13/02/2026
दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कुछ दिन पहले एक टाटा टियागो कार के अंदर तीन लोग मृत पाए गए। न जबरन घुसने के निशान, न संघर्ष, न चोट — शुरुआत में मामला आत्महत्या जैसा लगा।
जांच आगे बढ़ी तो CCTV से पता चला कि कुछ समय पहले कार में एक चौथा व्यक्ति, एक बुजुर्ग, भी मौजूद था। कॉल रिकॉर्ड और अन्य सबूतों से खुलासा हुआ कि एक तथाकथित तांत्रिक ने तीनों को पैसे दोगुना करने के “रिवाज़” का लालच देकर बुलाया था। कैश कार में रखा गया और रिवाज़ के नाम पर ज़हरीले लड्डू खिलाए गए। फ्लाईओवर तक पहुंचते-पहुंचते उनकी तबीयत बिगड़ गई, गाड़ी रोकी, समझने की कोशिश की — लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। आरोपी वहां से निकल गया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि यही व्यक्ति पहले भी दो अलग मामलों में, यूपी और राजस्थान में, तीन लोगों की मौत से जुड़े मामलों में आरोपी रह चुका है — और दोनों में ज़मानत पर बाहर था।
अगर ऐसे लोग बार-बार बाहर आ जाते हैं, तो यह सिर्फ एक अपराध नहीं, सिस्टम की बड़ी विफलता है। क्या हमारी न्याय व्यवस्था इतनी कमजोर हो चुकी है?