Sanskar News Bharat

Sanskar News Bharat भारत के समाचार पत्रों के पंजीयक द्वार?

29/04/2024
Sanskar News 28 April 2024
29/04/2024

Sanskar News 28 April 2024

08/03/2022

परम् आदरणीय, सादर प्रणाम,
आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर आप प्राप्त कर सकते हैं आकर्षक अंतरराष्ट्रीय सम्मान पत्र,
https://kutumb.app/antararashtriy-sahity-parishad?ref=7JCJG लिंक से अंतरराष्ट्रीय साहित्य परिषद की सदस्यता लें और निम्नलिखित जानकारी हमें 9610012000 पर व्हाट्सएप कर दें-
सदस्यता क्रमांक (आईडी कार्ड नम्बर)-
पूरा नाम
पूरा पता
फोन नम्बर
पासपोर्ट साइज फ़ोटो
आज शाम 4 बजे तक प्राप्त जानकारी वाले आईडी नम्बर्स के सम्मान पत्र आज ही *अंतरराष्ट्रीय साहित्य परिषद* के एप पर और व्हाट्सअप पर भेज दिए जाएंगे। शेष सम्मान पत्र कल बुधवार को प्रदान किए जाएंगे।
सादर
विजय कुमार शर्मा,
संयोजक, अंतरराष्ट्रीय साहित्य परिषद

साहित्य सृजन

28/12/2021

मंच : अंतर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद
विषय : हमसफर
शीर्षक : मीत मेरे
दिनांक : 27.12.2021

मेरे हमसफ़र मेरे मीत सुन मेरे गीत
टूटे ना डोर कभी छूटे ना साथ कभी।
देखा जब तुमको दिल दिवाना हो गया
मीत मेरा बरसो का एक पल में मेरा हो गया।

वक्त रेत की तरह फिसलता गया।
जीवन के टेढ़े-मेढ़े रास्तों से होते हुए,
हम न जाने कहाॅं तक चल‌ते चलें गए।
मिलकर हमनें आशियाना अपना बनाया है।

तुमको पाकर जिंदगी हुई मेरी गुलज़ार।
महक उठी है मेरी जीवन की यह बगिया।
तू ही मेरा प्यार है सनम तू ही मेरा अरमान।
करती खुद पर नाज़ हूॅं सनम तुझको पाकर।

मुश्किलों से घबराऊं तो हिम्मत बन जाना।
निराश अगर होऊं तो आस मेरी बन जाना।
छूटने से भी न छूटे प्रेम का बंधन अटूट रहे।
होठों पर मुस्कान, खुशियों से भरा साथ रहें।

बिन्दु सिकन्द
नई दिल्ली

28/12/2021

अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद् 2021
विषय : मेरे हमसफ़र

शीर्षक : गृह-लक्ष्मी

गृह-लक्ष्मी हूँ , कहते हैं लोग ,
गृह-लक्ष्मी मैं बन जाऊँगी ।
प्रीत की रीत निभाओ , न निभाओ ,
मान-सम्मान तो चाहूँगी ।

लक्ष्मी , सरस्वती , अन्नपूर्णा मैं ,
घर को मन्दिर बनाती हूँ ।
कहीं असुर-असत्य दीखे तो ,
रणचंडी मैं बन जाती हूँ ।

भक्ति का लेशमात्र नहीं ।
मुक्ति की भी मुझको चाह नहीं ।
हाँ , शक्ति तो हूँ मैं ,
शक्ति बन रह जाऊँगी ।

कर्म-पथ की अनुगामिनी मैं ,
कर्म-पथ पर चलती जाऊँगी ,
अपना कर्तव्य निभाती हूँ मैं ,
अपना कर्तव्य निभाऊँगी ।

कृष्ण-प्रेम में लीन सही ,
जग से तो मैं विरक्त नहीं ।
राधा तो बन सकी नहीं मैं ,
मीरा मैं बन जाऊँगी ।

मीरा सक्सेना माध्वी
नई दिल्ली
स्वरचित , मौलिक एवं अप्रकाशित ।

28/12/2021

अंतर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद
हमसफर 20 21

सात जन्मों का साथ

मेरी आंखों में हो तुम
मेरी बातों में हो तुम
मेरी हर सांस में हो तुम
जीवन का आधार हो तुम

सातो जनम का साथ है
इंद्रधनुषी सारंग जीवन में है
कभी धूप तो कभी छांव है
कभी दुख तो कभी सुख होता है जीवन में

तेरी अर्धांगिनी हूं मैं
तेरे हर कदम में सहभागी हूं मैं
शुरुआत से अंत तक और
अंत से शुरुआत तक परछाई हूं तेरी मैं

सूरज की किरण बनकर आशा के दीप जलाते हो
रात की चांदनी की तरह झिलमिलाते हो
कभी उमंग बनकर जीवन की राह को जगाते हो
हमेशा मेरे सारे नखरे उठाते हो

मेरे जीवन साथी हमेशा मेरे साथ रहना
जीवन के हर मोड़ पर हाथ थामे रहना

शोभा पाठक
अलीबाग,मुंबई

28/12/2021

अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद
विषय, मेरे हम सफर
शीर्षक जीवन साथी
जीवन साथी तुम हम सफर मेरे
रहे साथ हम यू ही जीवन भर तेरे
पति पत्नी का रिश्ता तो अटूट है
साथ जन्मों का रिश्ता तो अटूट है
मेरे रहो तुम सदा हम भी तुम्हारे है
मीत तुम मेरे हम मनमीत तुम्हारे है
हर दुख सुख के साथी रहे ये सच है
संग संग चले जीवन पथ पर ये सच है
कभी दिल लगी तो कभी नाराज़गी हैं
ये तो दस्तूर है दुनियाँ का जो राज़ी है
तुम धड़कन मेरी तुम परिवार मेरा हो
तुमसे जीवन हमारा तुम सहारा मेरा हो
हर रिश्ते को निभाना तुम नाराज ना होना
सभी को प्रेम स्नेह आदर देना खफा ना होना
तुम हमसफ़र मेरे जन्म जन्म तक रहना साथ
*राजन *तुम बिन अधूरा है जीवन रहे तेरा साथ

स्वरचित मोलिक रचना विनोद ढींगरा *राजन*
फरीदाबाद हरियाणा

28/12/2021

अन्तर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद २०२१
-------------------------------
*तेरे लिए*
--------------
संग संग चलूं में जीवन भर ,
खुशियों के मैं रंग भरूं,
गीत प्यार के गाते-गाते ,
सुख दुःख तेरे साथ सहूं ।

हर दिन मेरी करवा चौथ हो ,
हर दिन हो तीज हरियाली ,
तेरे संग मेरे तीज त्यौहार ,
हर दिन हो मेरी , होली दीवाली ।

तेरी लम्बी आयु हेतु से ,
निर्जल व्रत, उपवास करूं ,
हर पल तेरे साथ रहूं ,
हर पल तेरा दीदार करूं ।

तू चांद मेरा है,मेरे प्रियतम,
मैं हूं खिली चांदनी तेरी ,
श्रृंगार तुम मेरे ,अमर रहो ,
हर पल यही कामना मेरी ..।

श्रीमति सरोज महेन्द्र पाण्डेय बबलिया मण्डला (म.प्र.)
------------------------------

28/12/2021

अंतर्राष्ट्रीय साहित्य परिषद
विषय मेरे हमसफर
शीर्षक -प्रिय तुम , मैं , तुम और मैं......

प्रिय तुम
तुम हिमालय हो ,
हिमाच्छादित उत्तुंग शिखरों से सुशोभित,
छिपाए तप्त कुंडों को हृदय में,
यूं ही अचल रहना l

और मैं ,
निर्झरिणी सी
तुम्हारी आंच से पिघल पिघल
सदानीरा बहती रहूं l
बाहें फैलाए
नीर अमृत बांटते,
लहलहायें कूल उपवन
खिलखिलाएं कलियां,
सुगंधित फूल बन महकें
मिल जाऊं फिर तुम्हीं में l

तुम सागर बन समेटो
सारी उच्छृंखलतायें ,
बदली बन फिर बरसूं
तुम्हारे घर आंगन ,
तुम तुम हो ,
यूं ही बने रहना
हिमालय सा अडिग रहना,
या सागर सा गहन बनकर
मुझे खुद में समा लेना l

रेखा शर्मा
बूंदी राजस्थान

28/12/2021

मेरे हमसफर

शीर्षक :तोता मैना की कहानी बीस साल पुरानी

तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।

विवाह के बाद एक साल की जुदाई ,
अंतरदेशी पत्र में लिखते थे तनहाई ।
बसाना चाहते थे एक सपनों का आशियाना,
पर नौकरी का नहीं था पक्का ठिकाना ।

तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।

मेरे गुरु ने दिया बचपन में विद्यादान ,
जीवन संगिनी के रूप में बेटी को किया कन्यादान।
वर्धमान महावीर का मिला वरदान,
प्रयत्नवादी जीवन को मिला जीने का स्थान।

तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।

दो पंछी खुले गगन में उड़े,
रिश्ते की डोर आंचल में बांधे।
किसी एक वृक्ष पर बसाया घोसला अपना,
छोटा सा ग्यास ,छोटी सी टी.वी, खुश थी मैना।
कॉइन बॉक्स फोन पर कुछ बोलना ।

तोता मैना की कहानी,
बीस साल पुरानी।

पूनम की शीतल चंद्रमा का उजाला,
चंद दिनों में ही खुशियों का चमन खिला ।
प्रणिता के आगमन से पवित्र जल मिला,
इस बेला का सौरभ चारों ओर फैला।

तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।

बच्चों की परवरिश में लगी रही तू रात -दिन,
कब बीत गए बीस साल के दिन।
तेरा हाथ थाम कर बच्चे होते थे खड़े,
आज तुझसे लगने लगे हैं बड़े ।

तोता मैना की कहानी ,
हो गई साल पुरानी।

नाजुक यह प्रेम के रिश्ते निभाते -निभाते,
अपने लिए नहीं ,अपनों के लिए जीते।
दिन बीतते गए देखते- देखते।

तोता मैना की कहानी,
अब हो गए बीस साल पुरानी।

रचनाकार:रमेश मालचिमणे जिला:रायचूर कर्नाटक

Address

177/10, Matruchhaya, Sindhi Topdara
Ajmer

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Sanskar News Bharat posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share