Anju Gautam

Anju Gautam Anju Gautam
Teacher

14/04/2026
19/10/2025

संविधान बाबासाहेब ने ही क्यों लिखा और कोई दूसरा क्यों नहीं लिख सका ???पढ़िए और चार लोगों में सर उठाकर बताइए....
बाबासाहब नं.१ थे
गांधी भी Barrister थे,
नेहरु भी Barrister थे,

राजगोपालाचारी,
मुंशी,
बी. एन. राव ,
जे . पी. कृपलानी
ऐसे बहुत सारे लोग थे ।

फिर बाबासाहब को ही संविधान क्यों लिखना पड़ा...?

1946 मे Constitution Assembly के election हुए ,
नेहरु और पटेल ने ये declare किया था कि ,

"हमने संविधान सभा के सारे दरवाजे , खिडकिया बंद कर दिये हैं, देखते हैं बाबासाहब कैसे अन्दर आते हैं?"

ये उस वक्त की political स्थिति थी ।

क्योंकि वो सब लोग जानते थे कि " बाबासाहब वो व्यक्ति हैं जो हमारी
कोंग्रेस को नहीं मानते,
गांधी को नहीं मानते,
नेहरू को नहीं मानते
और
पूरे देश और दुनियां में इनकी अपनी एक position है ।

Constitution तो वह तब लिखेंगे जब वे संविधान सभा मे आयेंगे , हम उनको संविधान सभा में आने ही नहीं देंगे , हम उन्हें जीतने ही नहीं देंगें ..." ऐसा Open Declaration वल्लभभाई पटेल ने दिया था...!

इसलिये बाबासाहब को संविधान सभा मे जाने के लिये ventilator के सहारे जाना पड़ा, वो ventilator था,

"जैसुर-खुलना" बंगाल का इलाका, वहां से बाबासाहब को लड़ना पड़ा और बाबासाहब संविधान सभा मे चुने गये

3 जुन 1947 मे भारत और पाकिस्तान का बंटवारा करके बाबा साहब का वह इलाका पाकिस्तान के हवाले जान बूजकर किया गया था।

बाबासाहब कांग्रेस की गद्दारी से पाकिस्तान संविधान सभा के मेंबर बन गए थे।

तब बाबासाहब ने प्रेशर से काम किया ।

उस वक्त भारत मे 560 रियासतों में से हैद्राबाद, भोपाल, त्रवनकोर, कोल्हापूर, इनको भारत मे कैसे शामिल किया जाये , इनका Constitutional Settlement कैसे किया जाये इसके लिये British Cabinet की Meeting हुई ।

हैदराबाद, त्रावनकोर, कश्मीर इन तीनों राज्यों ने ये declare किया कि, हम भारत मे शामिल नहीं होंगे, हम पाकिस्तान की तरह स्वतंत्र होंगे ।

उस वक्त नेहरु, पटेल और गांधी किसी को ये समझ में नहीं आ रहा था कि, इन 560 रियासतों को किस तरह settlement किया जाये..!

17 जून 1947 में बाबासाहब ने International Press को संबोधित किया ।

जिसमें उन्होने तीन बातें बोली....

1) ब्रिटिश पार्लियामेंट को भारत के राज्य के संप्रभुता, सार्वभौम के ऊपर Law बनाने का कोई अधिकार नहीं हैं ! ऐसा कोई International Law नहीं हैं । जिसके तहत ये राज्य भारत मे रहेंगे, या नहीं रहेंगे ये decide करने का अधिकार और power ब्रिटिश पार्लियामेंट के पास नहीं हैं..!

2) और इन सारे राज्यों के राजाओं से अपील है कि, "अगर तुम सोचते हो कि आप सयुक्त राष्ट्र में जाओगे , और सयुक्त राष्ट्र भारत की सार्व भौमिकता नजर अंदाज करके आपको Independence बनायेगा तो आपसे बड़ा नासमझ कोई नहीं है..! "

3) इन सारे राजाओं को बाबासाहब ने कहा, " आप सभी भारत मे शामिल हो जाओ , हम इसी देश के अंदर आपका Constitutional Settlement कर सकते हैं और हम एक बडा राष्ट्र बना सकते हैं..!" और यह सब बाबासाहब ने तब कहा था, जब नेहरु, गांधी और पटेल को समझ में नहीं आ रहा था कि इन राज्यों का Integration कैसे किया जाये ...!

बाबासाहब आंबेडकर को संविधान लिखने का मौका क्यों मिला इसके दो मुख्य कारण हैं..

1) उस समय बाबासाहब से बड़ा Constitutional expert, Constitutional philosopher दुनियां में कोई नहीं था ....1927 Bombay legislative council से लेकर labour Ministry, Constitute assembly तक जो बाबासाहब आंबेडकर ने विविध legislative के काम किये थे उसे पूरी दुनियां जानती थी !
Govt. Of India act 1935 जो बना उसके लिये जो तीन Rountable Conferences हुई उसमें बाबासाहब ने जो views दिये थे । उनका 50% amendment Govt. Of India act 1935 में हुआ था !

2) मुसलमानों के बाद भारत में दूसरा सबसे बडा Minority,
schedule caste था,
और बाबासाहब आंबेडकर ने ये stand लिया था कि, अगर बनने वाले संविधान में हमारे संवैधानिक अधिकार सुरक्षित नहीं रखे गये तो, वह संविधान हमें मंजूर नहीं होगा ।

नेहरू और गांधी को ये डर था कि, यदि partition of India हुआ और उसके बाद अगर संवैधानिक solution नहीं मिला, तो भारत के 560 टुकड़े हो सकते हैं ।

भारत का balkanization हो सकता हैं । और अगर ये हमे रोकना हैं, तो एक ही आदमी इस देश को बचा सकता है, और वो हैं Dr बाबासाहब आंबेडकर.....
और
इसलिए Dr. बाबासाहब आंबेडकर को संविधान लिखने का मौका मिला ...

संविधान सभा मे Drafting कमैटी को मिलाकर total 23 कमेटियां बनीं ।
जिसमें से २० कमेटी पे अकेले बाबासाहेब ने ही काम किया और संविधान का ड्राफ्ट 141 दिनों मे तैयार किया ।

इससे ये मालुम होता हैं कि बाबासाहब दुनियां के सबसे बडे Constitutionality Expert थे....।

Drafting कमैटी में जितने लोग थे उनमें से
कोई बीमार हुआ,
कोई छुट्टी पर चला गया,
कोई विदेश गया ,
कोई अपने घर के कामों में व्यस्त रहे ।
किसी ने रिजाईन की वह जगह खाली रही ।

इसलिये खुद टि. टि. कृश्नमाचारी बोले कि " पूरा संविधान बनाने का काम अकेले बाबासाहब पर आ गया और उन्होने उसे बहुत खूबी से निभाया !"

इसलिये 1950 के बाद नया भारत बना।

जिसे हम लोकतांत्रिक और संविधानिक भारत कहते हैं, जिसका बाबासाहब ने निर्माण किया ।

"लोकतांत्रिक और संवैधानिक भारत के राष्ट्रपिता Dr. बाबासाहब आंबेडकर हैं", ये हमें समझने कि जरुरत हैं।

संविधान प्रेमियों "उत्तम" जानकारी शेयर करें
जय भीम!!

14/09/2025

*बहुजन :आत्मचिंतन एवं आत्म सुधार* *की आवश्यकता* -

*महात्मा बुद्ध,फुले दम्पत्ति, बोधिसत्व बाबासाहब आदि महापुरुषों की बात करने के साथ उनकी बातों पर अमल भी किया जाना जरूरी है।बोधिसत्व बाबासाहब ने अपने महान ग्रन्थ Annihilation of Caste (1936) में लिखा है कि जाति के विनाश का सर्वोत्तम उपचार अंतरजातीय विवाह में है।बाबासाहब के उक्त कथन को कहे हुए 89 वर्ष हो चुके लेकिन उनके अनुयायियों ने सजातीय विवाह को कसकर पकड़े रखा अर्थात वे भी मनुवाद को ही पालते-पोसते रहे।हर समय जातिवाद का रोने वाला दलित वर्ग का व्यक्ति भी सजातीय विवाह को नहीं छोड़ता है। इसलिए न तो जाति व्यवस्था टूटी और न ही दलित अंदर से मजबूती से एकजुट हुए।एक दलित जाति का व्यक्ति अन्य दलित जातियों के प्रति अविश्वास से भरा रहता है क्योंकि इनमें अंतर्विवाह नहीं है।यही हाल OBC एवं ST का है।कई बहुजन जातियां अपने को क्षत्रिय माने बैठी हैं और जातीय दंभ से भरी हुई हैं।असल में मनुवाद केवल सवर्णों में ही नहीं है बहुजनों में भी है।बहुजन जातिवाद के लिए गालियां सवर्णों को देते हैं लेकिन आपस में अंतर्विवाह नहीं करते। आपस में रोटी-बेटी के रिश्ते न करने के लिए बहुजन भाई तमाम बहाने भी बनाते हैं एवं इस विषय पर चर्चा से भागते नजर आते हैं।कभी कभी हां भी करते दिखते हैं लेकिन अपने बुजुर्गों,सजातीय लोगों एवं घर महिलाओं की आड़ लेते दिखते हैं। वे स्वेछा से इस मामले में आगे नहीं बढ़ना चाहते हैं। इनमें अनेक बहुजन -अंतर्विवाह के विरोधी भी हैं। अनेक सजातीय गौरव एवं अभिमान से भरे हुए हैं।अनेक अन्य बहुजन जातियों के नेताओं के विरुद्ध अभियान चलाते हैं।अनेक महापुरुषों में भी जाति ढूंढते हैं।स्पष्ट है कि आज जाति को बनाए रखने के लिए बहुजन भी बराबर के उत्तरदाई हैं।हमें इस विषय पर गंभीर आत्मचिंतन करने की जरूरत है।*
*सजातीय विवाह छोड़ो।*
*बहुजन समाज जोड़ो।।*
_सादर नमो बुद्धाय जय भीम_ *जय संविधान जय भारत* 🙏

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18/08/2025

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👑 क्वीन ऑफ राजस्थान 2025✨ विजेता: पलक मिश्रा🥈 फर्स्ट रनर-अप: साक्षी सैनी
15/08/2025

👑 क्वीन ऑफ राजस्थान 2025
✨ विजेता: पलक मिश्रा
🥈 फर्स्ट रनर-अप: साक्षी सैनी

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