30/05/2026
अम्बेडकर नगर जिले के बसखारी थाना क्षेत्र बुकिया गांव के निवासी उर्दू अदब के अज़ीम शायर और पद्मश्री सम्मानित साहित्यकार बशीर बद्र के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है। 28 मई 2026 को 91 वर्ष की आयु में उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन को उर्दू साहित्य और शायरी की दुनिया के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। पद्मश्री डॉक्टर बशीर बद्र के पिता नज़ीर अहमद बसखारी थाना क्षेत्र के बुकिया गांव के निवासी थे, बशीर बद्र के इंतेक़ाल की खबर सुनते ही आसपास के क्षेत्रों सहित देश विदेश में चाहने वालो गहरा सदमा लगा|
बशीर बद्र की शायरी मोहब्बत, इंसानियत, तन्हाई और जिंदगी की सच्चाइयों का आईना मानी जाती है। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबान पर हैं।
“सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जाएगा,
इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जाएगा।”
“यह नए मिजाज का शहर है, जरा फासले से मिला करो।”
“मोहब्बतों में दिखावे की दोस्ती न मिला,
अगर गले नहीं मिलता तो हाथ न मिला।”