09/03/2026
यह कहानी एक पुरानी हवेली की है, जहाँ वक्त आज भी थमा हुआ महसूस होता है।
अंधेरे का साया
कहानी शुरू होती है समीर से, जिसे पुरानी चीज़ों को फोटोग्राफ करने का बहुत शौक था। एक शाम, वह शहर से दूर 'नीलगढ़ की हवेली' पहुँचा। गाँव वालों ने उसे चेतावनी दी थी कि सूरज ढलने के बाद उस हवेली की दीवारों से आवाज़ें आती हैं, लेकिन समीर ने इसे महज़ एक अंधविश्वास समझा।
आधी रात का सन्नाटा
समीर ने हवेली के बड़े से हॉल में अपना डेरा डाला। रात के करीब 12 बजे थे। अचानक, उसे महसूस हुआ कि कमरे का तापमान गिर गया है। उसने अपनी टॉर्च जलाई, लेकिन उसकी रोशनी धुंधली पड़ने लगी।
तभी उसे ऊपर की मंजिल से 'छम-छम' की आवाज़ सुनाई दी। कोई भारी पायल पहनकर धीरे-धीरे चल रहा था। समीर ने अपना कैमरा उठाया और ऊपर की ओर बढ़ा।
खौफनाक मंज़र
जैसे ही वह ऊपर पहुँचा, उसने देखा कि गलियारे के अंत में एक बड़ी सी आदमकद खिड़की थी। वहाँ एक औरत पीठ फेरकर खड़ी थी। उसने लाल रंग का पुराना जोड़ा पहना था, जो जगह-जगह से फटा हुआ था।
समीर ने घबराते हुए पूछा, "कौन है वहाँ?"
वह औरत नहीं रुकी। समीर ने डरते-डरते एक फोटो खींची। कैमरे की फ्लैश चमकी और अगले ही पल समीर के पैरों तले ज़मीन खिसक गई। कैमरे की स्क्रीन पर जो फोटो आई, उसमें वह औरत खिड़की के पास नहीं, बल्कि समीर के ठीक पीछे खड़ी थी और उसका चेहरा पूरी तरह से जला हुआ था।
"क्या तुम्हें मेरी तस्वीर पसंद आई?" एक ठंडी, कांपती हुई आवाज़ समीर के कान के बिल्कुल पास गूंजी।
अंतिम पल
समीर पीछे मुड़ा, लेकिन वहाँ कोई नहीं था। उसे लगा कि वह पागल हो रहा है। वह तेजी से नीचे की तरफ भागा, लेकिन सीढ़ियाँ खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थीं। वह जितना नीचे भागता, हवेली उतनी ही बड़ी होती जाती।
अचानक उसे महसूस हुआ कि उसके कंधों पर किसी ने ठंडे, नुकीले नाखून गड़ा दिए हैं। उसने चीखने की कोशिश की, लेकिन उसकी आवाज़ उसके गले में ही घुट गई।
अगली सुबह, गाँव वालों को समीर का कैमरा हवेली के बाहर मिला। कैमरे की आखिरी फोटो में समीर खुद को देख रहा था, लेकिन उसकी आँखों की जगह सिर्फ गहरा अंधेरा था। समीर का आज तक कोई पता नहीं चला। Comment part 2