Humara Aligarh

Humara Aligarh For many of us, born in Aligarh, rasied in Aligarh are one of best memories, let's live them again...

दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कुछ दिन पहले एक टाटा टियागो कार के अंदर तीन लोग मृत पाए गए। न जबरन घुसने के निशान, न संघर...
13/02/2026

दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कुछ दिन पहले एक टाटा टियागो कार के अंदर तीन लोग मृत पाए गए। न जबरन घुसने के निशान, न संघर्ष, न चोट — शुरुआत में मामला आत्महत्या जैसा लगा।

जांच आगे बढ़ी तो CCTV से पता चला कि कुछ समय पहले कार में एक चौथा व्यक्ति, एक बुजुर्ग, भी मौजूद था। कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से खुलासा हुआ कि एक तथाकथित तांत्रिक ने तीनों को पैसे दोगुना करने के “रिवाज़” का लालच देकर बुलाया था। कैश कार में रखा गया और रिवाज़ के नाम पर ज़हरीले लड्डू खिलाए गए। फ्लाईओवर तक पहुंचते-पहुंचते उनकी तबीयत बिगड़ गई, गाड़ी रोकी, समझने की कोशिश की — लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आरोपी वहां से निकल गया।

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यही व्यक्ति पहले भी दो अलग मामलों में, यूपी और राजस्थान में, तीन लोगों की मौत से जुड़े मामलों में आरोपी रह चुका है — और दोनों में ज़मानत पर बाहर था।

अगर ऐसे लोग बार-बार बाहर आ जाते हैं, तो यह सिर्फ एक अपराध नहीं, सिस्टम की बड़ी विफलता है। क्या हमारी न्याय व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है?

21/01/2026

बीजेपी के सामान्य वर्ग के नेता यूजीसी (UGC) की इक्विटी रेगुलेशन्स पर चुप क्यों हैं?

अगस्त 2024 में केंद्र सरकार ने लेटरल एंट्री के ज़रिए जॉइंट सेक्रेटरी स्तर के 45 पदों का विज्ञापन निकाला था। ये नियुक्तियाँ आरक्षण के दायरे से बाहर थीं। सरकार के भीतर ही दलित नेताओं—चिराग पासवान और जीतन राम मांझी—ने सिद्धांत के आधार पर इसका विरोध किया। नतीजा यह हुआ कि सरकार को यह योजना वापस लेनी पड़ी।

सिर्फ 45 पद थे। न व्यवस्था ध्वस्त होती, न आसमान गिरता। इस मुद्दे पर कोई बड़ा जनआंदोलन भी नहीं हुआ। फिर भी दलित नेताओं ने इसे प्राथमिकता दी और यह सुनिश्चित किया कि इन 45 पदों पर भी आरक्षण के माध्यम से ही नियुक्तियाँ हों।

इसके विपरीत, यूजीसी की इक्विटी रेगुलेशन्स इससे हज़ार गुना ज़्यादा भेदभावपूर्ण और संस्थागत रूप से नुकसानदायक हैं। ये उच्च शिक्षा की मेरिट, गुणवत्ता और भविष्य पर गहरा आघात करती हैं।

फिर भी बीजेपी में सामान्य वर्ग का कोई भी प्रमुख नेता अब तक इसके खिलाफ खुलकर बोलने का साहस नहीं जुटा पाया है।

क्या यह चुप्पी डर की वजह से है, राजनीतिक मजबूरी से है, या फिर सामान्य वर्ग के हित अब किसी की प्राथमिकता नहीं रहे?
यह सवाल आज नहीं तो कल पूछा ही जाएगा।

23/11/2025

बाल्टी भर के धोखा🤣
स्याला अजीब घोटाला है, अभी तक लगता था सिर्फ चिप्स के पैकेट में हवा भर कर लेज वाले ही चूना लगाते हैं , लेकिन यहां अलग ही खेल चल रहा है गुरु। 🤣🤣
कोन कोन इस घोटाले का शिकार हुआ है 😹

इसका नाम भरत जैन है, मुंबई में पहले भीख मांगता था फ़िर उसने 18000 भिखारियों की फ़ौज खड़ी कर दी, महीने की इनकम 7 करोड़ है...
23/11/2025

इसका नाम भरत जैन है, मुंबई में पहले भीख मांगता था फ़िर उसने 18000 भिखारियों की फ़ौज खड़ी कर दी, महीने की इनकम 7 करोड़ है, यह भिखारियों को शेल्टर और खाना प्रोवाइड करवाता था बदले में उनसे 20% हिस्सा लेता था,

इसके घर से 460 करोड़ नगद बरामद हुए हैं, इसके पास 8 विला है, 8 महंगे फ्लैट है, 2 बेशकीमती बंगले है, 22 करोड़ का नया घर खरीदने गया तो पकड़ा गया, IIM कलकत्ता से पढ़ा लिखा है,

यह अब तक का सबसे अमीर भिखारी है, भीख मांगने का अविष्कार किसने किया आप जानते हैं...

🌫️ दिल्ली-एनसीआर के बाद अब अलीगढ़ भी खतरे में! 😷दोस्तों, अब हवा भी ज़हर बन चुकी है।अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ...
13/11/2025

🌫️ दिल्ली-एनसीआर के बाद अब अलीगढ़ भी खतरे में! 😷

दोस्तों, अब हवा भी ज़हर बन चुकी है।
अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ में हवा की गुणवत्ता बेहद खराब स्तर पर पहुँच गई है। सड़कों पर धुंध छाई हुई है, दोपहर में भी शाम जैसा अंधेरा लग रहा है।

ये खराब हवा सीधे तौर पर हमारी सांसों पर असर डाल रही है, खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए यह बेहद ख़तरनाक साबित हो रही है।

अब वक्त है कि हम सब सावधानी बरतें — मास्क पहनें, अनावश्यक बाहर न निकलें और पौधे लगाकर हवा को बेहतर बनाने में योगदान दें। 🌱

ये हैं सुनीता ओयम — 23 साल की नक्सल, माओवादी, जिस पर ₹14 लाख का इनाम था और जो अब समर्पण कर चुकी है। मध्य प्रदेश सरकार की...
12/11/2025

ये हैं सुनीता ओयम — 23 साल की नक्सल, माओवादी, जिस पर ₹14 लाख का इनाम था और जो अब समर्पण कर चुकी है। मध्य प्रदेश सरकार की "लाडला नक्सल समर्पण योजना" के तहत उसे मिलने वाली सुविधाएँ ऐसी हैं:

• समर्पण प्रोत्साहन: ₹14 लाख (जो कि तय प्रोत्साहन ₹5 लाख और घोषित इनाम में से अधिक है)।
• अचल संपत्ति/ज़मीन खरीद के लिए अनुदान: ₹20 लाख।
• मकान निर्माण के लिए अनुदान: ₹1.5 लाख।
• काम में ली गई हथियारों के बदले एक्स-ग्रेशिया: ₹20,000 से ₹4.5 लाख (हथियार की श्रेणी पर निर्भर)।
• विवाह भत्ता: ₹50,000।
• पढ़ाई या व्यावसायिक प्रशिक्षण के लिए: ₹1.5 लाख।
• सरकारी नौकरी के लिए पात्रता — आमतौर पर पुलिस विभाग में अवसर मिलना संभव।

सोचने की बात है — हथियार उठा कर देश के खिलाफ लड़ो, कई राज्यों में वांछित बनो, और फिर एक दिन समर्पण कर के वैसा आराम-जीवन हासिल कर लो जिसको पाने के लिए आम आदमी सालों-महीनों तक मेहनत करता है और फिर भी नहीं बचा पाता। ज़िन्दगी की ये डायरेक्ट लाइन बड़ी हैरान कर देने वाली है।

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