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22/10/2025

My Cute Son 😻❣️
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Boat scene, Karachi— 1890s.
18/10/2025

Boat scene, Karachi— 1890s.

17/10/2025
🇮🇳 आज के दिन ही, 17 अक्टूबर 1817 को मुग़लिया सल्तनत की दारुल हुकूमत  शाहजहाँनाबाद (दिल्ली) में एक ऐसी शख़्सियत की पैदाइश...
17/10/2025

🇮🇳 आज के दिन ही, 17 अक्टूबर 1817 को मुग़लिया सल्तनत की दारुल हुकूमत शाहजहाँनाबाद (दिल्ली) में एक ऐसी शख़्सियत की पैदाइश हुई जिसने बर्रे-सग़ीर के तारीख़ का रुख़ ही बदल दिया। नाम था सर सैय्यद अहमद ख़ान (1817 -1898) । वो एक ऐसे ख़ानदान में पैदा हुए जिसने सदियों तक मुग़ल दरबार की ख़िदमत की थी। लेकिन उनके नसीब में वो दौर लिखा था जब सल्तनत उजड़ रही थी और क़ौम बिखर रही थी।

सन् 1857 का इन्कलाब सर सैय्यद की ज़िंदगी का एक ऐसा मोड़ था जहाँ से उन्होंने नई राह तलाश की। उन्होंने देखा कि क़ौम तलवार से नहीं, क़लम से बचेगी। उन्होंने समझा कि अब वक़्त है जदीद तालीम का, वक़्त है इल्म-ओ-हुनर से दुनिया को अपना मक़ाम दिखाने का।

ग़ाज़ीपुर में उन्होंने सन् 1863 में Scientific Society की बुनियाद रखी फिर 1866 में उन्होंने Aligarh Institute Gazette का आग़ाज़ किया ताकि क़ौम को बेदार किया जा सके। और आख़िरकार 1875 में उन्होंने रखी वो बुनियाद जिसने तारीख़ बदल दी, मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज, जो आगे चल कर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बनी।

लेकिन सर सैय्यद सिर्फ़ तालीमी तहरीक के बानी (Founder) ही नहीं थे। वो एक आलिम, मुतफ़क्किर और मोअर्रिख़ (historian) भी थे। उन्होंने अपनी किताबों से हिंदुस्तान की तारीख़ को नई दिशा दी। उनकी ‘आसार-उस-सनादीद’ ने दिल्ली की इमारती विरसा (विरासत) को एक नई नज़र से देखा और हिंद-इस्लामी मीरास की हिफ़ाज़त में बुनियादी किरदार अदा किया। उन्होंने ‘आइन-ए-अकबरी’ और ‘तारीख़-ए-फ़िरोज़शाही’ जैसे अहम तवारीखी किताबों का इद्दत-ओ-तहकीक के साथ तहरीरी काम किया, जिससे हिंदुस्तान की तारीख़ निगारी में एक नया इल्मी दौर शुरू हुआ।

आज वही एएमयू ने हिंदुस्तान को कई अज़ीम शख्सियतें अता की हैं। जिनमें दो भारत रत्न, 6 पद्म विभूषण, 8 पद्मभूषण, 53 पद्मश्री और 3 ज्ञानपीठ भी शामिल हैं। इसके अलावा एएमयू ने मुल्क को 5 सुप्रीम कोर्ट के जज व 47 हाई कोर्ट के जज दिए। हर एक ने सर सैय्यद की उस रौशनी को आगे बढ़ाया जो उन्होंने एक सदी पहले जलाई थी।

हमे नहीं पता कि सर सैय्यद पर लगा कुफ़्र का फ़तवा जायज़ था या नहीं ये अल्लाह ही बेहतर जाने। लेकिन आज उनकी उसी एक कोशिश की वजह से लाखों हिन्दुस्तानियों ने आला तालीम हासिल करके मुल्क की तरक्की के लिए एक बहुत अहम् किरदार अदा किया है और आगे भी करते रहेंगे।

सर सैय्यद का सिर्फ इतना ही कहना था :-

“मैं जो कर रहा हूँ वो दीन के ख़िलाफ़ नहीं, बल्कि दीन की बेहतर फहम के लिए है।”

आज जब हम इल्म, तरक़्क़ी और जदीदियत की बात करते हैं, तो उसकी बुनियादें कहीं न कहीं अलीगढ़ की उन दीवारों में मौजूद है जहाँ सर सय्यद ने क़लम को ही तलवार बना दिया था।

सर सैय्यद अहमद ख़ान महज़ एक नाम नहीं, बल्कि एक तहरीक हैं, जो अब भी हर उस दिल में धड़कती है जो इल्म से मोहब्बत करता है।

आप सभी को सर सैय्यद डे की बहुत-बहुत मुबारकबाद।

Shrine Of Hazrat Syed Mir Sayid Ali Hamdani R.A nack in 1890s.
17/10/2025

Shrine Of Hazrat Syed Mir Sayid Ali Hamdani R.A nack in 1890s.

🌟 Sir Syed Day 2025: A Tribute to Vision and Legacy 🌟  On 17th October 2025, we honor the 208th birth anniversary of Sir...
17/10/2025

🌟 Sir Syed Day 2025: A Tribute to Vision and Legacy 🌟
On 17th October 2025, we honor the 208th birth anniversary of Sir Syed Ahmad Khan, the visionary who lit the torch of modern education in India and founded Aligarh Muslim University.

मिर्ज़ा ग़ालिब की इकलौती तस्वीर।
17/10/2025

मिर्ज़ा ग़ालिब की इकलौती तस्वीर।

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