16/08/2026
दोस्तों, आज आगरा से घर आते समय मेरे साथ एक ऐसी घटना हुई, जिसने मुझे यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि भक्ति के साथ सावधानी भी उतनी ही जरूरी है।
जैसे ही मैं सादाबाद से मुरसान रोड पर पहुँचा, मेरे सामने अचानक दो युवक दौड़ते हुए आए और जोर-जोर से रुकने के लिए कहने लगे। मेरी बाइक पहले से ही Stop Mode में थी, फिर भी मैंने तुरंत ब्रेक लगाए और वहीं रुक गया।
लेकिन इसी बीच पीछे से एक और बाइक आ गई। तभी एक युवक दौड़ते हुए आया और पीछे से आई बाइक से टकरा गया। उसके हाथ में आजकल चल रहा डंडा-कांवड़ भी था।
इसके बाद कई युवक इकट्ठा हो गए और हमसे बहस करने लगे कि “देखकर नहीं चला रहे हो?”
मैंने शांत रहना बेहतर समझा और वहाँ से आगे निकल आया।
लेकिन मेरा इन सभी युवाओं से एक सवाल जरूर है—
🙏 अगर भक्ति करनी ही है, तो इतनी तेज भागने की आखिर क्या जरूरत है?
क्या भीड़भाड़ वाले इलाकों, बाजारों और चौराहों पर अपनी रफ्तार थोड़ी कम नहीं की जा सकती, ताकि आपके साथ-साथ सड़क पर चल रहे दूसरे लोगों को भी नुकसान न पहुँचे?
आखिर ऐसी क्या जल्दी है?
क्या आप एक घंटा पहले पहुँच जाएंगे तो भोले बाबा कुछ ज्यादा प्रसन्न हो जाएंगे?
या आपके गंतव्य पर कोई पुरस्कार या माला लेकर खड़ा है?
धर्म और आस्था का सम्मान हम सभी करते हैं, लेकिन भक्ति के साथ अनुशासन और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखना भी हमारी जिम्मेदारी है।
मेरा सभी कांवड़ यात्रियों और युवाओं से विनम्र अनुरोध है कि धार्मिक यात्रा के दौरान अपनी और दूसरों की सुरक्षा का ध्यान रखें। सड़क पर आपकी एक छोटी-सी लापरवाही किसी दूसरे परिवार के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।
और हमारे बुजुर्गों से भी निवेदन है कि वे युवाओं को समझाएँ कि आस्था के साथ संयम और सुरक्षा भी जरूरी है।
🙏 भक्ति भी करें, सावधानी भी रखें।
🙏 सुरक्षित रहें, सजग रहें और दूसरों की जान की भी कीमत समझें।