07/09/2026
दुनिया के बड़े उद्यमी जोखिम लेते हैं,वो चीज़ें बनाते हैं जो पहले वजूद में नहीं थीं।लेकिन हमारे देश के सबसे अमीर आदमी का हुनर कुछ और है।उनका हुनर यह पहचानना है कि आम हिंदुस्तानी रोज़मर्रा की जिंदगी में सबसे ज़्यादा पैसा कहाँ खर्च कर रहा है।फिर अपनी अथााह दौलत के दम पर उस पूरे बाजार को अपनी मुट्ठी में कर लेना है।
पहले उन्होंने Jio के ज़रिए टेलीकॉम को निगला,फिर कैंपा लाकर कोल्ड ड्रिंक बाजार पर झपट्टा मारने की कोशिश की और अब उनकी नज़र आपके फ्रीज़र में रखी आइसक्रीम पर है।
जब रिलायंस ₹10 में मुस्कुराते हुए चेहरों के विज्ञापनों के साथ आइसक्रीम बाजार में उतरता है,तो मध्यवर्गीय ग्राहक को लगता है कि यह 'सस्ता और अच्छा' है। लेकिन यह कोई इनोवेशन नहीं है।आइसक्रीम मुकेश अंबानी ने ईजाद नहीं की। अमूल, मदर डेयरी और गली-मोहल्ले में ठेला लगाने वाला रामू सालों से इसे बेच रहे हैं।
नया सिर्फ यह है कि अंबानी के पास इतना पैसा है कि वे घाटा सहकर भी चीज़ों को इतनी सस्ती बेच सकते हैं,जितनी कोई छोटा व्यापारी सोच भी नहीं सकता।विज्ञापनों में किसानों और मुस्कुराते चेहरों की तस्वीरें होती हैं, लेकिन पर्दे के पीछे यह सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और स्थानीय डेयरी ऑपरेटरों के बाजार का गला दबाने की तैयारी है।
इस धंधे का एक सीधा गणित है,जिसे अर्थशास्त्र की भाषा में 'प्रीडेटरी प्राइसिंग' यानी शिकारी मूल्य निर्धारण कहते हैं।किसी भी चलते हुए सेक्टर को चुनो। अपनी असीमित पूंजी के दम पर इतने सस्ते दाम पर प्रोडक्ट उतारो कि बाकी सब कांप जाएं।छोटा ठेले वाला,स्थानीय ब्रांड और यहाँ तक कि जमे-जमाए को-ऑपरेटिव भी रिलायंस के घाटा सहने की क्षमता के आगे टिक नहीं पाते और दम तोड़ देते हैं।
जब सामने वाला कोई प्रतियोगी बचेगा ही नहीं,तब बाजार पर पूरा कब्जा होगा। तब ₹10 की आइसक्रीम कब ₹50 की हो जाएगी, आपको पता भी नहीं चलेगा।फ्री का जिओ बीएसएनएल को निगलते हुए कब 403 का हो गया उसका अहसास तक नहीं हुआ।
यह राष्ट्र निर्माण या तकनीक का विकास नहीं है। बनाना कुछ नहीं है, बल्कि जो बना-बनाया है उसे अपनी तिजोरी में हड़प लेना है। चमचमाते रिलायंस स्मार्ट स्टोर के फ्रीज़र में रखी वह सस्ती आइसक्रीम दरअसल उस छोटे दुकानदार के रोजगार की कब्र पर रखी है,जो कल तक स्वाभिमान से अपना घर चला रहा था।
कॉर्पोरेट की यह मुस्कान भ्रामक है, इनका असली काम सिर्फ और सिर्फ हर आम हिंदुस्तानी की जेब पर पूर्ण कब्जा करना है।