07/08/2026
दुनिया की सबसे सफल और सबसे विस्तृत टेस्टिंग एजेंसी मानी जाती है अमरीका की एजुकेशन टेस्टिंग सर्विस (ETS)। यह अमरीकी विश्वविद्यालयों में दाखिले के लिए परीक्षा लेती है। परिक्षाएँ न सिर्फ अमरीका, बल्कि पूरी दुनिया में होती हैं। मैंने इसकी तीन परिक्षाएँ बंबई और काठमांडू में दी थी। बंबई तो फिर भी ठीक है, काठमांडू की परीक्षा वहाँ के सेंट जेवियर संस्थान में हुई थी। उन दिनों भी नेपाल में आंदोलन चल रहे थे, और परीक्षा के अगले ही दिन कर्फ्यू लग गया था। फिर अमरीका में बैठी एजेंसी आखिर कैसे तय करती है कि परीक्षा में धांधली नहीं हुई?
पहली बात कि यह एजेंसी साल में एक ही दिन नहीं, बल्कि कई अलग-अलग दिनों पर परीक्षा लेती है, हर छात्र के लिए अलग प्रश्न-पत्र होते हैं, और सभी प्रश्नपत्र कंप्यूटर पर गुप्त (encrypt) रूप में परीक्षा के समय आते हैं।
दूसरी बात कि परीक्षा लेने वाली एजेंसी से स्वतंत्र है धांधली जाँच करने की एजेंसी। उसका नाम है ऑफिस ऑफ टेस्ट इंटेग्रिटी (OTI)। यह एजेंसी खुद को एफबीआई समझती है, और मान कर चलती है कि धांधली हुई है। इसमें जासूस किस्म के साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ, साइकोमेट्री विशेषज्ञ, सांख्यिकी विद्वान, पूर्व एफबीआई अधिकारी आदि होते हैं। यह न सिर्फ परीक्षा के पहले, बल्कि परीक्षा के दौरान और उसके बाद भी जाँच कर रही होती है। जैसे किसी सेंटर पर अगर अचानक कई अभ्यर्थी बहुत ही अच्छा पर्फॉर्म करने लग गए, तो यह शक के दायरे में है।
कमाल की बात है कि अब यह परीक्षा अपने घर से भी दी जा सकती है, और फिर भी धांधली नहीं होती। यह AI के द्वारा तय कर रही होती है कि अभ्यर्थी अपने घर में बैठा किस तरह आँखें चला रहा है। कोई और कंप्यूटर तो नहीं खोले बैठा। उत्तर देने की गति और पैटर्न क्या है।
लगभग पाँच करोड़ लोग पूरे साल के अलग-अलग दिनों पर दुनिया भर के सैकड़ों केंद्रों और अपने घरों में परीक्षा दे रहे हैं; फिर भी परीक्षा सफल हो रही है। भारत स्वयं यह परीक्षाएँ दशकों से ले रहा है। चालीस से अधिक शहरों में, दो सौ से अधिक केंद्रों में, पूरे साल, डेढ़-दो लाख भारतीय यह परिक्षाएँ देते हैं। सुंदर पिचाई और सत्य नादेला आदि भी इसी परीक्षा से अमरीका पहुँचे। तो यह प्रायोगिक रूप से ठोक-बजा कर देखा जा चुका है।
भारत में परीक्षा का स्वरूप बहुत बदला है, और राष्ट्रीय टेस्टिंग एजेंसी बन चुकी है। लेकिन धांधलियों को पकड़ पाने में यह कमजोर रही है। देखना होगा कि यह कैसे एक फूलप्रूफ सिस्टम बनाती है, कि विद्यार्थी भविष्य में घर बैठे परीक्षा दे, फिर भी धांधली न कर पाए।
साभार- प्रवीण झा, नॉर्वे