08/05/2026
कभी पढ़ाई से दूर भागते थे, कई विषयों में मिले थे 'शून्य'... लेकिन आज कहलाते हैं 'फिजिक्स के भगवान'!
बिहार में 1952 में जन्मे डॉ. हरीश चंद्र वर्मा का बचपन भारी आर्थिक तंगी में बीता। स्कूल में उनका मन बिल्कुल नहीं लगता था और परीक्षा प्रणाली की समझ न होने के कारण वे कई बार फेल भी हुए। तब उनकी माँ ने पढ़ाई में सुधार लाने के लिए एक अनोखी शर्त रखी— "हर 1 घंटे की पढ़ाई करने पर 1 ठेकुआ (पारंपरिक मिठाई) खाने को मिलेगा!"
शुरुआत में जो पढ़ाई सिर्फ 'ठेकुआ' खाने के लालच में शुरू हुई थी, वह धीरे-धीरे उनकी सबसे बड़ी लगन बन गई। मैथ्स का प्रोफेसर बनने का सपना देखने वाले एच.सी. वर्मा जी ने एक शिक्षक की सलाह पर फिजिक्स को चुना और फिर कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। पटना साइंस कॉलेज से BSc और IIT कानपुर से MSc व PhD पूरी की।
उनकी लिखी गई किताब 'Concepts of Physics' आज देश के लाखों छात्रों और साइंस के दीवानों के लिए किसी पवित्र ग्रंथ से कम नहीं है। 1980 में पटना से पढ़ाने की शुरुआत कर IIT कानपुर के प्रोफेसर तक का सफर तय करने वाले डॉ. वर्मा ने 600 से ज्यादा ऐसे प्रयोग तैयार किए, जो आज क्लासरूम की शिक्षा को आसान बना रहे हैं। शिक्षा और विज्ञान में उनके इस अतुलनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया।
डॉ. वर्मा का संदेश बिल्कुल साफ है— "सफलता केवल नंबरों के पीछे भागने से नहीं, बल्कि सोचने, समझने और सीखने से मिलती है।"
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