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तलाक के बाद कौन भरता है ज्वॉइंट लोन? घर खरीदने से पहले जान लें यह नियम https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-...
31/08/2026

तलाक के बाद कौन भरता है ज्वॉइंट लोन? घर खरीदने से पहले जान लें यह नियम
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पिछले कई दिनों से FSSAI की कड़ी कार्रवाई कंपनियों की पैकेजिंग पर चल रही है. इसी कड़ी में कुछ दिन पहले ही फसाई ने ओल्ड मॉन्क रम की पैकेजिंग पर सवाल खड़े किए थे. जिसके बाद अब ये रम बनाने वाली कंपनी ने फैसला किया है कि ओल्ड मॉन्क की बोतलों का लेबल बदला जाएगा. ये फैसला Mohan Meakin कंपनी ने किया है.
FSSAI ने कुछ शराब प्रोडक्ट्स में इस्तेमाल होने वाले सामानों और बोतल पर लिखे गए शराब की उम्र से जुड़े दावों पर सवाल उठाए थे. इस विवाद का असर महाराष्ट्र में कुछ शराब ब्रांड की बिक्री पर भी पड़ा है.
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क्या थी Old Monk पर आपत्ति?रिपोर्ट्स के मुताबिक, FSSAI के नोटिस के बाद महाराष्ट्र में ओल्ड मॉन्क की बिक्री प्रभावित हुई. इसके बाद मोहन मीकिन ने बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया. FSSAI का कहना था कि ओल्ड मॉन्क में प्राकृतिक रूप से गन्ने से तैयार स्पिरिट की जगह बड़ी मात्रा में न्यूट्रल स्पिरिट और आर्टिफिशियल फ्लेवरिंग का इस्तेमाल किया गया है.
उम्र के दावे पर भी आपत्तिरेगुलेटर ने बोतल पर लिखे 7 years old blended दावे पर भी सवाल उठाया था. यानी कंपनी के मुताबिक शराब को सात साल पुरानी शराब के साथ ब्लेंड किया गया था. विवाद को खत्म करने के लिए कंपनी ने लेबल से शराब की उम्र से जुड़े दावे हटाने और भविष्य में बोतल पर एक्स्ट्रा फ्लेवरिंग के इस्तेमाल की जानकारी साफ तौर पर देने पर सहमति जताई है.
इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कंपनी को सितंबर तक नया लेबल डिजाइन करके रिव्यू के लिए जमा करने को कहा है. हालांकि, फिलहाल FSSAI के बिक्री रोकने वाले आदेश पर कोई अंतरिम रोक नहीं लगाई गई है.
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अन्य ब्रांड्स पर भी शिकंजाबता दें कि ओल्ड मॉन्क के अलावा भी कुछ अन्य प़पुलर शराब ब्रांड भी फसाई की जांच के दायरे में आए हैं. इनमें एंटीक्विटी, ब्लू व्हिस्की, रॉयल चैलेंज व्हिस्की और बैगपाइपर डीलक्स व्हिस्की जैसे ब्रांड शामिल हैं. फसाई के मुताबिक, जांच में कुछ प्रोडक्ट्स में ऐसे आर्टिफिशियल या नेचर-आइडेंटिकल फ्लेवर पाए गए, जो तय नियमों के मुताबिक नहीं थे.

पिछले कई दिनों में फसाई का एक्शन लिकर ब्रांड्स पर चल रहा है, इसी कड़ी में Old Monk की बोतल का भी लेबल बदलने वाला है. क्योंक....

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अगर आप Marie बिस्किट खाते हैं तो पैकेट पर लिखी एक बात आपके लिए भी जानना जरूरी है. McVities Wholewheat Marie बिस्किट्स को लेकर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण CCPA ने यूनाइटेड बिस्किट्स प्राइवेट लिमिटेड पर 1 लाख का जुर्माना लगाया है. प्राधिकरण के मुताबिक, बिस्किट के नाम में होल व्हीट लिखा था, लेकिन इसमें होल व्हीट आटे की मात्रा सिर्फ 19.5% थी.
ये मामला तब सामने आया जब CCPA ने सोशल मीडिया पर सामने आई एक खबर को देख कर खुद जांच की इसमें McVities होल व्हीट marie बिस्किट को हेल्दी, नेचुरल और ऑर्गेनिक बताकर प्रचार किए जाने और इसके इंग्रेडिएंट्स पर सवाल उठाए गए थे. इसके बाद CCPA ने बिस्किट की पैकेजिंग और ऑनलाइन उपलब्ध जानकारी की जांच की. जांच में पता चला कि प्रोडक्ट में 19.5% साबुत गेहूं का आटा था, जबकि 52% रिफाइंड गेहूं का आटा मैदा मौजूद था.
होल व्हीट नाम पर CCPA ने जताई एतराज
CCPA का कहना था कि पैकेट पर Wholewheat शब्द को खास देखा के इस्तेमाल करने से आम कस्टमर को यह लग सकता है कि बिस्किट मुख्य रूप से पूरे गेहूं के आटे से बना है. जबकि प्रोडक्ट में इसकी मात्रा काफी कम थी. इसी वजह से अधिकारी ने इसे गलत दावा माना. इस मामले की जांच, जांच इन्वेस्टिगेशन ने भी की थी. उसने 16 जुलाई 2026 को अपनी रिपोर्ट सौंपी, जिसमें बिस्किट के नाम और उसमें मौजूद साबुत गेहूं के आटे की मात्रा के बारे में जानकारी दी गई थी.
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कंपनी ने ट्रेडमार्क का दिया हवाला
यूनाइटेड बिस्किट्स ने अपनी सफाई में कहा कि होल व्हीट Marie बिस्किट एक रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क है और wholewheat का इस्तेमाल ब्रांड की पहचान के लिए किया गया है. कंपनी ने पैकेट पर मौजूद डिसक्लेमर का भी हवाला दिया. कंपनी ने बाद में पैकेजिंग बदलने और रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क से wholewheat शब्द हटाने की पेशकश की. साथ ही पुराने पैकेट इस्तेमाल करने के लिए 9 महीने का समय मांगा.
CCPA ने कंपनी की दलील खारिज की
CCPA ने कहा कि किसी शब्द के रजिस्टर्ड ट्रेडमार्क होने से कंपनी को गलत जानकारी देने की अनुमति नहीं मिल जाती. प्राधिकरण ने यह भी कहा कि पैकेट पर दिया गया डिस्क्लेमर छोटे अक्षरों में और मुख्य दावे के नीचे था, इसलिए वो Wholewheat के प्रमुख दावे को सही तरीके से सही नहीं करता. CCPA ने कंपनी को सभी प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया माध्यमों से इस गलत ad को तुरंत बंद करने का निर्देश दिया है. नए पैकेजिंग में भी इस दावे को हटाने को कहा गया है. साथ ही यूनाइटेड बिस्किट्स को आदेश की तारीख से 15 दिनों के अंदर नियमों का पालन करने की रिपोर्ट जमा करनी होगी.
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McVities Wholewheat Marie बिस्किट्स में सिर्फ 19.5% whole wheat flour मिलने पर CCPA ने बड़ी कार्रवाई की है और यूनाइटेड बिस्किट्स पर 1 लाख जुर्माना ल.....

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अमेरिका में काम करने वाले भारतीयों की मुश्किल बढ़ने वाली है, खासतौर से वो भारतीय जो H1-B वीजा पर अमेरिका गए हुए हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि ट्रम्प प्रशासन ने किसी भी ऐसे भारतीय की नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, अभी ये नियम लागू नहीं हुआ है और फिलहाल मौजूदा 60 दिन की सुविधा जारी है.
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) ने इस सुविधा को खत्म करने का प्रस्ताव तैयार किया है. इस प्रस्ताव को 27 अगस्त को व्हाइट हाउस के ऑफिस ऑफ इन्फॉर्मेशन एंड रेग्युलेटरी अफेयर्स (OIRA) से रिव्यू की मंजूरी मिल गई है.
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क्या होगा इस फैसले का असर?अगर ये प्रस्ताव अंतिम नियम बन जाता है, तो नौकरी जाने के बाद विदेशी कर्मचारियों के पास अमेरिका में रुककर दूसरी नौकरी तलाशने के लिए 60 दिनों का समय भी नहीं रहेगा. अभी अगर किसी H-1B कर्मचारी की नौकरी चली जाती है, तो वो ग्रेस पीरियड के दौरान दूसरी कंपनी तलाश सकता है. नई कंपनी उसके लिए H-1B आवेदन कर सकती है और नियमों की शर्तें पूरी होने पर कर्मचारी अमेरिका में रहते हुए नई नौकरी शुरू कर सकता है.
इसके अलावा ग्रेस पीरियड खत्म होने पर नौकरी जाने के बाद कर्मचारी के इमिग्रेशन स्टेटस पर तुरंत असर पड़ सकता है. हालांकि, फिलहाल केवल प्रस्ताव रखा गया है, इस पर अभी अंतिम फैसला आना बाकी है. ऐसे में इसके सटीक नियमों के बारे में अभी कुछ कहना जल्दबाजी होगी.
भारतीयों पर पड़ेगा ज्यादा असरइस प्रस्ताव का असर सबेसे ज्यादा भारतीय प्रोफेशनल्स पर पड़ेगा. क्योंकि H-1B वीजा पाने वालों में भारतीयों की बड़ी हिस्सेदारी है. वित्त वर्ष 2024 में मंजूर हुए H-1B पीटिशन में 71% आवेदक भारत में जन्मे लोगों के थे. इसलिए H-1B कर्मचारियों के लिए नौकरी बदलना मुश्किल होने पर भारतीय टेक्नोलॉजी और अन्य कुशल प्रोफेशनल्स पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है.
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अभी क्या मिलती है सुविधा?फिलहाल जो नियम हैं उसके मुताबिक अगर किसी योग्य विदेशी कर्मचारी की अमेरिका में नौकरी चली जाती है, तो उसे अधिकतम 60 दिनों तक अमेरिका में रहने का मौका मिलता है. ये अवधि उसके मौजूदा वीजा की वेलिडिटी खत्म होने से पहले भी खत्म हो सकती है. इस दौरान कर्मचारी काम नहीं कर सकता, लेकिन उसे दूसरी नौकरी तलाशने, नया वीजा या इमिग्रेशन स्टेटस लेने या अमेरिका छोड़ने की तैयारी करने का समय मिलता है.
ये सुविधा H-1B के अलावा H-1B1, L-1, O-1, E-1, E-2, E-3 और TN जैसी कुछ अन्य श्रेणियों के विदेशी कर्मचारियों पर भी लागू होती है. कर्मचारियों के साथ उनके आश्रित परिवार के सदस्यों पर भी इसका असर पड़ सकता है.

अमेरिका में काम करने वाले H-1B कर्मचारियों की परेशानी आने वाले समय में बढ़ सकती है. ऐसा इसलिए क्योंकि अमेरिकी सरकार 60 ....

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बढ़ती महंगाई से इस वक्त हर कोई परेशान है. त्योहार के समय में चीनी की बढ़ती कीमत ने आम लोगों का बजट हिलाकर रख दिया है. रोजाना इस्तेमाल होने वाली चीनी के दाम बढ़ने से लोगों की जेब पर भी असर पड़ रहा है. इस बीच एक राहत की खबर है. मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत में गिरावट देखने को मिली है.
कितनी गिरावट हुई है?
दरअसल, मिल से निकलने वाली चीनी की कीमत लगभग 30 प्रतिशत कम हुई है. जिसके बाद अब चीनी की कीमत 47 रुपये प्रति किलो हो गई है. ऐसे में कई लोगों ये जानना चाहेंगे कि क्या इसका असर आम ग्राहकों को भी देखने को मिलेगा या नहीं?
कीमतों में अचानक गिरावट क्यों हुई?
अचानक ही मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स मिल कीमत में गिरावट नहीं हुई है, बल्कि यह गिरावट सरकार के एक फैसले के बाद हुई है. ऐसे में लोग जानना चाहेंगे कि सरकार ने क्या फैसला लिया है, जिसके बाद कीमत में गिरावट देखने को मिली है.
रिटेल दुकानों पर गिरावट का दिखेगा असर
बता दें कि फिलहाल आम ग्राहकों को दुकानों पर इसका फायदा मिलने में कुछ समय लग सकता है. जानकारी के मुताबिक, दुकानों में ग्राहकों को इसका फायदा कम से कम 10 दिन में दिखने को मिल सकता है.
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सरकार का फैसला क्या है?
अब सरकार ने एक्सपोर्ट के लिए तैयार की गई रिफाइंड चीनी को देश के बाजार में बेचने की परमिशन दे दी है. सबसे खास बात तो यह है कि आने वाले कुछ महीनों में लगभग 3 से 3.5 लाख टन चीनी बाजार में आने की उम्मीद की जा रही है.
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आम लोगों को मिलेगा फायदा
अगर आने वाले दिनों में दुकानों पर चीनी के दाम में गिरावट आती है तो इसका फायदा सीधे लोगों की जेब पर पड़ेगा.

जिन लोगों के घर में चीनी का इस्तेमाल ज्यादा होता है उनका खर्च कम होगा.
अगर चीनी सस्ती होती है तो मिठाई, बेकरी और दूसरे सामानों पर भी असर पड़ सकता है.
होटल, रेस्टोरेंट और मिठाई की दुकान वालों का भी खर्च कम हो सकता है.
अभी दुकानों पर चीनी के दाम कम होने में समय लग सकता है तो इसलिए चीनी का फिलहाल इस्तेमाल सोच-समझकर करना ही बेहतर होगा.

चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच एक जरूरी जानकारी सामने आई है. मिल से निकलने वाली चीनी यानी एक्स मिल कीमतों में 30 प्रतिशत ...

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गुटखा और पान मसाला खाने वालों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है. गुजरात सरकार ने तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा व पान मसाला पर लगे प्रतिबंध को 1 साल तक और बढ़ा दिया है. अब राज्य में इन उत्पादों पर बैन 12 सितंबर 2027 तक लागू रहेगा.
सरकार का कहना है कि उन्होंने यह फैसला लोगों की सेहत को ध्यान में रखते हुए लिया है. काफी लंबे समय से तंबाकू उत्पादों के सेवन को कई गंभीर बीमारियों से जोड़कर देखा जाता रहा है. ऐसे में साल 2012 से लागू इस बैन के तहत गुटखा और पान मसाला की बिक्री, निर्माण, भंडारण और वितरण पर पूरी तरह रोक जारी रहेगी.
गुटखा-पान मसाला के किन कामों पर रहेगा रोक?
गुजरात में तंबाकू और निकोटीन युक्त गुटखा और पान मसाला पर यह रोक 13 सितंबर से अगले एक साल तक जारी रहेगी. यह नियम उन सभी उत्पादों पर लागू होगा, जिन्हें किसी भी नाम से गुटखा या पान मसाला के रूप में बेचा जाता है. हालांकि यह नियम सिर्फ किसी एक ब्रांड या नाम तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सभी के लिए लागू है. अगर अलग-अलग बेची जाने वाली सामग्रियों मिलाकर गुटखा या पान मसाला तैयार किया जाता है, तो उन पर भी यह रोक लाजिम है.
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सरकार ने क्यों बढ़ाया बैन?
सरकार ने कई एक्सपर्टों की रिसर्च का हवाला देते हुए कहा कि गुटखा और पान मसाला का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदायक है. उन्होंने कहा है कि इन उत्पादों के सेवन से मुंह के कैंसर का खतरा काफी ज्यादा बढ़ जाता है. इसके अलावा सरकार ने बताया कि भारत में बड़ी संख्या में लोग तंबाकू का सेवन करते हैं, जिनमें कई लोग धुआं रहित तंबाकू उत्पादों का भी इस्तेमाल करते हैं.
नियम तोड़ने वालों पर होगी कार्रवाई
गुजरात सरकार ने कहा है कि अगर कोई इस नियम को तोड़कर प्रतिबंधित उत्पादों की बिक्री, निर्माण या वितरण करता है, तो खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. क्योंकि सरकार के इस नए फैसले का खास मकसद लोगों को तंबाकू से होने वाले स्वास्थ्य नुकसान से बचाना और उनकी सेहत को बेहतर बनाना है.
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गुजरात सरकार ने तंबाकू और निकोटीन वाले गुटखा व पान मसाला पर प्रतिबंध को 12 सितंबर 2027 तक बढ़ा दिया है. स्वास्थ्य कारणो....

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दुनियाभर में महंगाई की मार देखने को मिल रही है. अब तक हम केवल भारत की ओर देख रहे थे, लेकिन पड़ोसी मुल्क का हाल भी बेहाल है. पाकिस्तान में सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं. खासतौर से लाहौर में बढ़ती महंगाई ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. खाने-पीने की चीजें, किराया, गैस, बिजली और दूसरी जरूरी चीजों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. कम आमदनी वाले परिवारों के लिए घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है.
सब्जियां बिक रहीं ऊंचे दामों परटाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक लाहौर के लोगों ने सब्जियों की बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जताई है. उनका कहना है कि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाले आलू और टमाटर जैसी सब्जियां भी महंगी हो गई हैं. अलग-अलग बाजारों में सब्जियों के दाम करीब 150 से 300 रुपये प्रति किलो तक बताए जा रहे हैं.
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स्थानीय लोगों ने क्या कहा?स्थानीय लोगों का कहना है कि महंगाई इतनी बढ़ गई है कि कुछ परिवारों के लिए दिन में दो वक्त का खाना जुटाना भी मुश्किल हो रहा है. आटा, खाना पकाने का तेल, दाल, सब्जियों समेत कई जरूरी सामान महंगे हो गए हैं. वहीं, दिहाड़ी मजदूरों और कम कमाई वाले लोगों की आमदनी महंगाई की रफ्तार से नहीं बढ़ी है.
सरकार से की गई मांगएक स्थानीय निवासी ने सरकार से गरीब परिवारों की परेशानी दूर करने की अपील की. उसने कहा कि बढ़ते खाने के खर्च, किराए और बिजली-पानी के बिलों के बीच परिवार चलाना बहुत मुश्किल हो गया है. कम आय वाले परिवारों को खाना, किराया, दवाइयों और दूसरी जरूरी चीजों में से किसी एक को चुनने की स्थिति आ रही है.
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पेट्रोल हुआ सस्तालोगों का कहना है फिलहाल तो देश में पेट्रोल की कीमतें भी कम हो गई हैं, लेकिन फिर भी महंगाई की मार पड़तीही जा रही है. एक रिक्शा चालक ने ANI को बताया कि पेट्रोल और जरूरी सामान की बढ़ती कीमतों ने उसकी कमाई पर काफी असर डाला है. घर का खर्च निकालने के बाद बचत के लिए कुछ नहीं बचता.

पाकिस्तान के लाहौर में जनता महंगाई से काफी ज्यादा परेशान है. सब्जियों के दाम जिस कदर यहां बढ़ रहे हैं उसकी वजह से अब...

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केंद्रीय कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग पर टिकी हुई है और इसी बीच आयोग से जुड़ी एक अहम खबर सामने आई है. 8वें वेतन आयोग में काम करने का मौका पाने के लिए आवेदन की प्रोसेस चल रही है, लेकिन अब इसके लिए समय बहुत कम बचा है. कंसल्टेंट के अलग अलग पदों पर आवेदन करने की आज यानी 31 अगस्त आखिरी तारीख है. ऐसे में लायक उम्मीदवार आज ही आयोग की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं.
इस भर्ती में अलग अलग तजुर्बा वाले उम्मीदवारों के लिए पद रखे गए हैं. सीनियर कंसल्टेंट के 2 पद हैं, जिसके लिए 10 साल का तजुर्बा और ज्यादा से ज्यादा 45 साल की उम्र फिक्स की गई है. कंसल्टेंट के 6 पदों के लिए 6 साल का तजुर्बा जरूरी है और उम्मीदवार की उम्र 40 साल से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. वहीं, कंसल्टेंट यंग प्रोफेशनल के लिए 2 साल का तजुर्बा मांगा गया है.
ईमेल का 7 दिनों के भीतर देना होगा जवाब
इन पदों को मिलाकर कुल 23 पदों पर आवेदन किया जा सकता है. चुने गए उम्मीदवारों को ईमेल के जरिए इसकी जानकारी दी जाएगी. ईमेल मिलने के बाद 7 दिन के अंदर जवाब देना होगा और 30 दिन के अंदर जॉइन करना होगा. उम्मीदवार का कोई जुर्म का रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए. इस पद पर एक साल के लिए नौकरी होगी या फिर 8वें वेतन आयोग का कार्यकाल जितना रहेगा, उतने समय के लिए होगी. दोनों में से जो समय कम होगी, पद उतने ही समय तक रहेगी.
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8वें वेतन आयोग से कर्मचारियों को बड़ी उम्मीद
केंद्रीय कर्मचारियों की नजर 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट पर है. आयोग का गठन नवंबर 2025 में किया गया था और इसे अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है. इसी रिपोर्ट के आधार पर केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी में बदलाव की उम्मीद है.
कर्मचारियों की मांगों को समझने के लिए आयोग देश के अलग अलग हिस्सों में बैठकें भी कर रहा है. दिल्ली, लखनऊ और ओडिशा में बैठकें हो चुकी हैं. वहीं जयपुर और पुडुचेरी में बैठकें प्रोसेस मे हैं.
फिटमेंट फैक्टर पर सबसे ज्यादा जोर
केंद्रीय कर्मचारियों के संगठन फिटमेंट फैक्टर को लेकर लगातार मांग उठा रहे हैं. कुछ संगठनों ने इसे 3.83 करने की मांग की है. इसके साथ ही फैमिली यूनिट को 3 से ज्यादाकर के 5 करने की मांग भी सामने आई है.
फिटमेंट फैक्टर का सीधा असर बेसिक पे पड़ता है. इसी वजह से कर्मचारी संगठन चाहते हैं कि इसे ज्यादा रखा जाए, ताकि वेतन में अच्छी इजाफा हो सके.
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8वें वेतन आयोग में कंसल्टेंट के 23 पदों पर भर्ती निकली है. जिसके लिए 31 अगस्त आवेदन की आखिरी तारीख है. जिसमें सीनियर कंस...

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पिछले दिनों महंगाई बढ़ने के कारण लगा था कि भारत की अर्थव्यवस्था इस साल कुछ गड़बड़ा रही है. लेकिन हाल ही में आई मिनिस्ट्री ऑफ स्टेटिक्स एंड प्रोग्राम (MoSPI) की रिपोर्ट ने जो आंकड़े पेश किए हैं वो हैरान करने वाले हैं. इन आंकड़ों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में अच्छी रफ्तार बनाए रखी है. इस दौरान देश की असली GDP 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी है.
पहली तिमाही की रिपोर्टदरअसल 31 अगस्त यानी सोमवार को MoSPI ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के GDP के आंकड़े जारी किए हैं. जिनके मुताबिक, अप्रैल-जून तिमाही में नॉमिनल GDP में 10.3 प्रतिशत की तेजी नजर आई है. सरकार के अनुसार, दुनिया में जारी आर्थिक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अपनी विकास की रफ्तार बनाए रखी है.
पीएम मोदी ने जताई खुशीवहीं ये आंकड़े सामने आने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी खुशी जाहिर की है. उन्होंने कहा कि, 'वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की 7.8% की शानदार GDP ग्रोथ एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. हमारे लोगों की सामूहिक ताकत ने ये सुनिश्चित किया कि ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और सप्लाई चेन की दिक्कतों के बावजूद भारत ने ऐसी ग्रोथ हासिल की. निराशावादी गलत साबित हुए और भारत ने एक बार फिर कामयाबी की नई ऊंचाई छुई!'
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2022-23 बना बेस ईयरइस बार GDP के आंकड़े 2022-23 को बेस ईयर मानकर जारी किए गए हैं. सरकार ने 27 फरवरी 2026 को GDP की वार्षिक और तिमाही गणना की नई सीरीज जारी की थी. इसके बाद 5 जून 2026 को वित्त वर्ष 2025-26 के GDP के शुरुआती यानी प्रोविजनल आंकड़े जारी किए गए थे.
पुराने आंकड़े भी हुए अपडेटमंत्रालय ने वित्त वर्ष 2022- 23, 2023- 24 और 2024- 25 के वार्षिक आंकड़ों को भी अपडेट किया है. इसके लिए नए डाटा और अलग-अलग सरकारी स्रोतों से मिले आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा, वित्त वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही से 2025-26 की चौथी तिमाही तक के GDP आंकड़ों को भी अपडेट किया गया है. वित्त वर्ष 2025- 26 के प्रोविजनल GDP आंकड़ों में भी नए डाटा को शामिल किया गया है.
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GDP आंकड़ों में क्या-क्या शामिलGDP की गणना में औद्योगिक उत्पादन, कीमतें, बैंकिंग सेवाएं और अलग-अलग सरकारी विभागों से मिले प्रशासनिक आंकड़ों को शामिल किया गया है. मंत्रालय ने GDP के साथ अर्थव्यवस्था में खपत, निवेश और दूसरे खर्चों से जुड़े आंकड़े भी जारी किए हैं. ये आंकड़े स्थिर कीमतों यानी 2022-23 के आधार पर और मौजूदा कीमतों दोनों में दिए गए हैं.

वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की अर्थव्यवस्था ने काफी रफ्तार पकड़ी है. हाल ही में आए आंकड़ों के मुताबिक भारत की अर्थव्यवस....

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31/08/2026

तलाक के बाद कौन भरता है ज्वॉइंट लोन? घर खरीदने से पहले जान लें यह नियम
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फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato इस समय काफी चर्चा में आ गया है. हाल ही में कंपनी ने फैसला किया है कि वो अपने प्लेटफॉर्म पर एनालॉग पनीर नहीं बेचेगा. इसी बीच एक खबर और सामने आ रही है, जिसने जोमैटो के कर्मचारियों को निराश कर दिया है. दरअसल खबर है कि जोमैटो ने अपने करीब 240 कर्मचारियों को नौकरी से निकालने का फैसला कर लिया है.
किन कर्मचारियों की हुईं छंटनी?कंपनी ने हैदराबाद में अपना कस्टमर डिलाइट यानी कस्टमर सपोर्ट ऑपरेशन बंद करने का फैसला किया है. अब इस काम को सिर्फ गुरुग्राम की एक जगह से ही संचालित किया जाएगा. कंपनी ने ये फैसला अपने कस्टमर डिलाइट मॉडल और कर्मचारियों की जरूरतों के लिए किए गे रिव्यू के बाद लिया है. कंपनी ने बताया है कि कर्मचारियों के प्रदर्शन में कोई कमी नहीं थी, ये कंपनी ने केवल अपने फायदे को देखते हुए किया है.
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क्या है इस छंटनी की वजह?कंपनी से जुड़े सूत्रों ने बताया है कि, पिछले छह महीनों में जोमैटो के कस्टमर सपोर्ट मॉडल में बड़ा बदलाव आया है. अब कस्टमर सपोर्ट का ज्यादा काम बाहरी एक्सपर्ट कंपनियों के जरिए किया जा रहा है. ऐसे में कंपनी का जो काम इन-हाउस बचा है, उसे एक ही टीम के रूप में गुरुग्राम से चलाने का फैसला किया गया है. कंपनी चाहती है कि ये टीम उसके प्रोडक्ट, टेक्नोलॉजी, डाटा और बिजनेस टीमों के करीब रहकर काम करे.
4 महीने की मिलेगी सैलरीजिन कर्मचारियों की नौकरी गई है उन सभी 240 कर्मचारियों को चार महीने की सैलरी के बराबर सेवरेंस पैकेज दिया जाएगा. इसमें नोटिस पीरियड की सैलरी और एक बार मिलने वाली एक्स्ट्रा राशि शामिल होगी. इसके अलावा, कर्मचारियों का मेडिकल इंश्योरेंस और काउंसलिंग की सुविधा 31 मार्च 2027 तक जारी रहेगी. कंपनी उन्हें नौकरी के नए अवसर तलाशने में मदद के लिए आउटप्लेसमेंट सपोर्ट भी देगी. इतना ही नहीं बल्कि कंपनी की ओर से दिए गए लैपटॉप और ईयरफोन भी कर्मचारियों को निजी इस्तेमाल के लिए दे दिए जाएंगे.
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फूड डिलीवरी प्लेटफॉर्म Zomato ने अपने करीब 240 कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया है. उन्हें केवल 4 महीने की सैलरी दी गई है. य...

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