22/01/2026
वाराणसी में मूर्ति टूटी या नहीं टूटी, वह AI से बनी वीडियो है या सच में है?? इससे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता।
यदि मणिकर्णिका घाट को सुव्यवस्थित करने की नीयत से कार्य हो रहा है और उस दौरान कोई गलती हो भी गई तो वह क्षम्य और स्वीकार्य है। निर्माण में कुछ न कुछ टूट फुट, गलती, नुकसान आदि कोई अचरज की बात नहीं है। यदि ऐसा कुछ हुआ है तो उसे सुधार भी लिया जाएगा। लेकिन यदि मणिकर्णिका घाट पर जारी निर्माण कार्य इसे बर्बाद करने, ख़राब करने के उद्देश्य से किया जा रहा होता तो वहाँ कोई टूट फुट न भी हो तो वह अक्षम्य है।
किसी भी कार्य का आंकलन उस कार्य के पीछे निहित नीयत से किया जाता है। मुझे इस बात में कोई शक नहीं है कि मणिकर्णिका घाट पर जो भी कार्य हो रहा है, उसका उद्देश्य उसका सुंदरीकरण, उसको सुव्यवस्थित करना, उसे भव्य बनाना है। यदि आपको उसके नए मॉडल से आपत्ति है तो भी समझ आता है लेकिन उसके आधार पर मोदी योगी को आप धर्म विरोधी बताना चाहते हैं तो सच ये है कि आप ही धर्म विरोधी हैं बस आपको मोदी योगी को कोसने का एक मौक़ा चाहिए था।
इस देश में थेथरलाॅजी और बेवक़ूफ़ी की कोई सीमा नहीं है। कभी मुंबई में धक्के खाते लोगों को, इस धक्के को वहाँ का वाइब बता दिया जाता है, कभी बनारस की बदबू और सीलन से बजबजाती छोटी तंग गलियों को बनारसीपना बता दिया जाता है। ये सब बेवक़ूफ़ी बड़े शातिर तरीक़े से हमारे दिमाग़ में भर दिया जाता है। फिर हमें ई रिक्शा से भरे सड़क स्वीकार हो जाते हैं, ट्रैफिक जाम शहर की पहचान लगने लग जाती है, धुआ, धूल, कालिख आदि संस्कृति बन जाती है, गाली लोक संस्कृति बन जाती है।
इस तरह के बेवक़ूफ़ी से उबरने की ज़रूरत है। ऐसा ही हो-हल्ला तब भी मचा था जब काशी विश्वनाथ मंदिर के परिसर और अगल बगल के क्षेत्रों को सुव्यवस्थित किया गया था। उसी तरह का हो-हल्ला इस बार मचा है। यदि इतना सुरक्षित किसी सरकार को चलना हैं तो सबसे अच्छा होगा कि कहीं कोई सुधार का काम ही न करे क्योंकि कुछ भी सुधार करेंगे तो हो हो-हल्ला तो होगा ही। ऐसे देश आगे नहीं बढ़ सकता। समाज को बरगलाकर सड़ाने का जो काम किया गया, अब उसे किसी भी बहाने से स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सुधार जारी रहना चाहिए