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बंगाल में हुआ खेला, ममता के उम्मीदवार ने CM शुभेंदु से मिलकर छोड़ा मैदान                   ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " स...
18/09/2026

बंगाल में हुआ खेला, ममता के उम्मीदवार ने CM शुभेंदु से मिलकर छोड़ा मैदान
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

बंगाल के सबसे हॉट सीट नंदीग्राम में उपचुनाव से पहले सियासी भूचाल। वोट पड़ने से पहले ही ममता ब्रिगेड को बड़ा झटका लगा है। ममता बनर्जी गुट की अधिकृत प्रत्याशी संचिता प्रधान डे ने चुनावी अखाड़े से अपने कदम वापस खींच लिए हैं।

यह सनसनीखेज वापसी उस मुलाकात के चंद घंटों बाद हुई है, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी थी।

नबन्ना में आशीर्वाद, फिर नाम वापसी का ऐलान ...

बताया जा रहा है कि चुनाव आयोग की स्क्रूटनी के बाद जब संचिता को नया चुनाव चिह्न 'फुटबॉल खिलाड़ी' आवंटित हुआ, तो वह सीधे राज्य सचिवालय नबन्ना पहुंच गईं। वहां उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से बंद कमरे में मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक, संचिता ने सीएम से आशीर्वाद भी लिया।

तब इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन अब नाम वापसी के बाद यह मुलाकात सियासत के नए समीकरणों की ओर इशारा कर रही है। आखिर ऐसी क्या वजह रही कि प्रत्याशी ने पर्चा वैध होने के बाद भी मैदान छोड़ दिया? आधिकारिक कारण अभी भी पर्दे के पीछे है।

दो तृणमूल, दो निशान के बीच बिखरता कुनबा ...

यह पूरा ड्रामा चुनाव आयोग के उस ऐतिहासिक फैसले के बाद का है, जिसमें 28 साल पुराने 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'जोड़ाफूल' निशान को फ्रीज कर दिया गया था।

आयोग ने ममता गुट को 'Mamata All India Trinamool Congress' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' चिह्न दिया है, जबकि अरूप रॉय/ऋतब्रत गुट को 'Democratic Trinamool Congress' और 'लिफाफा' चिह्न आवंटित किया है।

ममता गुट ने 13 सितंबर को संचिता प्रधान डे को नंदीग्राम से अपना चेहरा बनाया था। उनके सामने बीजेपी ने शुभेंदु के करीबी रहे पूर्व PA चंद्रनाथ रथ की मां 'हसीरानी रथ' को उतारा है, जबकि दूसरे तृणमूल गुट से मोहम्मद एतेशामुल हक ताल ठोक रहे हैं। कांग्रेस ने मिलन प्रधान को मैदान में उतारा है।

6 अक्टूबर को वोट, 9 को फैसला ...

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों पर जीत दर्ज की थी, बाद में उन्होंने नंदीग्राम सीट छोड़ी, जिससे यह उपचुनाव हो रहा है। वहीं रेजीनगर सीट AJUP नेता हुमायूं कबीर के इस्तीफे से खाली हुई है। दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना होगी।

नंदीग्राम में ममता की उम्मीदवार का यूं मैदान छोड़ना, इस हाई-प्रोफाइल जंग में बीजेपी कैंप के हौसले को और बुलंद कर गया है।

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18/09/2026

भाजपा को साधा निशाना ममता ने, सुनिए क्या कहा?

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बंगाल SIR अपडेट : वोटर लिस्ट के नामों में गहराया संकट तो सुप्रीम कोर्ट सख्त !                    ✍️- वांग्देन लामा- संपा...
18/09/2026

बंगाल SIR अपडेट : वोटर लिस्ट के नामों में गहराया संकट तो सुप्रीम कोर्ट सख्त !
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) पर बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। चुनाव आयोग ने खुद शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट के सामने माना कि प्रदेश में मतदाता सूची से नाम कटने और जुड़ने को लेकर दायर 37 लाख से ज्यादा अपीलें आज भी धूल फांक रही हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाला बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ के समक्ष दाखिल अपने हलफनामे में आयोग ने जो आंकड़ा रखा, वह चौंकाने वाला है।

' आंकड़ों का अंधेरा: 37.18 लाख फाइलें अब भी पेंडिंग ' ...

आयोग के हलफनामे के मुताबिक, SIR आदेशों के खिलाफ कुल ' 38,20,683 अपीलें ' दाखिल हुई थीं। इनमें से अदालत द्वारा गठित ट्रिब्यूनलों ने अब तक महज '1,02,231 अपीलों' का ही निस्तारण किया है। यानी '37,18,452 मामले' आज भी न्याय के इंतजार में कतार में खड़े हैं।

गौर करने वाली बात यह है कि आयोग ने यह नहीं बताया कि इनमें से कितनी अपीलें नाम हटाने के खिलाफ हैं और कितनी नए नाम जोड़ने के विरोध में।

58 लाख नाम कटने का सनसनीखेज दावा ...

याचिकाकर्ता प्रसेनजीत बोस ने हलफनामे में दावा किया है कि SIR की गिनती के दौरान ही ' 58 लाख से अधिक मतदाताओं ' को सूची से बाहर कर दिया गया था। दावे-आपत्तियों के दौर में 9.64 लाख लोगों ने नाम जोड़ने और 99 हजार से ज्यादा ने नाम हटाने के आवेदन दिए, लेकिन 28 फरवरी को आई अंतिम सूची में महज 1.82 लाख नए नाम ही जुड़ पाए।

आयोग ने यह भी माना कि 17 दिसंबर 2025 के ड्राफ्ट से 7 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-6 के तहत '34.13 लाख नए आवेदन' आए थे।

सुप्रीम कोर्ट सख्त, पूछा- निपटारा कैसे होगा? ...

25 अगस्त को ही सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को फटकारते हुए अपीलों के लंबित रहने का पूरा ब्योरा तलब किया था। कोर्ट ने दो टूक कहा था कि इन मामलों का फैसला समयबद्ध होना चाहिए। पीठ ने आयोग से पूछा था कि व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कितने अतिरिक्त ट्रिब्यूनल चाहिए और क्या रोडमैप है।

इससे पहले 24 अप्रैल को कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों को निर्देश दिया था कि नाम कटने से पीड़ित जिन लोगों ने तत्काल सुनवाई की अर्जी दी है, उनकी सुनवाई प्राथमिकता पर की जाए।

700 जज, 19 ट्रिब्यूनल फिर भी बोझ भारी ...

लगभग 60 लाख दावे-आपत्तियों के अंबार को निपटाने के लिए बंगाल के साथ ओडिशा और झारखंड से करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को लगाया गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और जजों की अध्यक्षता में 19 विशेष ट्रिब्यूनल भी बनाए।

इतनी बड़ी फौज के बावजूद 1 लाख का ही निपटारा होना, SIR की रफ्तार और व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

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बंगाल में TMC नाम-निशान पर ताला, अब नया निशाना फुटबॉल या क्रिकेट?                    ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " सोच जाग...
18/09/2026

बंगाल में TMC नाम-निशान पर ताला, अब नया निशाना फुटबॉल या क्रिकेट?
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

बंगाल की सियासत में वो भूचाल आ गया है, जिसकी आहट तो थी, पर गूंज इतनी तेज होगी, किसी ने सोचा नहीं था। चुनाव आयोग ने राज्य की सत्ताधारी 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' के नाम और उसकी पहचान बन चुके चुनाव चिन्ह 'जोड़ाफूल' को फ्रीज कर दिया है। 1 जनवरी 1998 को ममता बनर्जी द्वारा पार्टी की स्थापना के बाद यह पहला अवसर होगा जब बंगाल का मतदाता EVM पर तृणमूल का नाम और दो फूलों वाला निशान नहीं देख पाएगा।

उप-चुनाव से पहले आयोग का अंतरिम वार ...

चुनाव आयोग का यह अंतरिम आदेश 6 अक्टूबर को नंदीग्राम और रेजीनगर में होने वाले विधानसभा उप-चुनाव से ठीक पहले आया है। आयोग ने अपने आदेश में दो टूक कहा है कि पार्टी के अंदर जारी वर्चस्व की जंग के चलते अब कोई भी गुट - न तो कालीघाट वाला ममता गुट और न ही ऋतब्रत वाला धड़ा - 'ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'जोड़ाफूल' प्रतीक का इस्तेमाल कर सकेगा।

आयोग ने दोनों गुटों को आज सुबह 11 बजे तक तीन-तीन वैकल्पिक नाम और चुनाव चिन्हों की सूची सौंपने का अल्टीमेटम दिया था।

फुटबॉल बनाम ब्लैक बोर्ड, किसे क्या मिला? ...

डेडलाइन खत्म होने से पहले दोनों खेमों ने आयोग के दरवाजे पर अपने-अपने विकल्प रख दिए।

' ममता गुट (कालीघाट-तृणमूल) का प्लान-B ' - सूत्रों के मुताबिक ममता खेमे ने अपने अस्तित्व को अपने नाम से जोड़ते हुए तीन नाम सुझाए हैं - 'ममता सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस', 'सर्वभारतीय तृणमूल कांग्रेस ममता' और 'तृणमूल ममता कांग्रेस'। वहीं प्रतीक के तौर पर उनकी पहली पसंद जन-जन से जुड़े खेल चिह्न हैं - ' फुटबॉल खिलाड़ी और क्रिकेट बैट ' ।

'ऋतब्रत गुट का दांव' : दूसरी ओर ऋतब्रत बनर्जी के खेमे ने आयोग की फ्री सिंबल की लिस्ट से 'ब्लैक बोर्ड, लिफाफा और टॉर्च' जैसे तीन चिन्हों की मांग की है।

सियासी पारा हाई, वार-पलटवार शुरू ...

नाम और निशान छिनते ही बंगाल से दिल्ली तक सियासी बयानबाजी तेज हो गई है।

कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल ने तीखा तंज कसते हुए कहा, "तृणमूल तो पहले ही टूट चुकी थी, अब नाम और निशान भी चला गया। यह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की ओर से पीएम मोदी को दिया गया लेट-नाइट बर्थडे गिफ्ट है।"

वहीं बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा, "पार्टी में मची अंदरूनी टूट और कानूनी उलझनों को देखते हुए चुनाव आयोग का यह फैसला पूरी तरह न्यायसंगत और निष्पक्ष है।"

28 साल तक जोड़ाफूल के सहारे बंगाल की सियासत पर राज करने वाली ममता बनर्जी के लिए यह उप-चुनाव अब सिर्फ सीट का नहीं, बल्कि अपनी नई पहचान का चुनाव बन गया है।

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पिछले वर्ष बने थे मूल सड़क, टूटना शुरू तो चिंता शुरू, बंगाल के माझेरडाबरी चाय बागान इलाका ।                    ✍️- वांग्...
18/09/2026

पिछले वर्ष बने थे मूल सड़क, टूटना शुरू तो चिंता शुरू, बंगाल के माझेरडाबरी चाय बागान इलाका ।
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच हकीकत की एक तस्वीर अलीपुरद्वार जिले के माझेरडाबरी चाय बागान से आई है, जो सिस्टम की पोल खोल रही है। यहाँ की लाइफलाइन कही जाने वाली एकमात्र PCC सड़क पिछले एक महीने से टूटी-बिखरी पड़ी है, और देखने वाला कोई नहीं।

यह कोई गली-मोहल्ले की सड़क नहीं है। यह वह मुख्य धमनी है, जो पूरे माझेरडाबरी बागान को ग्राम पंचायत कार्यालय, कालकुट बस्ती और पनियालगुड़ी की मुख्यधारा से जोड़ती है। इस एक सड़क के बंद होने का मतलब है, हजारों ग्रामीणों का दुनिया से कट जाना।

PCC के नाम पर खानापूर्ति? ...

स्थानीयों का कहना है की यह सड़क पिछले वर्ष PCC (प्लेन सीमेंट कंक्रीट) के तहत बनाई गई थी। PCC सड़क को मजबूत और टिकाऊ माना जाता है, पर यहाँ तो बनने के कुछ समय बाद ही इसकी सीमेंट उखड़ गई, गिट्टियां बाहर आ गईं और जगह-जगह गहरे गड्ढे बन रहे। सवाल उठ रहा है - क्या निर्माण में गुणवत्ता से समझौता किया गया? क्या यह PCC के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति थी?

एक महीने से सड़क की हालत बद से बदतर होती जा रही है, पर मरम्मत के नाम पर एक ईंट तक नहीं लगी।

एम्बुलेंस फंसती है, मरीज तड़पता है ...

इस टूटी सड़क की सबसे बड़ी मार पड़ रही है बीमार और बुजुर्गों पर। ग्रामीणों ने बताया कि टूटे-फूटे रास्ते के कारण एम्बुलेंस बागान के अंदर आने से कतराती है। कई बार गंभीर मरीजों को खाट पर लादकर या टोटो में जान जोखिम में डालकर मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है। बरसात में तो यह रास्ता कीचड़ का दलदल बन जाता है, जहाँ पैदल चलना भी दूभर है।

स्कूली बच्चों, चाय श्रमिकों और रोज कमाने-खाने वाले हजारों लोगों की रोज की यात्रा इसी बदहाल रास्ते से होकर गुजरती है।

प्रशासन मौन, जनप्रतिनिधि गायब ...

हजारों की आबादी वाले इस इलाके का दर्द सुनने वाला कोई नहीं। ग्रामीणों ने पंचायत से लेकर ब्लॉक तक गुहार लगाई, पर हर जगह से सिर्फ आश्वासन का झुनझुना मिला।

सवाल सीधा है - जब सरकार हर घर तक पक्की सड़क पहुँचाने का दावा करती है, तो माझेरडाबरी के लोगों की इस एकमात्र सड़क की सुध कौन लेगा? क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही सड़क की मरम्मत नहीं हुई, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे। अब देखना है कि टूटी सड़क पर प्रशासन की नींद टूटती है या नहीं।

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बंगाल के 'लाल आतंक' का बड़ा चेहरा गिरफ्तार, 15 साल से फरार थे माओवादी नेता असीम मंडल!                    ✍️- वांग्देन ला...
17/09/2026

बंगाल के 'लाल आतंक' का बड़ा चेहरा गिरफ्तार, 15 साल से फरार थे माओवादी नेता असीम मंडल!
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

पश्चिम बंगाल में वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। कोलकाता पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने सीपीआई (माओवादी) के शीर्ष नेता असीम मंडल उर्फ आकाश को धर दबोचा है। वह पिछले 15 साल से कानून की आँखों में धूल झोंक कर फरार चल रहा था।

STF ने उसे पूर्व मेदिनीपुर के पटाशपुर के लालाट इलाके से एक बेहद गोपनीय ऑपरेशन में गिरफ्तार किया। इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा महकमे में हलचल तेज हो गई है।

कौन है असीम मंडल? संगठन की रीढ़ ...

असीम मंडल कोई छोटा-मोटा कैडर नहीं, बल्कि माओवादी संगठन की विचारधारा और रणनीति का आर्किटेक्ट माना जाता है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक वह -

- सीपीआई (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य है।
- पश्चिम बंगाल स्टेट कमेटी-I का सचिव रहा है।

यानी बंगाल में संगठन को दोबारा खड़ा करने की पूरी जिम्मेदारी इसी के कंधों पर थी। पिछले डेढ़ दशक से वह झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा के घने जंगलों में ठिकाने बदल-बदल कर रह रहा था।

तकनीक ने पकड़ा, 15 साल की दौड़ खत्म की ...

इस बार उसे उसकी परछाई नहीं, बल्कि तकनीकी खुफिया तंत्र ने पकड़वाया। STF को उसके सक्रिय होने की टेक्निकल इंटेलिजेंस मिली थी। इसी इनपुट को आधार बनाकर कई दिनों तक ट्रैप बिछाया गया और अंततः पटाशपुर में उसे घेर लिया गया।

पुलिस अब उससे सघन पूछताछ में जुटी है। एजेंसियों का फोकस अब उसके स्लीपर सेल, फंडिंग नेटवर्क और उन शहरी संपर्कों पर है, जो इतने सालों तक उसे पनाह देते रहे।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने की STF की पीठ थपथपाई ...

इस बड़ी सफलता पर मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कोलकाता पुलिस STF की जमकर सराहना की है। उन्होंने अधिकारियों और जवानों के ऑपरेशनल कौशल को बधाई देते हुए कहा -

"बंगाल में 'रेड टेरर' को दोबारा सिर उठाने नहीं दिया जाएगा। किसी भी चरमपंथी विचारधारा को राज्य की शांति और विकास में बाधा बनने की इजाजत नहीं मिलेगी। कानून अपना काम सख्ती से करेगा।"

सीएम के इस बयान से साफ है कि राज्य सरकार अब माओवादी नेटवर्क के सफाये के मूड में है।

फिलहाल STF ने असीम मंडल को रिमांड पर लेकर उसके 15 साल के फरार जीवन का पूरा कच्चा-चिट्ठा खंगालना शुरू कर दिया है।

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बंगाल आ रहा बिहार के बाघिन, सम्भालेंगी डुवर्स के बक्सा टाईगर जंगल                   ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " सोच जागर...
17/09/2026

बंगाल आ रहा बिहार के बाघिन, सम्भालेंगी डुवर्स के बक्सा टाईगर जंगल
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

सदियों से सन्नाटे में डूबा बक्सा का जंगल अब फिर से दहाड़ने वाला है। बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (VTR) की एक रॉयल बंगाल बाघिन का बंगाल के बक्सा टाइगर रिजर्व में गृह प्रवेश होने जा रहा है। वन विभाग के सूत्रों के अनुसार सब कुछ तय रहा तो ' 2 अक्टूबर 2026 ' को यह ऐतिहासिक ट्रांसलोकेशन होगा।

सवाल है - बिहार की बाघिन ही क्यों? बक्सा को ही क्यों चुना गया? और क्या इस बाघिन के कदमों से बक्सा में बाघों का वंश फिर से पनपेगा? आइए समझते हैं इस पूरे मिशन को।

बंगाल से बाघ गायब क्यों? बिहार से क्यों आ रही है बाघिन?

पश्चिम बंगाल के अलीपुरद्वार स्थित बक्सा टाइगर रिजर्व देश के सबसे हरे-भरे रिजर्व में से एक है, पर विडंबना देखिए - यहाँ स्थायी बाघ लगभग खत्म हो चुके हैं। कैमरा ट्रैप में कभी-कभार भूटान और असम के मानस से भटक कर आए नर बाघ की तस्वीर कैद हो जाती है, पर रुकता कोई नहीं।

इसी सूनापन को खत्म करने के लिए केंद्र सरकार और ' NTCA ' ने 13वें बाघ पुनर्वास कार्यक्रम के तहत बक्सा को चुना है।

एक्सपर्ट्स की थ्योरी साफ है - ' नर को रोकने के लिए मादा चाहिए।' सर्दियों में जो नर बाघ भूटान और मानस से बक्सा की सीमा तक आते हैं, वे अगर यहाँ किसी मादा की मौजूदगी की गंध पाएंगे, तो यहीं बस जाएंगे। इससे प्रजनन होगा और बक्सा फिर से आबाद होगा।

इसी मिशन के तहत अगस्त के अंत और सितंबर की शुरुआत में WII और बिहार वन विभाग ने 10-12 बाघिनों को शॉर्टलिस्ट किया। अब 15 सितंबर से सुंदरबन और बक्सा के अधिकारियों की संयुक्त टीम VTR में डेरा डाले हुए है। 8 से 10 दिन तक चलेगी यह मैराथन स्टडी, जिसके बाद एक बाघिन फाइनल होगी।

VTR के निदेशक गौरव ओझा ने पुष्टि की है, "फिलहाल एक बाघिन को बक्सा भेजा जाएगा। पूरी प्रक्रिया NTCA की तीन सदस्यीय एक्सपर्ट टीम की निगरानी में हो रही है।"

चयन कोई मजाक नहीं। सिर्फ खूंखार देखकर नहीं, बल्कि उसकी सेहत, उम्र, व्यवहार और नए जंगल में सर्वाइव करने की क्षमता को परख कर ही ट्रांसलोकेशन होगा।

वाल्मीकि टाइगर रिजर्व ही क्यों? दो ठोस वजहें

पहला ... एक जैसा इकोसिस्टम, एक जैसा डीएनए ...

बक्सा और वाल्मीकि दोनों हिमालय के तराई क्षेत्र के जंगल हैं। दोनों जगह बंगाल टाइगर (पैंथेरा टाइग्रिस टाइग्रिस) ही राज करते हैं। दोनों जगह हिरण, नीलगाय, जंगली सुअर जैसे शिकार मौजूद हैं। VTR के बाघ हाथी और गैंडे को देखकर बड़े हुए हैं, जो बक्सा में भी हैं। इसलिए इस बाघिन को नए घर में एडजस्ट होने में दिक्कत नहीं होगी। एक्सपर्ट अभिषेक कहते हैं, "जैसे एक बंगाली को दूसरे बंगाली जिले में बसने में दिक्कत नहीं होती, वैसे ही VTR की बाघिन के लिए बक्सा पराया नहीं होगा।"

दुसरा ... VTR में जगह कम, बाघ ज्यादा ...

बाघ अपना इलाका बनाकर रहता है। VTR का कुल क्षेत्र 899.38 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें कोर एरिया सिर्फ 598.45 वर्ग किमी है। NTCA के नियम के मुताबिक एक नर बाघ को 60 वर्ग किमी और मादा को 20 वर्ग किमी चाहिए। पर VTR में आज 65 से ज्यादा बाघ हैं। यानी एक जोड़े के हिस्से में सिर्फ 18 वर्ग किमी आ रहा है। यह भीड़ कम करने के लिए भी ट्रांसलोकेशन जरूरी हो गया था।

जो बंगाल जा रही है, वो कितनी खूंखार है?

जिस बाघिन की बात हो रही है, वह कोई साधारण बिल्ली नहीं, वह जंगल की महारानी है।

- ' कद-काठी ' : 7 से 9 फीट लंबी, 110 से 160 किलो वजनी, 10 से 12 साल की जिंदगी।
- ' दांत और जबड़ा ' : बिल्ली प्रजाति में सबसे लंबे - करीब 4 इंच के नुकीले दांत। एक झटके में शिकार की गर्दन और रीढ़ की हड्डी तोड़ने में माहिर।
- ' दहाड़ ' : इसकी दहाड़ 4 किलोमीटर तक गूंजती है, मानो जंगल में अलार्म बज रहा हो।
- ' रफ्तार और ताकत ' : 60 KM प्रति घंटे की रफ्तार, 6 गुना तेज नाइट विजन और एक रात में 27 किलो मांस खाने की क्षमता। ऊपर से शानदार तैराक।
- ' पहचान ' : हर बाघ की धारियां इंसानों के फिंगरप्रिंट की तरह यूनिक होती हैं।

क्या बक्सा में वंश बढ़ा पाएगी यह बाघिन?

वाइल्डलाइफ एक्सपर्ट समीर सिन्हा कहते हैं, "बिल्कुल। बिहार और बंगाल के बाघों का जेनेटिक मेकअप 95% एक जैसा है। इसलिए प्रजनन में कोई अड़चन नहीं।"

आमतौर पर ट्रांसलोकेशन के लिए युवा बाघिन चुनी जाती है। बाघिन 3-4 साल में वयस्क हो जाती है और एक बार में 2 से 6 शावकों को जन्म देती है। शावक 18 से 24 महीने तक मां के साथ रहकर शिकार करना सीखते हैं, फिर अपना इलाका बनाने निकल जाते हैं।

अगर यह बाघिन बक्सा में सेट हो गई, तो अगले 2 साल में ही बक्सा के सन्नाटे में नन्ही दहाड़ें गूंजने लगेंगी।

यह सिर्फ एक बाघिन की शिफ्टिंग नहीं, यह बक्सा के पुनर्जन्म की कहानी है। बिहार ने पाला है, अब बंगाल पालेगा।

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बंगाल के चाय श्रमिकों 20℅ बोनस मिलेंगे, पर मजदूरी बढ़ेंगे कब? असली सवाल?                    ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " ...
17/09/2026

बंगाल के चाय श्रमिकों 20℅ बोनस मिलेंगे, पर मजदूरी बढ़ेंगे कब? असली सवाल?
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

सरकार ने आखिरकार घोषणा कर दी है। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए चाय श्रमिकों को 20 प्रतिशत बोनस, 5 अक्टूबर तक भुगतान अनिवार्य। खबर सुनकर बागान में थोड़ी हलचल है, पर तालियां नहीं बज रही हैं। क्योंकि श्रमिक जानता है, यह हर साल का एक सीन है।

कभी बोनस गायब हो जाता है, तो कभी 8.33% का टुकड़ा फेंक दिया जाता है, जैसे भीख दी जा रही हो। यह बोनस नहीं, यह हर साल दुर्गा पूजा से पहले शुरू होने वाला एक सरकारी नाटक है, जिसका अंत श्रमिक की आँखों के आँसू से होता है।

असली सवाल बोनस नहीं, मजदूरी है ...

सरकार ने 20% बोनस देकर अपनी जिम्मेदारी पूरी समझ ली, पर उस सवाल का क्या जो 70 साल से पूछा जा रहा है?

आज बंगाल के चाय श्रमिक की दैनिक मजदूरी 250 रुपये के आसपास है, जबकि केरल में यही मजदूरी 400 रुपये से ज्यादा है। बोनस एक बार का मरहम है, मजदूरी रोज का दर्द है। बोनस से पूजा की एक साड़ी आ जाएगी, पर मजदूरी से पूरे साल का चूल्हा कैसे जलेगा?

श्रमिक पूछ रहा है - जब बोनस 20% हो सकता है, तो मजदूरी 500 रुपये क्यों नहीं हो सकती?

' बोनस के पीछे का काला सच - PF, ग्रेच्युटी और पानी तक नहीं'

जरा बागान के अंदर चलिए। सच्चाई बोनस से कहीं ज्यादा भयावह है।

पहला... PF और ग्रेच्युटी का घोटाला, कई बागानों में श्रमिकों की तनख्वाह से PF काटा तो जाता है, पर वह उनके खाते में जमा ही नहीं होता। जिंदगी भर पत्ती तोड़ने के बाद जब श्रमिक रिटायर होता है, तो पता चलता है कि उसका ग्रेच्युटी का पैसा तो बागान मालिक ही खा गया। बुढ़ापे की लाठी ही गायब है।

दुसरा... पीने के पानी तक को तरसते लोग, जिस बंगाल में हर घर जल योजना के दावे हैं, वहाँ आज भी डुवर्स के कई बागानों में श्रमिक एक किलोमीटर दूर से पीने का पानी ढोकर लाते हैं। लेबर लाइन में शौचालय टूटे हैं, अस्पताल में डॉक्टर नहीं, दवा नहीं।

तीसरा... डिग्री लेकर भी वही टोकरी, यह सबसे बड़ा दर्द है। बागान का युवा आज ग्रेजुएशन कर रहा है, MA कर रहा है, पर नौकरी कहाँ है? अंत में उसे भी माँ की तरह पीठ पर टोकरी बांधकर उसी बागान में उतरना पड़ता है। शिक्षा ने उसे सपने दिखाए, पर बागान ने उसे फिर से मजदूर बना दिया। बेरोजगारी नहीं, यह शिक्षित बेरोजगारों की पूरी फौज है जो पत्ती तोड़ रही है।

भीख नहीं, लाइवलीहुड चाहिए ...

श्रमिक को बोनस की भीख नहीं चाहिए। उसे लाइवलीहुड चाहिए, गरिमा चाहिए। उसे तय मजदूरी, समय पर जमा होता PF, रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी, पीने का साफ पानी, और उसके बच्चों के लिए बागान से बाहर निकलने का रास्ता चाहिए।

सरकार अगर 5 अक्टूबर तक 20% बोनस दिला सकती है, तो क्या वह 2026 तक न्यूनतम मजदूरी 500 रुपये करने का ऐलान नहीं कर सकती? क्या वह हर बागान का PF ऑडिट नहीं करा सकती?

बोनस से पूजा मन जाएगी, पर सवाल जस का तस रहेगा - क्या चाय श्रमिक सिर्फ पूजा में याद करने की चीज है, या वह इस राज्य का नागरिक भी है?

अब श्रमिक दहाड़ नहीं, हिसाब मांग रहा है।

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15 अक्टूबर से 'डुवर्स' हो या 'बंगाल' या 'भारत ' अब कटेंगे पैमेंट चार्ज                    ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " सो...
16/09/2026

15 अक्टूबर से 'डुवर्स' हो या 'बंगाल' या 'भारत ' अब कटेंगे पैमेंट चार्ज
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

दूध-सब्जी से लेकर ऑनलाइन शॉपिंग तक, जिस UPI ने आम आदमी की जिंदगी आसान कर दी है, उस पर चार्ज लगने की खबर ने हलचल मचा दी है। हर जुबान पर एक ही सवाल है - क्या अब डिजिटल पेमेंट पर जेब ढीली करनी पड़ेगी?

सरकार ने इस भ्रम को खत्म करते हुए साफ कर दिया है कि आम उपभोक्ता को एक भी रुपया अतिरिक्त नहीं देना होगा। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) और नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने नया मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) फ्रेमवर्क जारी किया है, जो 15 अक्टूबर 2026 से देशभर में लागू होगा।

सरकार ने पेमेंट ऐप्स को दी सख्त हिदायत ...

नए फ्रेमवर्क के तहत Google Pay, PhonePe, Paytm जैसे थर्ड पार्टी ऐप्स को स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि वे यूजर्स से किसी भी प्रकार की प्लेटफॉर्म फीस, हिडन चार्ज या सुविधा शुल्क नहीं वसूल सकते। UPI आम आदमी के लिए पहले की तरह ही 100% मुफ्त रहेगा।

A to Z नियम - किस पर कितना चार्ज?

1. दोस्तों-रिश्तेदारों को पैसा भेजना (P2P) - पूरी तरह फ्री

आप किसी दोस्त, परिजन या परिचित को चाहे 100 रुपये भेजें या 1 लाख रुपये, आप पर एक रुपये का भी बोझ नहीं पड़ेगा। P2P ट्रांजैक्शन पहले की तरह शून्य शुल्क पर जारी रहेगा।

2. दुकान पर 2000 रुपये तक भुगतान (P2M) - कोई चार्ज नहीं

किराना, सब्जी, ऑटो-कैब या ऑनलाइन शॉपिंग के दौरान QR कोड स्कैन कर 2000 रुपये तक का भुगतान करने पर ग्राहक और दुकानदार दोनों पर कोई MDR नहीं लगेगा।

3. 2000 रुपये से अधिक का भुगतान - चार्ज दुकानदार पर ...

यदि आप किसी बड़े मर्चेंट को 2000 रुपये से अधिक का भुगतान करते हैं, तो उस पर 0.4% MDR लगेगा, लेकिन यह राशि आपकी जेब से नहीं कटेगी। इसका वहन दुकानदार या पेमेंट इकोसिस्टम करेगा। बैंक या मर्चेंट इसे ग्राहक से वसूल नहीं कर सकते, यह सरकारी फरमान है।

4. जरूरी सेवाओं पर फ्लैट चार्ज ...

पेट्रोल पंप, रेलवे टिकट, बीमा जैसी आवश्यक सेवाओं में 2000 रुपये से अधिक के भुगतान पर सिर्फ 5 रुपये का फिक्स्ड फ्लैट चार्ज लगेगा, और इसका बोझ भी ग्राहक पर नहीं डाला जाएगा।

UPI पर MDR मर्चेंट्स के लिए है, कस्टमर्स के लिए नहीं। आम आदमी पहले की तरह बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के बेधड़क UPI कर सकेगा।

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उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल बनेगा विश्व स्तरीय सड़क, लागत 1042 करोड़                     ✍️- वांग्देन लामा- संपादक " सोच...
16/09/2026

उत्तर बंगाल से लेकर जंगलमहल बनेगा विश्व स्तरीय सड़क, लागत 1042 करोड़
✍️
- वांग्देन लामा
- संपादक " सोच जागरूक डुवर्स "
- उत्तर बंगाल(भारत)

बंगाल की सड़कों की सूरत बदलने वाली है। त्योहारों से पहले केंद्र सरकार ने पश्चिम बंगाल के लिए विकास का पिटारा खोल दिया है। राज्य के लोक निर्माण विभाग के प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए केंद्र ने CRIF (केंद्रीय सड़क और अवसंरचना निधि) के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1,042.62 करोड़ रुपये की 6 महात्वाकांक्षी सड़क परियोजनाओं को हरी झंडी दे दी है।

इस ऐतिहासिक मंजूरी से उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल और जंगलमहल तक, राज्य के तीनों अहम हिस्सों में 194 किलोमीटर से अधिक सड़क नेटवर्क को नया, मजबूत और विश्वस्तरीय स्वरूप मिलेगा।

मंगलवार को मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद सोशल मीडिया पर इस बड़ी सौगात की जानकारी साझा की। उन्होंने इस निर्णय के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) का पश्चिम बंगाल सरकार और प्रदेश की जनता की ओर से हार्दिक आभार व्यक्त किया।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य का लोक निर्माण विभाग इन परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर धरातल पर उतारेगा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कार्य में सर्वोच्च गुणवत्ता मानकों से कोई समझौता नहीं होगा और सभी परियोजनाओं को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण संपर्क और राजमार्ग नेटवर्क को सुदृढ़ करना उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इस पहल से न सिर्फ आवागमन सुगम होगा, बल्कि व्यापार, पर्यटन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।

राज्य सरकार ने दोहराया कि बंगाल के आर्थिक विकास को नई ऊंचाई देने और सड़क अवसंरचना को अंतरराष्ट्रीय स्तर का बनाने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

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