20/10/2025
दोस्तों, जैसे कि आज दीवाली है — अयोध्या दीपों से जगमगा रही थी।
माता सीता जी श्रीराम जी के लिए पकवान बना रही थीं,
लक्ष्मण जी दीप सजा रहे थे और हनुमान जी हर घर में रोशनी फैला रहे थे।
तभी एक बूढ़ी विधवा बोली —
“प्रभु, मेरे घर तो तेल भी नहीं है…”
श्रीराम जी मुस्कुराए —
“माँ, जहाँ प्रेम और विश्वास जलता है, वहाँ खुद प्रभु रोशनी बनकर उतरते हैं।”
क्षणभर में उसका घर दीयों से चमक उठा 💫
यही है सच्ची दीवाली — जो दिल के अंधेरे को मिटा दे। ❤️
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