09/10/2025
दीपावली में जपने योग्य मंत्र (लक्ष्मी प्राप्ति हेतु)
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद-प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं महालक्ष्म्यै नमः । ।। शुभ दीपावली पूजन मुहूर्त लग्न संवत् २०८१।। (दिनांक २० अक्टूबर २०२५ सोमवार कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्दशी-अमावस्या)
लग्न
समय
लग्न
समय
तुला
प्रातः०६.११ से ०८.२६ तक
मेष
सायं ०५.३५ से ०७.१२ तक
वृश्चिक (स्थिर)
०८.२६ से १०.४३ तक
वृष (स्थिर)
०७.१२ से ०९.०८ तक
धनु
१०.४३ से १२.४९ तक
मिथुन
०९.०८ से ११.२२ तक
मकर
१२.४९ से ०२.३६ तक
कर्क
११.१२ से १.४० तक
कुम्भ (स्थिर)
०२.३६ से ०४.०७ तक
सिंह (स्थिर)
१.४० से ०३.५४ तक
मीन
०४.०७ से ०५.३५ तक
कन्या
०३.५४ से ०६.०७ तक
नोट : अमावस्या दिन में २.३२ मिनट के बाद लगेगा लक्ष्मीपूजन के लिए। कार्तिक कृष्ण १४ सोमवार (२०/१०/२०२५) को दीपावली का शुभपर्व होगा। दीपावली पूजन का मुख्यकाल प्रदोषकाल होता है। जिसमें स्थिर लग्न की प्रधानता होती है। अतः वृष, सिंह या कुम्भ लग्न में दीपावली पूजन करना चाहिये। इस दिन वृषलग्न सायं ७/१२ से रात्रि ९/८ तक है। जो दीपावली पूजन के लिए उत्तम समय है। इसके पश्चात् अर्धरात्रि में सिंहलग्न में रात्रि १/४० से रात्रि ३/५४ तक में तथा कुम्भ लग्न में भी दिन में २/३६ से ४/०७ तक में भी गणेश (कुबेरादि देवताओं) का पूजन किया जायेगा। स्थानीय समय के अनुसार स्थान विशेष का समय के अनुसार धन ऋण कर (काशी से) समय निर्धारित कर लें।
धनतेरस - प्रदोष काल में त्रयोदशी मिलने के कारण धन त्रयोदशी धनतेरस एवं धन्वन्तरि जयन्ती १८ अक्टूबर शनिवार को होगी।
ज्योतिष और आध्यात्म
शुभ मुहूर्त बनाने की सरल विधि
शुभ मास - वैशाख, ज्येष्ठ, आषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन शुक्ल, मार्गशीर्ष, माघ।
शुभ पक्ष कृष्ण पक्ष, शुक्ल पक्ष दोनों पक्ष शुभ होते हैं। लेकिन १३ दिन का पक्ष हो तो त्याज्य होता है।
शुभ तिथि २, ३, ५, ६, ७, १०, १२, १५ सोमवार पड़े तो १३ भी ठीक है।
शुभ नक्षत्र अश्वनी, रोहिणी, मृगशिरा, पुर्नवसु, पुष्य, पूर्वा फाल्गुनी, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़, मघा, श्रवण, आर्द्रा, धनिष्ठा प्रथम भाग।
शुभ योग- प्रीति, आयु, सौभा, शोभ, सुकर्मा, धृति, वृद्धि, ध्रुव, हर्षण, सिद्धि, वरीया, शिव,
सिद्धि, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म।
शुभ समय - संध्या काल, प्रदोष काल रात्रि में मुहूर्त निषेध है। गुरु, शुक्र अस्त न हो, भद्रा दोष न हो, मासान्त न हो।
पृथ्वी शयन - धरती सोती जागती देखना, मकान, दुकान आदि सभी मुहूर्तों में देखना जरूरी है। संक्रान्ति मास प्रविष्ठा-५, ७, ९, १०, २१, २४ में धरती सोती है।