28/12/2021
मेरे हमसफर
शीर्षक :तोता मैना की कहानी बीस साल पुरानी
तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।
विवाह के बाद एक साल की जुदाई ,
अंतरदेशी पत्र में लिखते थे तनहाई ।
बसाना चाहते थे एक सपनों का आशियाना,
पर नौकरी का नहीं था पक्का ठिकाना ।
तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।
मेरे गुरु ने दिया बचपन में विद्यादान ,
जीवन संगिनी के रूप में बेटी को किया कन्यादान।
वर्धमान महावीर का मिला वरदान,
प्रयत्नवादी जीवन को मिला जीने का स्थान।
तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।
दो पंछी खुले गगन में उड़े,
रिश्ते की डोर आंचल में बांधे।
किसी एक वृक्ष पर बसाया घोसला अपना,
छोटा सा ग्यास ,छोटी सी टी.वी, खुश थी मैना।
कॉइन बॉक्स फोन पर कुछ बोलना ।
तोता मैना की कहानी,
बीस साल पुरानी।
पूनम की शीतल चंद्रमा का उजाला,
चंद दिनों में ही खुशियों का चमन खिला ।
प्रणिता के आगमन से पवित्र जल मिला,
इस बेला का सौरभ चारों ओर फैला।
तोता मैना की कहानी,
हो गई बीस साल पुरानी।
बच्चों की परवरिश में लगी रही तू रात -दिन,
कब बीत गए बीस साल के दिन।
तेरा हाथ थाम कर बच्चे होते थे खड़े,
आज तुझसे लगने लगे हैं बड़े ।
तोता मैना की कहानी ,
हो गई साल पुरानी।
नाजुक यह प्रेम के रिश्ते निभाते -निभाते,
अपने लिए नहीं ,अपनों के लिए जीते।
दिन बीतते गए देखते- देखते।
तोता मैना की कहानी,
अब हो गए बीस साल पुरानी।
रचनाकार:रमेश मालचिमणे जिला:रायचूर कर्नाटक