18/06/2026
भोजपुर का जबनिया गाँव बाढ़ उपरांत बसाया जा रहा था जिसमे व्यापक रूप से घोटाला किया जा रहा , Bharat Tiwari अपने गाँव का युवा नेता था गांव के लोग भरत तिवारी से गुहार लगाए थे, ,. इसके लिए विरोध किया और आवाज उठाया,.. सारे तंत्र प्रशासन से परेशान होकर एक युवक हथियार उठाता है और अपनी बात तर्क के साथ प्रशासन के समक्ष रखता है जब तक उसके हाथ मे हथियार रहा बिहार पुलिस के कई थाने की पुलिस और थाना प्रभारी उसका झा.... नही उखाड़ पाया लेकिन जब प्रशासन के तरफ से झांसा दिया गया कि आपकी सारे मांग जायज है उसको माना जायेगा आप अवैध हथियार फेक आत्मसमर्पण कर दे लड़का सारा बात मानकर, आत्मसमर्पण करता है और उसके बाद बिहार पुलिस कस्टडी में लेकर उसका फेक एनकाउंटर करती है .. सारा वीडियो आत्मसमर्पण का सोशल मीडिया पर उपलब्ध है।।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि एक ओर प्रशासन और पुलिस यह दावा करते हैं कि भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से अस्वस्थ थे, वहीं दूसरी ओर उनके साथ ऐसा व्यवहार किया गया मानो वे कोई खूंखार आतंकवादी या दुर्दांत अपराधी हों। यदि वास्तव में कोई व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ है, तो कानून, मानवता और चिकित्सा विज्ञान यह कहते हैं कि उसका उपचार कराया जाए, उसे चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराई जाए, न कि उसकी हत्या कर दी जाए।
यदि कोई व्यक्ति मानसिक रोगी है, तो उसका स्थान अस्पताल या उपचार केंद्र है, न कि पुलिस की गोली। इसलिए यह तर्क कि वह मानसिक रूप से अस्वस्थ थे, किसी भी प्रकार से उनकी मृत्यु को उचित नहीं ठहरा सकता। बल्कि यदि यह दावा सही है, तो यह घटना और भी गंभीर हो जाती है क्योंकि तब राज्य की जिम्मेदारी उसकी सुरक्षा और उपचार की थी।
मैं भरत भूषण तिवारी की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ तथा उनके परिजनों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूँ। न्याय की मांग केवल उनके परिवार की नहीं, बल्कि हर उस नागरिक की मांग है जो संविधान और कानून के शासन में विश्वास रखता है