04/05/2022
मेले में दंगल भी हुआ:धौलरा में भगवान बलभद्र के मंदिर में लगा मेला, दूर-दराज से माथा टेकने पहुंचे श्रद्धालु
सतवा तीज पर मंगलवार को गांव धौलरा में भगवान बलभद्र के मंदिर में 1 दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। मेले का शुभारंभ पूर्व सरपंच धौलरा संजू शर्मा ने किया। मेले में क्षेत्र व दूर दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भगवान बलभद्र के मंदिर में सत्तू का प्रसाद चढ़ाया और मन्नत मांगी। मेले में लगी सैकड़ों दुकानों पर लोगों ने खरीदारी की। ओमप्रकाश धौलरा, संजू धौलरा की तरफ से श्रद्धालुओं के लिए भंडारे की व्यवस्था की गई थी।
गांव के पूर्व सरपंच संजू धौलरा ने बताया कि मेले का आयोजन महाभारत काल से होता आ रहा है। मंदिर में स्थापित मूर्ति हजारों वर्ष पूर्व खुदाई के दौरान मिली थी। जिसे गांव के लोगों ने एक पीपल के पेड़ के नीचे रख दिया था। उन्हीं दिनों जगाधरी के एक सेठ बंसीलाल के यहां कोई संतान नहीं थी। तभी उनके सपने में भगवान बलभद्र जी ने दर्शन दिये और सेठ बंसीलाल को गांव धौलरा में उनका एक मंदिर बनवाने को कहा।
जिस पर सेठ बंसीलाल ने गांव में पेड़ के नीचे रखी भगवान बलभद्र की मूर्ति को वहां से उठाकर बैल गाड़ियाें के द्वारा जगाधरी लाने की योजना बनाई, लेकिन जैसे ही सेठ बंसीलाल मूर्ति को बैलगाड़ी में लादकर गांव की सीमा के बाहर निकलने लगा तो बैल अंधे हो गए। जिसके बाद सेठ को अपनी गलती का एहसास हुआ। सेठ बंसीलाल ने तभी भगवान बलभद्र जी का मंदिर गांव में बनवाया।
जिसके बाद सेठ बंसीलाल के घर बेटे ने जन्म लिया। तब से गांव में हर वर्ष सतवा तीज के दिन मेले का आयोजन होता आ रहा है। उन्होंने बताया कि भगवान बलभद्र के मंदिर में लोग अपनी मनोकामना के लिए आते हैं। यहां तक की विधानसभा व लोकसभा का चुनाव लडने वाले हर पार्टी के नेता यहां अपना माथा टेकते हैं। भगवान बलभद्र की मूर्ति किस धातु की बनी है, इसके बारे में आजतक पता नहीं चल पाया है।इस मूर्ति पर कोई रंग नहीं ठहरता।
दंगल का हुआ आयोजन
भगवान बलभद्र के मंदिर में आयोजित हुए मेले में करीब 20 हजार से अधिक लोग भाग लेने पहुंचे। गांव धौलरा की ग्रामीणों की ओर से मेले में दंगल का आयोजन करवाया गया। दंगल में क्षेत्र व दूरदराज के जाने माने पहलवानों ने भाग लिया। पहलवानों ने ग्रामीणों का खूब मनोरंजन किया। विजेता पहलवानों को ग्रामीणों की ओर से नगद पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।