03/09/2026
सरवेश अग्रवाल: WordPress के छोटे से ब्लॉग से 100 करोड़ रुपये की कंपनी तक का सफर
कभी-कभी करोड़ों रुपये की कंपनी बनाने के लिए शुरुआत में करोड़ों रुपये की जरूरत नहीं होती। जरूरत होती है किसी समस्या को पहचानने, उसे हल करने का जुनून रखने और लंबे समय तक बिना हार माने काम करते रहने की।
सरवेश अग्रवाल की कहानी इसी सोच की मिसाल है। आज उनका नाम Internshala के साथ जुड़ा है—एक ऐसा प्लेटफॉर्म जिसने भारत के लाखों छात्रों को इंटर्नशिप, ट्रेनिंग और शुरुआती करियर के अवसरों से जोड़ने का काम किया। लेकिन इसकी शुरुआत किसी बड़े ऑफिस, बड़ी टीम या भारी-भरकम निवेश से नहीं हुई थी।
शुरुआत हुई थी एक साधारण ब्लॉग से।
सरवेश अग्रवाल IIT मद्रास से पढ़े सिविल इंजीनियर हैं। पढ़ाई के बाद उन्होंने कॉर्पोरेट दुनिया में काम किया और Capital One, Barclays तथा Aviva जैसी कंपनियों में अनुभव हासिल किया। लेकिन उनके भीतर सिर्फ नौकरी करने की इच्छा नहीं थी। उन्हें कुछ ऐसा बनाने में दिलचस्पी थी, जिसका वास्तविक असर लोगों की जिंदगी पर पड़े। एक पुराने प्रोफाइल में उन्हें ऐसा व्यक्ति बताया गया है जिसे किसी चीज को बिल्कुल शुरुआत से बनाना पसंद था।
एक समस्या ने बदल दी पूरी जिंदगी
2010 के आसपास सरवेश ने देखा कि भारत में कॉलेज के छात्रों के सामने एक बड़ी समस्या थी—इंटर्नशिप और वास्तविक इंडस्ट्री एक्सपोजर की कमी।
उनका एक दोस्त लंदन बिजनेस स्कूल में पढ़ रहा था और भारत में इंटर्नशिप ढूंढ रहा था। लेकिन उसे सही अवसर खोजने में परेशानी हो रही थी। यहीं से सरवेश के दिमाग में एक विचार आया कि क्यों न ऐसी जगह बनाई जाए, जहां छात्रों को एक ही प्लेटफॉर्म पर इंटर्नशिप के अवसर मिल सकें।
लेकिन उन्होंने शुरुआत किसी बड़े स्टार्टअप की तरह नहीं की।
उन्होंने एक WordPress ब्लॉग शुरू किया।
इस ब्लॉग पर शिक्षा, तकनीक, स्किल्स और इंटर्नशिप से जुड़ी जानकारी प्रकाशित की जाने लगी। धीरे-धीरे जब वह अलग-अलग इंटर्नशिप के अवसरों के बारे में लिखने लगे तो छात्रों के सवाल आने लगे। लोगों की जरूरत देखकर उन्हें समझ आया कि यहां सिर्फ ब्लॉग नहीं, बल्कि एक बड़ा प्लेटफॉर्म बनाने की संभावना है। Internshala की आधिकारिक टाइमलाइन भी बताती है कि 2010 में सरवेश ने इसे ब्लॉग के रूप में शुरू किया था।
यही वह मोड़ था, जहां एक साधारण समस्या ने भविष्य के बड़े बिजनेस का रूप लेना शुरू किया।
नौकरी छोड़कर उद्यमिता की राह
सरवेश के लिए सबसे आसान रास्ता था अपनी अच्छी नौकरी जारी रखना।
लेकिन उन्होंने जोखिम उठाया।
अक्टूबर 2011 में उन्होंने Aviva की नौकरी छोड़कर Internshala पर पूरी तरह काम करने का फैसला किया। उस समय उनके पास आज जैसी बड़ी टीम, बड़ा ऑफिस या करोड़ों रुपये का निवेश नहीं था।
एक तरफ सुरक्षित नौकरी थी और दूसरी तरफ ऐसा बिजनेस था जिसका भविष्य निश्चित नहीं था।
लेकिन सरवेश ने उस अनिश्चितता को स्वीकार किया।
यही किसी भी उद्यमी की असली परीक्षा होती है।
किसी आइडिया के बारे में सोचना आसान है। उसके बारे में बात करना भी आसान है। लेकिन जब उस आइडिया के लिए अपनी सुरक्षित नौकरी छोड़नी पड़े, तब असली फैसला लेना पड़ता है।
सरवेश ने वही फैसला लिया।
कंपनी की शुरुआत करोड़ों से नहीं, इंटर्न्स से हुई
आज जब किसी स्टार्टअप की कहानी सुनाई जाती है तो अक्सर निवेश, फंडिंग और बड़ी टीम की चर्चा होती है। Internshala की शुरुआती कहानी इससे बिल्कुल अलग थी।
सरवेश के अनुसार, शुरुआती दो वर्षों में वह Internshala के एकमात्र फुल-टाइम कर्मचारी थे। वेबसाइट, कंटेंट, सेल्स, कस्टमर सर्विस और डिजिटल मार्केटिंग जैसे कामों को अलग-अलग जगहों से काम करने वाले वर्चुअल इंटर्न्स की टीम संभालती थी।
यानी जिस कंपनी ने आगे चलकर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा किया, उसके शुरुआती दिनों में काम करने का तरीका बेहद साधारण था।
न बड़ा ऑफिस।
न सैकड़ों कर्मचारियों की टीम।
न भारी-भरकम कॉर्पोरेट ढांचा।
बल्कि छोटे संसाधनों में बड़ा काम करने की कोशिश।
सरवेश ने खुद अपने अनुभव में बताया कि Internshala को बनाने में इंटर्न्स की टीम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आगे चलकर कंपनी में काम करने वाले कई इंटर्न्स स्थायी कर्मचारी भी बने।
यह सिर्फ बिजनेस मॉडल नहीं था, बल्कि Internshala के मिशन से भी जुड़ा हुआ था—जिस प्लेटफॉर्म का उद्देश्य युवाओं को इंटर्नशिप देना था, उसी ने अपने शुरुआती काम में इंटर्न्स को अवसर दिया।
ब्लॉग से वेबसाइट तक
शुरुआत में Internshala सिर्फ ब्लॉग था।
लेकिन जैसे-जैसे छात्रों और कंपनियों की संख्या बढ़ती गई, एक व्यवस्थित प्लेटफॉर्म की जरूरत महसूस हुई।
2013 में Internshala की वेबसाइट लॉन्च हुई। कंपनी की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक उस समय लक्ष्य था कि भारत के छात्रों को उनके लिए सही इंटर्नशिप अवसर उपलब्ध कराए जाएं।
इसके बाद 2015 में Internshala का Android ऐप आया और 2016 में Internshala Trainings की शुरुआत हुई।
यहां सरवेश की एक महत्वपूर्ण खूबी दिखाई देती है।
उन्होंने केवल एक वेबसाइट बनाकर रुकने के बजाय यह समझने की कोशिश की कि छात्रों की अगली समस्या क्या है।
छात्रों को इंटर्नशिप चाहिए।
लेकिन इंटर्नशिप पाने के लिए स्किल भी चाहिए।
इसलिए कंपनी ने ट्रेनिंग की दिशा में कदम बढ़ाया।
यानी बिजनेस का विस्तार केवल ज्यादा पैसा कमाने के लिए नहीं हुआ, बल्कि उसी समस्या की अगली कड़ी को हल करने के लिए हुआ।
जब लोगों ने समझा कि यह सिर्फ ब्लॉग नहीं है
Internshala धीरे-धीरे छात्रों और कंपनियों के बीच एक महत्वपूर्ण प्लेटफॉर्म बनने लगा।
2013 की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि Internshala विभिन्न विश्वविद्यालयों और संगठनों से इंटर्नशिप के अवसर जोड़ रहा था। उस समय भी सरवेश का फोकस छात्रों और इंडस्ट्री के बीच की दूरी कम करने पर था।
बाद के वर्षों में प्लेटफॉर्म तेजी से बढ़ा।
2018 तक Internshala पर लाखों छात्र और हजारों कंपनियां जुड़ चुकी थीं।
फिर Trainings ने बिजनेस को एक नया आधार दिया।
2021 में कंपनी ने लगभग ₹20 करोड़ का राजस्व दर्ज किया था और वह हर साल अपने कारोबार को आगे बढ़ा रही थी। उस समय भी कंपनी का बड़ा हिस्सा अपनी कमाई को दोबारा बिजनेस के विकास में लगाने पर केंद्रित था।
यहां से एक महत्वपूर्ण सीख मिलती है—
हर सफल कंपनी की शुरुआत बड़ी दिखाई नहीं देती।
कई बार वह एक छोटे प्रयोग की तरह शुरू होती है।
अगर उस प्रयोग से लोगों को फायदा मिलता है, तो वही छोटा प्रयोग धीरे-धीरे बड़ा बिजनेस बन सकता है।
फंडिंग से ज्यादा महत्वपूर्ण था बिजनेस
Internshala की कहानी इसलिए भी अलग है क्योंकि शुरुआती वर्षों में इसका निर्माण काफी हद तक bootstrapped तरीके से हुआ।
2014 में कंपनी को दोस्तों और रिश्तेदारों से लगभग ₹15 लाख का angel investment मिला था। इसके बाद कंपनी ने अपना ऑफिस और दूसरे विस्तार के कदम उठाए।
लेकिन कंपनी की पहचान केवल निवेश जुटाने वाले स्टार्टअप के रूप में नहीं बनी।
उसने अपने बिजनेस मॉडल को मजबूत करने पर ध्यान दिया।
ट्रेनिंग प्रोग्राम, कंपनियों से मिलने वाली फीस और बाद में अलग-अलग सेवाओं के जरिए राजस्व बढ़ाया गया। 2021 में skill training कंपनी के राजस्व का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा बन चुकी थी।
इससे यह समझ आता है कि किसी कंपनी की सफलता सिर्फ इस बात से तय नहीं होती कि उसने कितनी फंडिंग उठाई।
असली ताकत होती है—
क्या ग्राहक आपके प्रोडक्ट के लिए पैसे देने को तैयार हैं?
Internshala ने इस सवाल का जवाब अपने बिजनेस मॉडल से दिया।
करोड़ों छात्रों और कंपनियों तक पहुंच
समय के साथ Internshala का नेटवर्क बहुत बड़ा होता गया।
2026 में upGrad द्वारा Internshala के अधिग्रहण के समय कंपनी के पास 3.4 करोड़ से ज्यादा registered users और लगभग 4.5 लाख employers होने की जानकारी सामने आई। करीब 30 लाख सक्रिय आवेदक हर साल प्लेटफॉर्म का उपयोग करते थे और 40 प्रतिशत से ज्यादा उपयोगकर्ता Tier-2 और Tier-3 शहरों से आते थे।
यानी जिस समस्या को एक समय एक ब्लॉग के जरिए हल करने की कोशिश की गई थी, वह समस्या अब करोड़ों युवाओं तक पहुंच चुकी थी।
सरवेश की सोच की सबसे बड़ी सफलता यही थी कि उन्होंने सिर्फ वेबसाइट नहीं बनाई।
उन्होंने education और employment के बीच एक पुल बनाने की कोशिश की।
कॉलेज में पढ़ने वाला छात्र जब पहली बार इंडस्ट्री में कदम रखना चाहता है, तब उसके सामने अनुभव की कमी होती है।
कंपनी कहती है—हमें skilled candidate चाहिए।
छात्र कहता है—मुझे अनुभव चाहिए।
Internshala ने इसी gap को address करने की कोशिश की।
100 करोड़ रुपये की कंपनी तक पहुंच
फोटो में दिखाई गई पोस्ट का सबसे बड़ा दावा है कि WordPress से शुरू हुई यह यात्रा 100 करोड़ रुपये की कंपनी तक पहुंची।
यह दावा अब केवल सोशल मीडिया की कहानी तक सीमित नहीं है।
फरवरी 2026 में upGrad ने Internshala में 90 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की घोषणा की। डील की आधिकारिक राशि सार्वजनिक नहीं की गई, लेकिन Economic Times ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस लेनदेन में Internshala का मूल्यांकन लगभग ₹100 करोड़ था।
यानी जिस प्लेटफॉर्म की शुरुआत एक छोटे ब्लॉग से हुई थी, वह लगभग डेढ़ दशक बाद लगभग ₹100 करोड़ के मूल्यांकन वाले सौदे तक पहुंच गया।
यह सफर किसी एक दिन में नहीं बना।
इसके पीछे 2010 से लगातार किए गए प्रयोग, गलतियां, छोटे-छोटे सुधार, टीम बनाना, छात्रों को समझना, कंपनियों की जरूरत समझना और बिजनेस मॉडल को बदलते रहना शामिल था।
सबसे बड़ी सीख: शुरुआत छोटी होने में कोई शर्म नहीं
सरवेश अग्रवाल की कहानी का सबसे प्रेरणादायक हिस्सा शायद ₹100 करोड़ का आंकड़ा नहीं है।
सबसे प्रेरणादायक हिस्सा है शुरुआत।
एक WordPress ब्लॉग।
एक समस्या।
सीमित संसाधन।
छोटी टीम।
और एक ऐसा व्यक्ति जिसने यह तय किया कि अगर समस्या वास्तविक है तो उसका समाधान भी बनाया जा सकता है।
आज सोशल मीडिया के दौर में बहुत से लोग शुरुआत करने से पहले ही पूछते हैं—
पैसा कितना चाहिए?
ऑफिस कैसा होगा?
टीम कितनी होगी?
निवेशक कौन मिलेगा?
मार्केट कितना बड़ा है?
लेकिन सरवेश की कहानी एक अलग सवाल सिखाती है—
“लोगों की कौन-सी समस्या मैं बेहतर तरीके से हल कर सकता हूं?”
अगर इस सवाल का जवाब मिल जाए, तो बाकी चीजें धीरे-धीरे बनाई जा सकती हैं।
संघर्ष सिर्फ पैसों का नहीं होता
उद्यमिता में संघर्ष हमेशा आर्थिक नहीं होता।
कभी संघर्ष होता है लोगों को अपने विचार पर विश्वास दिलाने का।
कभी सही टीम ढूंढने का।
कभी ग्राहकों को समझने का।
कभी यह तय करने का कि कौन-सा बिजनेस मॉडल काम करेगा।
और कभी खुद से लड़ने का कि क्या यह फैसला सही है।
सरवेश ने भी अपनी यात्रा में यही चरण देखे।
उन्होंने अपने एक लेख में शुरुआती दौर के बारे में लिखा था कि entrepreneurship, investment, company incorporation और VC funding जैसे शब्द उनके लिए कभी दूर और डरावने लगते थे। लेकिन उन्होंने सवाल पूछकर, लोगों से मदद मांगकर और लगातार सीखकर आगे बढ़ना जारी रखा।
यही एक बड़े उद्यमी की पहचान है।
उसे शुरुआत में हर चीज नहीं आती।
लेकिन वह सीखने से डरता नहीं है।
15 साल बाद एक नया अध्याय
2026 में Internshala की कहानी ने एक और बड़ा मोड़ लिया।
upGrad ने कंपनी की 90 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल की। इस सौदे का उद्देश्य education, skilling और employment को एक बड़े ecosystem में जोड़ना था।
इसके बाद सरवेश अग्रवाल ने CEO की भूमिका से हटने की घोषणा भी की। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि 15 साल बनाने के बाद वह Internshala में CEO के रूप में अपना आखिरी कार्यदिवस पूरा कर रहे हैं और कंपनी को आगे बढ़ाने के लिए इसे upGrad के enterprise ecosystem के साथ जोड़ना उचित है।
यह किसी कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक नए अध्याय की शुरुआत है।
एक व्यक्ति जिसने 2010 में ब्लॉग शुरू किया था, उसने उसे ऐसी कंपनी में बदल दिया जिसे लाखों नहीं बल्कि करोड़ों लोग इस्तेमाल करने लगे।
सरवेश अग्रवाल की कहानी हमें क्या सिखाती है?
उनकी यात्रा से कई बड़ी बातें सीखी जा सकती हैं।
पहली—छोटी शुरुआत को कम मत समझिए।
आज का छोटा ब्लॉग कल का बड़ा प्लेटफॉर्म बन सकता है।
दूसरी—समस्या को समझिए।
सिर्फ प्रोडक्ट बनाने से बिजनेस नहीं बनता। लोगों की वास्तविक जरूरत समझनी पड़ती है।
तीसरी—सीखते रहिए।
सरवेश के पास शुरुआत में हर बिजनेस स्किल नहीं थी। लेकिन उन्होंने सवाल पूछे, लोगों से मदद ली और धीरे-धीरे सीखा।
चौथी—कम संसाधन बहाना नहीं हैं।
शुरुआती Internshala में बड़ी टीम या बड़ा ऑफिस नहीं था। इसके बावजूद काम आगे बढ़ा।
पांचवीं—समय सबसे बड़ा हथियार है।
2010 से 2026 तक लगभग डेढ़ दशक तक एक विचार पर काम करना आसान नहीं होता। असली सफलता अक्सर इसी निरंतरता से बनती है।
छठी—सिर्फ पैसा लक्ष्य नहीं होना चाहिए।
जब किसी बिजनेस का समाधान वास्तविक समस्या से जुड़ा हो, तो पैसा उसके परिणाम के रूप में आ सकता है।
आखिर में...
सरवेश अग्रवाल की कहानी सिर्फ “WordPress से 100 करोड़ रुपये तक” पहुंचने की कहानी नहीं है।
यह उस सोच की कहानी है जिसमें एक व्यक्ति ने एक छोटी समस्या देखी और उसे नजरअंदाज करने के बजाय उसका समाधान बनाने का फैसला किया।
एक ब्लॉग से शुरुआत हुई।
फिर वेबसाइट बनी।
फिर ऐप आया।
फिर ट्रेनिंग शुरू हुई।
फिर लाखों छात्र जुड़े।
फिर हजारों कंपनियां जुड़ीं।
और आखिरकार वही छोटा विचार एक ऐसे प्लेटफॉर्म में बदल गया, जिसका मूल्यांकन 2026 के अधिग्रहण सौदे में करीब ₹100 करोड़ बताया गया।
इस कहानी की सबसे बड़ी सीख यही है—
> बड़ी सफलता हमेशा बड़ी शुरुआत से नहीं होती।
कई बार बड़ी सफलता की शुरुआत एक छोटे से विचार, एक लैपटॉप और किसी समस्या को हल करने की जिद से होती है।
और शायद यही वजह है कि सरवेश अग्रवाल की यात्रा उन युवाओं के लिए खास प्रेरणा है, जो आज अपने कमरे, लैपटॉप या छोटे से ऑफिस से कुछ शुरू करना चाहते हैं।
क्योंकि हर बड़ी कंपनी कभी न कभी सिर्फ एक आइडिया थी।
डिस्क्लेमर: इस लेख में उपलब्ध सार्वजनिक स्रोतों और कंपनी/मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जानकारी दी गई है। ₹100 करोड़ का आंकड़ा 2026 के upGrad–Internshala लेनदेन के संदर्भ में रिपोर्ट किए गए लगभग मूल्यांकन को दर्शाता है; इसे कंपनी की वर्तमान स्वतंत्र बाजार कीमत या संस्थापक की व्यक्तिगत संपत्ति न समझें।