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ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रज़ा तलायी-निक का बड़ा बयान।उनके अनुसार, ईरान अभी अपने हथियारों का इस...
11/03/2026

ईरान के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल रज़ा तलायी-निक का बड़ा बयान।

उनके अनुसार, ईरान अभी अपने हथियारों का इस्तेमाल सोच-समझकर और नियंत्रित गति से कर रहा है, जबकि ज्यादा आधुनिक और ताक़तवर हथियारों को फिलहाल सुरक्षित रखा गया है।

इस बयान के बाद मध्य-पूर्व की स्थिति और वैश्विक राजनीति पर नई बहस शुरू हो गई है।

🔥 अगर हालात और बिगड़ते हैं तो क्या ईरान अपने सबसे ताक़तवर हथियार इस्तेमाल करेगा?

💬 आपकी क्या राय है? Comment में जरूर बताइए।

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🚨 अगर भारत में एक ही कानून सब पर लागू हो जाए तो क्या होगा?ना हिंदू कानून… ना मुस्लिम कानून… ना अलग-अलग पर्सनल लॉ।यही है ...
11/03/2026

🚨 अगर भारत में एक ही कानून सब पर लागू हो जाए तो क्या होगा?
ना हिंदू कानून… ना मुस्लिम कानून… ना अलग-अलग पर्सनल लॉ।

यही है Uniform Civil Code (UCC) — और इसी वजह से पूरे देश में इसकी चर्चा तेज हो रही है।

अभी भारत में शादी, तलाक, विरासत और गोद लेने जैसे मामलों में धर्म के हिसाब से अलग-अलग कानून लागू होते हैं।

जैसे:
• हिंदुओं के लिए Hindu Personal Law
• मुसलमानों के लिए Muslim Personal Law
• ईसाइयों के लिए Christian Personal Law

लेकिन अगर UCC लागू होता है, तो पूरे देश के सभी नागरिकों के लिए एक ही सिविल कानून होगा, चाहे उनका धर्म कुछ भी हो।

भारत के संविधान में भी इसका जिक्र किया गया है।
Article 44 of the Constitution of India के अनुसार सरकार को देश में Uniform Civil Code लागू करने की कोशिश करनी चाहिए।

कुछ लोग कहते हैं कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और महिलाओं की स्थिति मजबूत होगी।

लेकिन दूसरी तरफ कुछ लोग मानते हैं कि इससे धार्मिक परंपराओं और व्यक्तिगत कानूनों पर असर पड़ सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि भारत में एक जगह ऐसी है जहाँ लगभग UCC जैसा सिस्टम पहले से लागू है — Goa।

अब असली सवाल यह है 👇

🔥 क्या एक देश में सबके लिए एक ही कानून होना चाहिए?
या फिर धर्म के अनुसार अलग कानून बने रहना चाहिए?

💬 आप UCC के पक्ष में हैं या विरोध में?
अपनी राय Comment में जरूर बताइए।

🇮🇳

🚨 ब्रेकिंग: दुनिया भर की सरकारें UFO और एलियंस से जुड़ी गुप्त फाइलें सार्वजनिक करने की तैयारी में हैं।दशकों तक इन घटनाओं...
20/02/2026

🚨 ब्रेकिंग: दुनिया भर की सरकारें UFO और एलियंस से जुड़ी गुप्त फाइलें सार्वजनिक करने की तैयारी में हैं।
दशकों तक इन घटनाओं को अफवाह कहा गया…
अब अधिकारी खुद मान रहे हैं — आसमान में अज्ञात वस्तुएँ मौजूद हैं।
सवाल ये है:
सच क्या है?
और अभी क्यों?
👁️ सच शायद हमारे सोच से ज़्यादा करीब है।

#ब्रेकिंगन्यूज़ #एलियंस #रहस्य #गुप्तफाइलें

सिम कार्ड मेरा, मोबाइल मेरा…फिर ‘इनकमिंग’ कॉल पर ताला क्यों?बैलेंस खत्म होते हीगरीब का फोन “अनरीचेबल” बना देनासेवा नहीं…...
19/02/2026

सिम कार्ड मेरा, मोबाइल मेरा…
फिर ‘इनकमिंग’ कॉल पर ताला क्यों?

बैलेंस खत्म होते ही
गरीब का फोन “अनरीचेबल” बना देना
सेवा नहीं… मजबूरी पर वसूली है।

आउटगोइंग बंद होना समझ आता है,
पर इनकमिंग पर रोक —
सीधे-सीधे कनेक्शन का किराया है।

क्या आप सहमत हैं?















🌙✨ रमज़ान का पाक महीना शुरू होने वाला है…अल्लाह की रहमत, बरकत और मग़फ़िरत से भरा यह महीनाआपके दिल को सुकून और घर को खुशि...
18/02/2026

🌙✨ रमज़ान का पाक महीना शुरू होने वाला है…
अल्लाह की रहमत, बरकत और मग़फ़िरत से भरा यह महीना
आपके दिल को सुकून और घर को खुशियों से भर दे।

🤲 दुआ है कि इस रमज़ान
आपकी हर नेक दुआ कबूल हो
और आपका हर दिन इबादत की रौशनी से जगमगाए।

🌙 **रमज़ान मुबारक** 🌙
आपको और आपके पूरे परिवार को दिल से मुबारकबाद




राजस्थान के तिजारा क्षेत्र के शादिपुर गांव से आई यह प्रेरक कहानीबताती है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती।शादी और जिम्मेद...
18/02/2026

राजस्थान के तिजारा क्षेत्र के शादिपुर गांव से आई यह प्रेरक कहानी
बताती है कि शिक्षा की कोई उम्र नहीं होती।

शादी और जिम्मेदारियों के 16 साल बाद
बिल्किस ने 10वीं पास कर
महिला शिक्षा की नई मिसाल कायम की।

यह उपलब्धि हर उस महिला के लिए प्रेरणा है
जो हालात के बावजूद सीखना चाहती है।



फेयरवेल खुशी का मौका है —लेकिन तहज़ीब की सीमा के साथ।आज जरूरत है कि हम अपने बच्चों कोसिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि किरदार, हया...
18/02/2026

फेयरवेल खुशी का मौका है —
लेकिन तहज़ीब की सीमा के साथ।

आज जरूरत है कि हम अपने बच्चों को
सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि किरदार, हया
और सही संस्कार भी दें।

जागरूक माता-पिता ही
बेहतर समाज की नींव हैं।




फेयरवेल खुशी का मौका हो — गलत रिवाज़ का नहीं।आज जरूरत है कि हम अपने बच्चों को सही तालीम,सही माहौल और सही रहनुमाई दें।   ...
18/02/2026

फेयरवेल खुशी का मौका हो — गलत रिवाज़ का नहीं।

आज जरूरत है कि हम अपने बच्चों को सही तालीम,
सही माहौल और सही रहनुमाई दें।



14 फरवरी 2019 भारतीय इतिहास का वह दर्दनाक दिन है जिसे राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। जम्मू–कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी ह...
13/02/2026

14 फरवरी 2019 भारतीय इतिहास का वह दर्दनाक दिन है जिसे राष्ट्र कभी नहीं भूल सकता। जम्मू–कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश ने अपने 40 से अधिक वीर सीआरपीएफ जवानों को खो दिया। यह केवल एक हमला नहीं था, बल्कि भारत की आत्मा पर किया गया प्रहार था, जिसने पूरे देश को शोक, आक्रोश और संकल्प में एकजुट कर दिया। उन वीर जवानों ने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राण न्यौछावर किए और मातृभूमि की रक्षा का सर्वोच्च बलिदान दिया।

पुलवामा के शहीद केवल सैनिक नहीं थे, वे किसी के बेटे, पिता, पति और भाई थे। उनका बलिदान हमें याद दिलाता है कि हमारी सुरक्षा और स्वतंत्रता की कीमत कितनी बड़ी होती है। यह दिन हमें आतंकवाद के विरुद्ध एकजुट रहने, राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने और शहीदों के परिवारों के प्रति सम्मान व कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है।

आइए इस काले दिवस पर हम उन सभी अमर वीरों को नमन करें, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान दिया। उनकी शहादत भारत की स्मृति में सदैव अमर रहेगी और आने वाली पीढ़ियों को देशभक्ति और साहस की प्रेरणा देती रहेगी।

मेजर अब्दुल्लाह खान बाघोड़िया मेवात क्षेत्र के उन विशिष्ट ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं, जिन्होंने सैन्य सेवा,...
13/02/2026

मेजर अब्दुल्लाह खान बाघोड़िया मेवात क्षेत्र के उन विशिष्ट ऐतिहासिक व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं, जिन्होंने सैन्य सेवा, राजनिष्ठा और सामाजिक नेतृत्व—तीनों क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। अलवर रियासत के महाराजा जय सिंह के एडीकांग (एडीसी) अधिकारी के रूप में उन्होंने न केवल राजकीय सेवा निभाई, बल्कि कठिन राजनीतिक परिस्थितियों में भी अपनी वफादारी और कर्तव्यनिष्ठा का उदाहरण प्रस्तुत किया। अलवर तहरीक (1932–33) के दौरान जब कई सहयोगियों ने महाराजा का साथ छोड़ दिया, तब भी मेजर अब्दुल्लाह अडिग रहे और संकट काल में उनके विश्वस्त सहयोगी बने रहे।

महाराजा जय सिंह के देश निकाला और निधन के बाद उत्पन्न राजनैतिक अस्थिरता में भी मेजर अब्दुल्लाह की भूमिका निर्णायक रही। उनकी सलाह पर महारानी ने जय सिंह के चचेरे भाई तेज सिंह को गद्दी पर बैठाया, जिससे अलवर राज्य में शासन की निरंतरता बनी रही। यह उनके राजकीय विवेक और प्रभाव का प्रमाण है।

सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण रहा। मेव समाज की शिक्षा और संगठन के लिए उन्होंने पहल करते हुए महाराजा तेज सिंह से वर्तमान मेव बोर्डिंग की भूमि आवंटित करवाई और उसकी स्थापना की आधारशिला रखी। इस प्रकार मेजर अब्दुल्लाह खान बाघोड़िया केवल एक सैन्य अधिकारी ही नहीं, बल्कि मेव समाज के शैक्षिक और सामुदायिक विकास के अग्रदूत भी थे। उनकी वफादारी, दूरदृष्टि और समाज सेवा मेवात की ऐतिहासिक विरासत का सम्मानित अध्याय है।

मेवात की धरती सदियों से शुजाअत, जुर्रत और खुद्दारी की पहचान रही है। यहाँ की मेव क़ौम ने इतिहास के हर दौर में ज़ुल्म और अ...
13/02/2026

मेवात की धरती सदियों से शुजाअत, जुर्रत और खुद्दारी की पहचान रही है। यहाँ की मेव क़ौम ने इतिहास के हर दौर में ज़ुल्म और अन्याय के सामने झुकने के बजाय प्रतिरोध और स्वाभिमान का मार्ग चुना। मध्यकालीन संघर्षों से लेकर औपनिवेशिक काल तक मेवात ने अपनी स्वतंत्रता और अस्मिता की रक्षा के लिए लगातार संघर्ष किया। ईस्ट इंडिया कंपनी के विरुद्ध लड़ाइयों में सैकड़ों मेव शहीद हुए, गाँव जलाए गए, परन्तु प्रतिरोध की परंपरा नहीं टूटी। पलवल क्षेत्र में कैप्टन ड्रमंड की सेना से युद्ध में लगभग साढ़े तीन सौ मेव वीरों का बलिदान, अली हसन का विद्रोह और स्थानीय प्रतिरोध की अनेक घटनाएँ इस क्षेत्र की संघर्षगाथा को जीवित रखती हैं।

अलवर रियासत के दौर में भी अत्याचारों और गोविंदगढ़ जैसे हत्याकांडों के विरुद्ध मेव समाज ने आवाज उठाई। 1931 के दमन और बढ़ते लगान के बावजूद मेव झुके नहीं, बल्कि अन्याय के विरुद्ध संगठित होकर खड़े हुए। यही संघर्ष अंततः राजनीतिक परिवर्तन का कारण बना। मेवात का इतिहास केवल युद्धों का नहीं, बल्कि सामूहिक साहस, सामाजिक एकता और न्याय के लिए खड़े होने की परंपरा का इतिहास है।

आज भी मेवात की पहचान भाईचारे, स्वाभिमान और ऐतिहासिक विरासत से जुड़ी है। यह भूमि उन अनगिनत शहीदों की याद दिलाती है जिन्होंने अपने अस्तित्व, सम्मान और अधिकारों की रक्षा के लिए बलिदान दिया। मेवात की यह विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा और आत्मगौरव का स्रोत बनी रहेगी।

चीन ने आधुनिक इंजीनियरिंग और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 24 किलोमीटर लंबा S...
13/02/2026

चीन ने आधुनिक इंजीनियरिंग और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 24 किलोमीटर लंबा Shenzhen–Zhongshan Sea Link तैयार किया है, जिसने वैश्विक स्तर पर तकनीकी क्षमता का नया मानक स्थापित किया है। यह परियोजना केवल एक साधारण टनल नहीं, बल्कि समुद्र के ऊपर बने विशाल पुल, कृत्रिम द्वीप और समुद्र के नीचे लगभग 6–7 किमी लंबी अंडरसी टनल का संयुक्त मेगा ढांचा है। इस 8-लेन एक्सप्रेसवे ने पहले लगभग 2 घंटे में तय होने वाली दूरी को घटाकर मात्र 20–30 मिनट कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बड़ा बढ़ावा मिला है।

इस परियोजना में अत्याधुनिक इमर्स्ड-ट्यूब टनल तकनीक, समुद्री इंजीनियरिंग, गहरे पानी में निर्माण और मेगा-स्केल ब्रिज डिजाइन का उपयोग किया गया है। समुद्र के ऊपर और नीचे एक साथ निर्मित यह मार्ग आधुनिक शहरी योजना और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास का उत्कृष्ट उदाहरण माना जा रहा है। Shenzhen–Zhongshan Link दक्षिण चीन के औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्रों को तेज़, सुरक्षित और कुशल परिवहन से जोड़ता है, जिससे लॉजिस्टिक्स, व्यापार और शहरी विकास को नई गति मिली है।

यह परियोजना दर्शाती है कि आधुनिक तकनीक और दीर्घकालिक योजना से भौगोलिक बाधाएँ भी विकास के मार्ग में रुकावट नहीं बनतीं। समुद्र के भीतर और ऊपर बना यह 24 किमी का मेगा लिंक 21वीं सदी की इंजीनियरिंग क्षमता का प्रतीक है और वैश्विक इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए प्रेरणा भी।

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