने फिर कुछ कहा क्या? “ अन्विता ने हार न मानते हुए कहा ।

“ चल , उनका कहना क्या और न कहना क्या , तूं क्यों फ़िक्र करती है । “ माँ आंसू पोंछकर मुस्करा दी ।

अन्विता के भाई भी स्कूल से आ गए। आते ही खाना खाना करने लगे , माँ उनका यह हाल देखकर मुस्करा दी , चाची भी आ गई, और माँ की मदद करने लगी। घर शोरोगुल से गूंज उठा ।

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मीकू बोला, "बहुत हुआ अब चलो मेरे साथ; अब मैं इसको फिर से नहीं दोहराना चाहता हूं l" ऐसा कहकर वह दोनों मीकू की कार में बैठ...
29/08/2026

मीकू बोला, "बहुत हुआ अब चलो मेरे साथ; अब मैं इसको फिर से नहीं दोहराना चाहता हूं l" ऐसा कहकर वह दोनों मीकू की कार में बैठकर निकल गए l

बात सुजलु गांव की है, जहां पर मीकू और उसका परिवार रहते थेl मीकू के पिताजी उस गांव के प्रसिद्ध शिक्षक थे, जो 30 वर्षों से इस गांव में अपनी सेवाएं दे रहे थे। इस गांव में उनके पड़ोस में बिंदिया नाम की एक लड़की रहती थीl उसके पिताजी वहां के एक प्राइवेट बैंक में मुनीम का काम करते थेl दोनों पड़ोसी थे इसलिए रोज का आना-जाना लगा रहता था।

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उपक्रम: सावन विशेष आकर्षण१. डॉ. कनक पाणी २. अलका पुणतांबेकर ३. ललित मोहन पांडेय ४. क्रांति कनाटे ५. डॉ. कमल वर्मा *आप सभ...
28/08/2026

उपक्रम: सावन
विशेष आकर्षण
१. डॉ. कनक पाणी
२. अलका पुणतांबेकर
३. ललित मोहन पांडेय
४. क्रांति कनाटे
५. डॉ. कमल वर्मा
*आप सभी के साहित्य को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जा रहा है 🙏🏻*

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"हर ग्राम बसे राम: जनमानस से जुड़ी आस्था Available in Paperback and ebook https://shopizen.app.link/uG6cvstok5bयह दस पृष...
28/08/2026

"हर ग्राम बसे राम: जनमानस से जुड़ी आस्था
Available in Paperback and ebook
https://shopizen.app.link/uG6cvstok5b

यह दस पृष्ठ दस अध्याय सदृश हैं क्योंकि इनमें महज राम कथा नही बल्कि राम कथा के विविध प्रसंगों के निहितार्थ निहित हैं। राम जन्म से अथ श्री होकर उपसंहार में राम को धर्म का मूर्तिमान निरुपित किया गया है। प्रत्येक अध्याय के कथा आख्यान को व्याख्यान शैली में रचा गया है। ऐसा तभी होता है जब लेखक नितान्त निपट अकेला हो और चिंतन के अतल, वितल, सुतल, तलातल, महातल और रसातल में बैठ गया हो तब उसने इन आख्यानों के निहितार्थ की पड़ताल की हो तो ही इस तरह का लेखन सहज भी है और संभव भी।

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"काव्यांश साहित्य समूह प्रस्तुत, "" गौरैया की उड़ान""https://shopizen.app.link/gGKs4fMDEObयह ‘गौरैया की उड़ान’ किताब समर...
28/08/2026

"काव्यांश साहित्य समूह प्रस्तुत, "" गौरैया की उड़ान""
https://shopizen.app.link/gGKs4fMDEOb

यह ‘गौरैया की उड़ान’ किताब समर्पित है उन सभी स्वच्छंद लेखकों को जो अपने ख्वाब और जज़्बात लिखते हैं, क्योंकि ख्वाबों की कोई व्याकरण नहीं होती और जज़्बातों को एक दिल से दूसरे दिल तक पहुंचने के लिए किसी तयशुदा रास्ते की जरूरत नहीं होती।
हर विलुप्त होती गौरैया को अपनी उड़ान जरूर भरनी चाहिए क्योंकि ऊंचाई पर उड़ते कितने ही खूबसूरत पंछी देख ले हम पर जो सुकून इस साधारण सी चिड़िया को देखने से मिलता है वह बयान नहीं कर सकते।
-जयश्री भार्गव

विविध मंचों पर प्रकाशित अपनी धारावाहिक कथाओं को उपन्यास के रूप में प्रकाशित करवाएँ और एक प्रतिष्ठित लेखक के रूप में अपनी पहचान बनाएँ।

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"खिड़की... संवेदनाओं की!खूबसूरत लघुकथाओं का संग्रह, ebook में भी उपलब्ध!https://shopizen.app.link/5K76WvtGRObइस संकलन की...
28/08/2026

"खिड़की... संवेदनाओं की!
खूबसूरत लघुकथाओं का संग्रह, ebook में भी उपलब्ध!
https://shopizen.app.link/5K76WvtGROb

इस संकलन की अधिकांश कहानियां अखबार में प्रकाशित या पुरस्कृत हुई हैं लेकिन फिर भी यह अधिकांश पाठकों तक नहीं पहुंच पाई हैं। इन सभी कहानियों को एक स्थान पर सुलभ करना ही इस संग्रह का उद्देश्य है।
कहानियों का यह संकलन विषय सामाजिक एवं प्रेरक है। लेखिका ने समाज को संवेदनाओं की खिड़की से झांक कर देखा है...

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"बाल प्रज्ञानAvailable in Paperback and ebook https://shopizen.app.link/qiDTxzztO2bबाल कविता संग्रह 'बाल प्रज्ञान' की सभ...
28/08/2026

"बाल प्रज्ञान
Available in Paperback and ebook
https://shopizen.app.link/qiDTxzztO2b

बाल कविता संग्रह 'बाल प्रज्ञान' की सभी कविताएँ कवि के मौलिक और यथार्थपरक चिन्तन पर आधारित हैं जो बच्चों को अपने आस-पास के परिवेश की महत्त्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध कराती हैं। ये कविताएँ जहाँ आज के बच्चों की शहरी जीवन शैली का परिचय कराती हैं, वहीं कवि के प्रकृति के प्रेम का भी परिचय देती हैं। ये कविताएँ आधुनिक भावबोध की कविताएँ हैं जो बदली परिस्थितियों का सामना करने के लिए बच्चों को मानसिक रूप से तैयार करती हैं। इन कविताओं की भाषा पढ़े - लिखे परिवारों की बोलचाल की भाषा है जिसमें हिन्दी और अंग्रेजी के शब्दों का मिलाजुला प्रयोग होता है। ये कविताएँ बच्चों से सम्बन्धित विषयों को संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच के साथ उजागर करती हैं। कवि ने समसामयिक विषयों को बालमन की कोमलता के साथ स्पर्श किया है। बच्चों से संवाद करती ये कविताएँ बालमन को मनोरंजन प्रदान करने के साथ ही उन्हें स्वस्थ चिन्तन के लिए प्रेरित करती हैं। बालोपयोगी सुन्दर कृति 'बाल प्रज्ञान' के सृजन के लिए कविवर श्री डाॅ. सत्यवान सौरभ जी को हार्दिक बधाई।
-सुरेश चन्द्र ‘सर्वहारा’
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