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निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करैं सनमान।तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान। हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं। #हन...
12/04/2025

निश्चय प्रेम प्रतीत ते, विनय करैं सनमान।

तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करैं हनुमान।

हनुमान जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।

#हनुमानजयंती #हनुमानजी

https://www.religioushub.in/2025/04/hanuman-quotes-in-hindi.html

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं। राम नवमी का पर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है. चैत्र मास शुक्ल नवमी तिथि के दिन र...
06/04/2025

राम नवमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

राम नवमी का पर्व हिन्दू धर्म में विशेष महत्व रखता है. चैत्र मास शुक्ल नवमी तिथि के दिन राम नवमी का त्यौहार मनाया जाता है. इस दिन को भगवान विष्णु के अवतार श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है.

BEST RAM NAVAMI WISHES/ QUOTES पढ़ने के लिए

https://www.religioushub.in/2022/03/ram-navami-wishes-quotes.html

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥लोचन अभिरामा तनु घनस्यामानिज आयुध ...
06/04/2025

भए प्रगट कृपाला दीनदयाला, कौसल्या हितकारी।

हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥

लोचन अभिरामा तनु घनस्यामानिज आयुध भुजचारी।

भूषन बनमाला नयन बिसाला सोभासिंधु खरारी॥

राम नवमी पर्व पर पढ़ें श्री राम स्तुति...

https://www.religioushub.in/2021/12/bhaye-pragat-kripala.html

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वा...
08/03/2025

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं।
यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफला क्रियाः।

भावार्थ- जिस स्थान पर स्त्रियों का सम्मान होता है, वहाँ देवता निवास करते हैं लेकिन जहाँ स्त्रियों का सम्मान नही होता, अपितु तिरस्कार होता है वहाँ किए गए समस्त अच्छे कर्म भी निष्फल हो जाते हैं ।


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https://www.religioushub.in/2025/02/sanskrit-womens-quotes-on-women-in.html

प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती । तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी ।।पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा । सप्त...
02/02/2025

प्रथमं भारती नाम द्वितीयं च सरस्वती ।

तृतीयं शारदा देवी चतुर्थं हंसवाहिनी ।।

पंचमं जगती ख्याता षष्ठं वागीश्वरी तथा ।

सप्तमं कुमुदी प्रोक्ता अष्टमं ब्रह्मचारिणी ।।
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#सरस्वती #सरस्वतीमाता
https://www.religioushub.in/2025/01/saraswati-dwadash-naam-stotram-lyrics.html

हे शारदे माँ, हे शारदे माँअज्ञानता से हमें तारदे माँ।। हे शारदे माँ, हे शारदे माँ ।।तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसेहर शब...
02/02/2025

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ

अज्ञानता से हमें तारदे माँ।।

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ ।।

तू स्वर की देवी, ये संगीत तुझसे

हर शब्द तेरा है, हर गीत तुझसे

हम है अकेले, हम है अधूरे

तेरी शरण हम, हमें प्यार दे माँ ।।

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ ।।

अज्ञानता से हमें तारदे माँ

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https://www.religioushub.in/2024/02/saraswati-vandana-hey-sharde-maa-lyrics.html

गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।गीता जयंती मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाई जाती है। इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी...
11/12/2024

गीता जयंती की हार्दिक शुभकामनाएं।
गीता जयंती मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाई जाती है। इस एकादशी को मोक्षदा एकादशी भी कहा जाता है। इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के युद्ध में अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था।
कृष्ण महाभारत युद्ध में अर्जुन के सारथी बने थे। युद्ध भूमि में का मन भ्रमित हो जाता है ।अर्जुन कहते हैं," प्रभु मैं आपकी शरण में आया हूं मेरी शंका का निवारण करे।" श्री कृष्ण भगवद् गीता का उपदेश देकर अर्जुन का मार्ग दर्शन करते हैं। अर्जुन के मन में जितने भी शंका होती हैं उसे दूर करते हैं।
श्रीमद्भगवद् गीता में 700 श्लोक और 18 अध्याय है। श्री कृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया ज्ञान वर्तमान समय में भी सार्थक है। बहुत से महापुरुषों ने भगवद् गीता को पढ़ा और जीवन की ऊंचाईयों को प्राप्त किया। भगवद् गीता के श्लोक पढ़कर एक नई सकारात्मक ऊर्जा का अहसास होता है।
Read Bhagavad Geeta famous shlok with meaning...
https://www.religioushub.in/2023/08/bhagavad-gita-quotes-with-meaning-in.html

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। श्री राम और मां सीता का विवाह मार्गशीर्ष म...
06/12/2024

मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। श्री राम और मां सीता का विवाह मार्गशीर्ष मास की पंचमी तिथि को हुआ था। इसदिन को विवाह पंचमी के नाम से जाना जाता है।

श्री राम भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं और मां सीता देवी लक्ष्मी का अवतार थी। त्रेता युग में श्री राम का जन्म अयोध्या के राजा दशरथ के पुत्र के रूप में और सीता माता जनक पुरी के राजा जनक की पुत्री थी। राजा जनक के पास भगवान शिव का धनुष था जिसे मां सीता ने खेल खेल में उठा लिया था। उस दिन राजा जनक जान गए कि यह कन्या कोई साधारण नहीं है बल्कि इसमें आलौकिक गुण है। इसलिए उन्होंने निश्चय किया कि अपनी पुत्री का विवाह उसी के साथ करेंगे जो भगवान शिव के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ाएगा।

राजा जनक ने सीता जी के विवाह हेतु स्वयंवर रचाया। उसमें शामिल होने बहुत से राजा और राजकुमार सम्मिलित हुए। सीता जी के स्वयंवर के समय श्री राम और लक्ष्मण जी ताड़का वध के लिए ऋषि विश्वामित्र के आश्रम में थे। ऋषि विश्वामित्र श्री राम और लक्ष्मण जी को अपने साथ जनक पुरी ले गए। जनकपुरी के नर नारी श्री राम और लक्ष्मण जी को देखकर मंत्रमुग्ध हो गए। राजा जनक ने ऋषि विश्वामित्र का स्वागत किया और सभी को सम्मान सहित आसन दिया।

#विवाहपंचमी #जयश्रीरराम #श्रीराम #सियाराम #सीताराम
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एक बार एक स्त्री श्री कृष्ण की भक्त थीं। उसके पास श्री कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप का विग्रह था। वह बहुत सेवा भाव से उस विग...
23/11/2024

एक बार एक स्त्री श्री कृष्ण की भक्त थीं। उसके पास श्री कृष्ण के लड्डू गोपाल रूप का विग्रह था। वह बहुत सेवा भाव से उस विग्रह की पूजा करती। उसके बेटे की शादी होने के पश्चात उसे एक माह के लिए तीर्थ यात्रा पर जाना था। उसने अपनी पुत्रवधू से पूछा कि बहू ,"क्या तुम मेरे जाने के पश्चात लड्डू गोपाल जी की सेवा कर दिया करोगी?"

बहू बोली - मां जी आप विधि बता दे, मैं वैसे ही सेवा कर दूंगी। सासू मां ने बताया कि सबसे पहले सुबह ठाकुर जी को उठाना, उसके पश्चात उनको स्नान करवाना , सुंदर वस्त्र , आभूषण, बांसुरी, मुकुट पहनना, तिलक , इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाना। जब ठाकुर जी मुस्कुराये और लगे वह श्रृंगार से प्रसन्न हैं तो उनको भोग लगा देना।

बहू कहने लगी कि, मां जी मैं सारी विधि समझ गई अब आप बेफिक्र होकर तीर्थ यात्रा पर जाए। सास के जाने के पश्चात बहू ने अगले दिन प्रातः ठाकुर जी को शयन से उठाया। उनके पश्चात उनको स्नान करवाया और सुंदर वस्त्र, आभूषण, तिलक, इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो उसमें उसे लगा कि ठाकुर जी तो मुस्कुराएं ही नहीं। उसने फिर से सारा श्रृंगार उतारा, उनको स्नान कराया, वस्त्र, आभूषण, तिलक, इत्र लगाकर ठाकुर जी को पुनः दर्पण दिखाया। इस बार भी उसे लगाकि लड्डू गोपाल तो मुस्कुरा ही नहीं रहे। इस प्रक्रिया को उसने कई बार दोहराया। सर्दी के दिन थे। अब तो मानो ठाकुर जी भी सोच रहे थे इतनी इतनी ठंड में अब कितनी बार स्नान करना पड़ेगा।

अबकी बार उसने ठाकुर जी को स्नान करवा कर, वस्त्र, आभूषण, बांसुरी, तिलक और इत्र लगाकर ठाकुर जी को दर्पण दिखाया तो उसे लगा कि ठाकुर जी मुस्कुरा रहे हैं। अब वह संतुष्ट हो गई कि लड्डू गोपाल जी को मेरा किया श्रृंगार पसंद आ गया है। उसके पश्चात उसने भोग लगा दिया। इसी तरह एक पूरा महीना वह उनके श्री विग्रह की पूजा करती रही।

एक मास के पश्चात सास तीर्थ यात्रा से वापस आ गई। उसने कहा कि बधू कल से ठाकुर जी की सेवा में कर दिया करूंगी। बहू ने भी हां में हामी भर दी। अगले दिन सास ने ठाकुर जी को स्नान कराया कर वहीं प्रकिया दोहराई और भोग लगा दिया।

लेकिन रात को ठाकुर जी उसके स्वप्न में आ कर बोले कि तू मेरी सेवा की जिम्मेदारी अपनी बहू को देदें। मुझे उससे सेवा करवाने में ज्यादा आनंद आता है। सास बोली प्रभु का मुझ से कोई त्रुटी हो गई है।

#जयश्रीकृष्णा
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भक्त की आस्था की परीक्षा तब होती है जब जो वह चाहे वह ना हो फिर भी उसका ईश्वर के प्रति विश्वास ना डगमगाए।एक बार एक गर्भवत...
22/11/2024

भक्त की आस्था की परीक्षा तब होती है जब जो वह चाहे वह ना हो फिर भी उसका ईश्वर के प्रति विश्वास ना डगमगाए।
एक बार एक गर्भवती हिरणी ने अपने बच्चे को जन्म देने के लिए एक एकांत स्थान को चुना। जैसे ही उसे प्रसव पीड़ा शुरू हुई उसी समय आसमान में बादल घिर आए और बिजली कड़कने लगी।

तभी उसकी दृष्टि अपनी दाईं ओर गई तो एक शिकारी उसकी ओर निशाना साधे खड़ा था जैसे ही उसने बाईं ओर देखा एक भूखा शेर उसका शिकार करने के लिए तत्पर था।

उसने पीछे मुड़कर देखा तो नदी अपने उफान पर थी और सामने जंगल की घास में आग ही लपटें निकल रही थी। इस समय हिरणी दुविधा में फंसकर गई थी उसके मन में कई प्रश्न एक साथ कौंध गए थे।

क्या वह अपने बच्चे को जन्म दे पाएगी? क्या शिकार उसका शिकार कर लेगा या फिर वह शेर का ग्रास बन जाएगी? क्या जंगल की आग उसे जला देगी या फिर कही उफनती नदी उसका काल तो नहीं बन जाएगी?

उस समय परिस्थितियां हिरणी के अनुकूल नहीं लग रही थी? उस समय उसने स्वयं को ईश्वर को सौंप दिया और अपना कर्म करते हुए अपने बच्चे को जन्म देने का निर्णय लिया।

ईश्वर की कृपा से जैसे ही शिकारी ने उस पर निशाना साधा उसी समय तेज बिजली कड़की जिससे शिकारी की आंखें चौंधिया गई और उसका निशाना चूक गया और वह सामने खड़े शेर को लग गया जिससे शेर वहां से भाग गया।

तभी घनघोर बारिश आरंभ हो गई और सामने लगी जंगल की आग शांत हो गई। अब ईश्वर की कृपा से हिरनी और शावक दोनों सुरक्षित थे। हमारे साथ भी बहुत बार ऐसा होता है जब हमें लगता है कि अब कोई समाधान नहीं बचा। तब ईश्वर की कृपा से कुछ ऐसा हो जाता है जो हमारी सोच से परे होता है।

इसलिए ईश्वर पर विश्वास व्यक्ति में उम्मीद की किरण को जगाए रखता है।

#जयश्रीकृष्ण #श्रीकृष्ण
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एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। दिवाली के पश्चात कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन देव उठनी एकादशी मन...
12/11/2024

एकादशी का हिन्दू धर्म में विशेष महत्व है। दिवाली के पश्चात कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी के दिन देव उठनी एकादशी मनाई जाती है। इस एकादशी को हरि प्रबोधिनी , दवोत्थान एकादशी भी कहा जाता है क्योंकि माना जाता है कि भगवान विष्णु इस दिन चार मास की निद्रा से उठते है।

इसदिन तुलसी विवाह का विशेष महत्व है। तुलसी विवाह को देव जागरण का शुभ मुहूर्त माना जाता है क्योंकि जब भगवान विष्णु जागते हैं तो पहली प्रार्थना हरिवल्लभा तुलसी की सुनते हैं। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार तुलसी और शालीग्राम विवाह करवाने से घर में सुख समृद्धि बढ़ती है।

आषाढ़ मास की शुक्ल एकादशी से कार्तिक मास की शुक्ल एकादशी के अंतराल में श्री हरि विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं । श्री हरि कार्तिक मास की शुक्लपक्ष की एकादशी को निद्रा से जागते हैं। हरि प्रबोधनी एकादशी दिवाली के बाद आती। भगवान विष्णु चार मास की निद्रा के बाद उठते हैं इसलिए कारण इसे देवोत्थान एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. क्षीर सागर में भगवान विष्णु के निद्रा करने के कारण चातुर्मास में विवाह और मांगलिक कार्य नहीं होते। सभी मांगलिक कार्य देवउठनी एकादशी के पश्चात आरम्भ हो जाते हैं। इस दिन तुलसी विवाह करना पुण्य दायी माना गया हैं ‌‌।

देवउठनी एकादशी के दिन देवउठनी एकादशी व्रत कथा पढ़ना और सुनना विशेष फलदाई माना जाता है।

#एकादशी #देव_उठनी_एकादशी

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