23/11/2024
एक बार एक स्त्री श्री कृष्ण की भक्त थीं। उसके पास श्री कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप का विग्रह था। वह बहुत सेवा भाव से उस विग्रह की पूजा करती। उसके बेटे की शादी होने के पश्चात उसे एक माह के लिए तीर्थ यात्रा पर जाना था। उसने अपनी पुत्रवधू से पूछा कि बहू ,"क्या तुम मेरे जाने के पश्चात लड्डू गोपाल जी की सेवा कर दिया करोगी?"
बहू बोली - मां जी आप विधि बता दे, मैं वैसे ही सेवा कर दूंगी। सासू मां ने बताया कि सबसे पहले सुबह ठाकुर जी को उठाना, उसके पश्चात उनको स्नान करवाना , सुंदर वस्त्र , आभूषण, बांसुरी, मुकुट पहनना, तिलक , इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाना। जब ठाकुर जी मुस्कुराये और लगे वह श्रृंगार से प्रसन्न हैं तो उनको भोग लगा देना।
बहू कहने लगी कि, मां जी मैं सारी विधि समझ गई अब आप बेफिक्र होकर तीर्थ यात्रा पर जाए। सास के जाने के पश्चात बहू ने अगले दिन प्रातः ठाकुर जी को शयन से उठाया। उनके पश्चात उनको स्नान करवाया और सुंदर वस्त्र, आभूषण, तिलक, इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो उसमें उसे लगा कि ठाकुर जी तो मुस्कुराएं ही नहीं। उसने फिर से सारा श्रृंगार उतारा, उनको स्नान कराया, वस्त्र, आभूषण, तिलक, इत्र लगाकर ठाकुर जी को पुनः दर्पण दिखाया। इस बार भी उसे लगाकि लड्डू गोपाल तो मुस्कुरा ही नहीं रहे। इस प्रक्रिया को उसने कई बार दोहराया। सर्दी के दिन थे। अब तो मानो ठाकुर जी भी सोच रहे थे इतनी इतनी ठंड में अब कितनी बार स्नान करना पड़ेगा।
अबकी बार उसने ठाकुर जी को स्नान करवा कर, वस्त्र, आभूषण, बांसुरी, तिलक और इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो उसे लगा कि ठाकुर जी मुस्कुरा रहे हैं। अब वह संतुष्ट हो गई कि लड्डू गोपाल जी को मेरा किया श्रृंगार पसंद आ गया है। उसके पश्चात उसने भोग लगा दिया। इसी तरह एक पूरा महीना वह उनके श्री विग्रह की पूजा करती रही।
एक मास के पश्चात सास तीर्थ यात्रा से वापस आ गई। उसने कहा कि बधू कल से ठाकुर जी की सेवा में कर दिया करूंगी। बहू ने भी हां में हामी भर दी। अगले दिन सास ने ठाकुर जी को स्नान कराया कर वहीं प्रकिया दोहराई और भोग लगा दिया।
लेकिन रात को ठाकुर जी उसके स्वप्न में आ कर बोले कि तू मेरी सेवा की जिम्मेदारी अपनी बहू को देदें। मुझे उससे सेवा करवाने में ज्यादा आनंद आता है। सास बोली प्रभु का मुझ से कोई त्रुटी हो गई है।
#जयश्रीकृष्णा
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