06/08/2025
हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय (बैठक – न्यायमूर्ति विवेक सिंह ठाकुर और न्यायमूर्ति बिपिन चंद्र नेगी) ने Section 163‑A को आज (5 अगस्त 2025) अवैध और असंवैधानिक घोषित किया है; साथ ही इस धारा और उसके तहत बनाए गए नियमों को पूरी तरह खारिज कर दिया गया।
उच्च न्यायालय ने पाया कि यह धारा:
सरकारी भूमि पर हुए अवैधानिक अतिक्रमणों को वैध मानने का प्रावधान होती है,
संविधान के Article 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करती है,
मुख्य कानून (Section 163, जो अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया निर्धारित करता है) के उद्देश्य को विरुद्ध करती है।
निर्देश / कार्यवाही
1. सभी अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही 28 फरवरी 2026 तक पूरी करें।
2. इस धारा के अंतर्गत अनुमोदित ठहराव (stays) को तुरंत समाप्त कर दिया जाए।
3. प्रशासनक अधिकारियों (नगर पंचायत, नगर निगम कार्यालय कर्मियों आदि) को अतिक्रमण की सूचना देने व कार्रवाई हेतु जिम्मेदार ठहराया जाए, और जो नहीं करेंगे उस पर कार्रवाई की जाए।
4. विधि में सुधार हेतु सुझाव दिए गए हैं—आपराधिक अतिक्रमण को क़ानूनी तौर पर अपराध घोषित करने, और Section 163 से adverse possession की शर्तों को हटाने (या संशोधन) पर विचार करने के लिए।
पृष्ठभूमि एवं परिणाम
Section 163‑A वर्ष 2002 में पेश किया गया था, जिसमें विनियम था कि सरकार अतिक्रमण को नियमित कर सकती है—अधिकतम 5 बिघा लोगों को ₹50 प्रति बिघा में, और कुछ विशेष मामलों में अधिक भूमि तक। यह नीति छोटे किसानों की मदद के संकेत में दिया गया।
सरकार के अनुसार लगभग 57,549 मामले, 10,320 हेक्टेयर सरकारी भूमि में अतिक्रमण थे, और 1,67,339 आवेदन 2002 तक प्राप्त हुए थे।
न्यायालय का कहना था कि यह कानून “कदाचारियों के लिए कानून” जैसा था—अर्थात गैर-कानूनी कार्य को वैध करना, जो संविधान के समानता के सिद्धांत के ख़िलाफ़ है।
निष्कर्ष
Section 163‑A को उच्च न्यायालय ने पूरी तरह से निरस्त किया।
संबंधित सभी नियम और तथ्यिक रोक, जैसे कि stays, को लागू नहीं माना जाएगा।
सरकार को आदेश दिया गया कि वे 163‑A की जगह existing Section 163 के तहत अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया को लागू करें, और कानून में संशोधन करें।