14/05/2025
आदिवासी समुदाय में ही नहीं पूरे उत्तर बंगाल की प्रेरणा बनीं डॉ. रूपाणी मिंज
कलचिनी, अलीपुरद्वार
एक साधारण चाय बागान से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक का सफर तय करने वाली डॉ. रूपाणी मिंज आज केवल अपने परिवार की ही नहीं, बल्कि पूरे आदिवासी समुदाय की प्रेरणा बन गई हैं। उनके संघर्ष और उपलब्धि की कहानी आज सोशल मीडिया से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर तक चर्चा का विषय बनी हुई है।
भरनो बड़ी चाय बागान स्थित उनके निज निवास पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। पिता रघु मिंज और मां सरिता खेड़िया की आंखों में बेटी की इस ऐतिहासिक सफलता का गर्व साफ झलकता है। मां खुद एक चाय बागान में मजदूरी करते रहे, लेकिन उन्होंने कभी अपनी बेटी के सपनों को टूटने नहीं दिया।
डॉ. रूपाणी का सफर आसान नहीं था। आर्थिक चुनौतियाँ, संसाधनों की कमी और सामाजिक सीमाओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। उनकी मेहनत और आत्मविश्वास ही था, जिसने उन्हें मेडिकल कॉलेज तक पहुँचाया। यही नहीं, उनका भाई भी अब मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है और बहन लॉ कॉलेज में अध्ययनरत है।
डॉ. रूपाणी सिर्फ एक डॉक्टर नहीं, एक भावनात्मक वक्ता और समाज के लिए सोच रखने वाली युवा हैं। उन्होंने कहा –
> "बचपन से बाबा को सामाजिक कार्यों में सक्रिय देखा है। वहीं से मुझे भी समाज के लिए कुछ करने की प्रेरणा मिली।"
उनकी इस उपलब्धि पर *ABASA* (all Bengal adivasi student association) ने उन्हें सम्मानित किया। कार्यक्रम में विष्णु मुंडा, शीला उरांव, गुलशन मिंज,सखि मुंडा और हरिहर नागवंशी जैसे समाजसेवी भी मौजूद रहे।
Madrihat BDO के Sr.DEO
जयप्रकाश दिग्गा ने कहा: "सरकार की स्कॉलरशिप योजनाओं और शिक्षा कार्यक्रमों का लाभ रूपाणी जैसी बेटियों को मिला है, जो अब पूरे समाज के लिए एक मिसाल हैं।"
ABASA के माध्यम से अब तक सैकड़ों करियर काउंसलिंग और सेमिनार उत्तर बंगाल में आयोजित किए गए हैं। और इस कार्यक्रम का उद्देश्य है रूपनी जैसे सैकड़ो युवाओं को तैयार करना और अब तक जगह-जगह मेहनत का फल दिखने लगा है ,ABASA के सदस्य बताते हैं कि डॉ. रूपाणी जैसी प्रेरणादायक युवाओं को वे आगे विभिन्न कार्यक्रमों में रिसोर्स पर्सन के तौर से मदद लिया जाएगा
ताकि आदिवासी बच्चों को सही दिशा और प्रेरणा मिल सके।
कार्यक्रम में उपस्थित विष्णु मुंडा जी ने कहा:
> "समाज को रूपाणी जैसी बेटियों पर गर्व है। उनका संघर्ष और सफलता हजारों युवाओं को आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा।"
संघर्ष की मिसाल, सफलता की उड़ान – डॉ. रूपाणी मिंज आज उस सोच का प्रतीक हैं जो कहती है – 'अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती।'