11/05/2026
व्हीलचेयर पर सास को बूथ तक ले पहुंचीं डॉ. संगीता, अंबाला में दिखी लोकतंत्र की संवेदनशील तस्वीर
“एक-एक वोट की है कीमत” — सास संग मतदान कर डॉ. संगीता ने दिया जागरूक नागरिकता का संदेश
अंबाला, 11 मई।
लोकतंत्र केवल चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि सामाजिक संस्कार, पारिवारिक जिम्मेदारी और नागरिक चेतना का जीवंत उत्सव है। इसकी एक प्रेरणादायक मिसाल रविवार को अंबाला में उस समय देखने को मिली, जब असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. संगीता अपनी वृद्ध सास को व्हीलचेयर पर बैठाकर स्वयं पोलिंग बूथ तक लेकर पहुंचीं और उनके साथ मतदान किया।
मतदान केंद्र पर मौजूद लोगों ने इस भावुक और प्रेरक दृश्य को लोकतंत्र की सच्ची ताकत बताया। जहां एक ओर बुजुर्ग महिला ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति आस्था व्यक्त की, वहीं दूसरी ओर डॉ. संगीता ने अपनी जिम्मेदारी निभाकर समाज को जागरूक नागरिकता का संदेश दिया।
मतदान के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए डॉ. संगीता ने कहा, “एक-एक वोट की कीमत होती है। हर नागरिक का वोट देश और समाज की दिशा तय करता है। इसलिए मतदान केवल अधिकार नहीं, बल्कि नैतिक जिम्मेदारी भी है।”
उन्होंने निर्वाचन आयोग और प्रशासन द्वारा पोलिंग बूथ पर दिव्यांगों और बुजुर्ग मतदाताओं के लिए की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की सुविधाएं लोकतंत्र को और अधिक समावेशी और संवेदनशील बनाती हैं।
डॉ. संगीता ने युवाओं और शिक्षित वर्ग से विशेष रूप से अपील की कि वे मतदान के प्रति उदासीनता छोड़कर सक्रिय भागीदारी निभाएं। उन्होंने कहा कि जागरूक समाज वही होता है, जहां लोग बहाने नहीं बल्कि जिम्मेदारियां निभाने को प्राथमिकता देते हैं।
अंबाला में सामने आई यह तस्वीर केवल एक परिवार के मतदान की कहानी नहीं, बल्कि उस भारतीय लोकतांत्रिक संस्कृति की झलक है, जहां परिवार, संस्कार और सामाजिक चेतना एक साथ दिखाई देते हैं। ऐसी घटनाएं समाज में सकारात्मक संदेश देने के साथ-साथ लोकतंत्र के प्रति विश्वास को भी मजबूत करती हैं।