28/06/2026
प्रजातंत्र में सबसे बड़ा दोष है; तो यह कि इसमें योग्यता को मान्यता नहीं मिलती—लोकप्रियता को मिलती है। हाथ गिने जाते हैं, सिर नहीं तौले जाते।
विरलों के सहारे कोई लोकतंत्र अपनी सेहत की रक्षा नहीं कर सकता। लोकतंत्र एक ऐसी जीवन पद्धति है जिसमें मनुष्य अपने दिमाग़ को टटोल-टटोलकर आगे बढ़ता है और सम्मोहन से बचता है, प्रचार से परहेज करता है। ऐसा मनुष्य ख़ुद सोचने में यक़ीन करता है, इसलिए पढ़ने को रोज़ नहाने जैसी ज़रूरत बना लेता है🤔☝🤝☺।