17/08/2022
क्या बिहार में नहीं बन पाएगा कोई योगी आदित्यनाथ!
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नीतीश से तलाक पर धरना देना भाजपाइयों के नपुंसकता की पराकाष्ठा है। जंगलराज की असली प्रायोजक पिछले 5 साल से सिर्फ और सिर्फ भाजपा है,जिसने कुकुर्मी कुमार को सहारा दिया,केंद्रीय मंत्रियों को बार-बार सीएम हाउस भेजकर उसका अहंकार बढ़ाया और जब लात मार निकाल दिए गए तो निर्लज्ज और कायरों की तरह रोने-धोने पर उतारू हैं। 2020 के चुनाव के बाद सरकार में तारकिशोर और रेणु रूपी दो डिब्बे अटैच कर दिए जाने से कभी लगा ही नहीं कि भाजपा सरकार में भी है। उनके नाक के नीचे एक जिहादी पिछले 13 सालों से गृह सचिव रहा और अब मुख्य सचिव भी बन गया,लेकिन विरोध का एक स्वर तक नहीं फूटा; इंडिगो मैनेजर हत्याकांड में एक निर्दोष को फंसा कर नीतीश के खासमखास अधिकारी प्रत्यय अमृत को बचा लिया जाना जंगलराज नहीं तो और क्या था,लेकिन इसके खिलाफ किसी की जुबान नहीं खुली, बीपीएससी पेपर लीक घोटाला में एक कुर्मी अधिकारी को बचाने के लिए पूरी जांच की दिशा भटका दी गई;लालू परिवार पर हर बार तथ्य और तर्क सहित वार करनेवाले सुशील मोदी अगर सिर्फ इन दो मामलों पर उसी तरह कुकुर्मी कुमार को घेरे हुए होते तो आज वो जेल के सलाखों के पीछे होता और बिहार की जनता को पटना में केंचुल मार कर बैठे हुए नेता-अधिकारी-ठेकेदार नेक्सस के बारे में जानने का मौका भी मिलता, उस नेक्सस के बारे में जो राजधानी के पूरी तरह से चिकनी और सपाट सड़कों को सिर्फ टेंडर की दलाली खाने के लिए तोड़कर दोबारा बनवाता है,वो नेक्सस जो एक गरीब राज्य का 750 करोड़ रुपया एक अतिरिक्त म्यूजियम बनाने के लिए खर्च कर देता है;मैं जब भी बेली रोड से गुजरता हूँ, तो हर बार बिहार संग्रहालय को देखकर यह सोचे बिना नहीं रह पाता कि आखिर इसमें ऐसा क्या लगा है कि साढ़े सात सौ करोड़ रुपए खर्च हो गए! RCP सिंह नीतीश के भ्रष्टाचार की गर्दन मरोड़ने की सबसे बड़ी कुंजी था,लेकिन बेहद सफाई से धूर्त कुमार ने उसे भाजपा के पल्ले में फेंक दिया;और लगे हाथों ग्रामीण कार्य विभाग के कार्यालय में आग लगवाकर नल-जल घोटाले की सारी फाइलें स्वाहा कर दी।
आखिर क्यों भारत की सबसे बड़ी पार्टी,जो देश भर में खुद को हिन्दू हितों का ठेकेदार मानती है,फुलवारीशरीफ से सीमांचल तक के जिहादीकरण के खिलाफ खुलकर आवाज नहीं उठा पाती है,उत्तर प्रदेश में राम और कृष्ण की मर्यादा पर चलनेवाली पार्टी बिहार पहुँचते ही जाति-जाति का पहाड़ा क्यों पढ़ने लगती है! क्योकि बिहार के पथ निर्माण विभाग के तमाम टेंडरों में उसके दलाल नेताओं ने बड़ा हिस्सा खाया है। क्योंकि उसके लिए अब पार्टी कार्यकर्ता का मतलब जीवन भर धूर्तई का पर्याय रहे शकुनि चौधरी का बेटा सम्राट चौधरी है। आप मूल कैडर कार्यकर्ताओं को बंगाल की तरह लुटवाते रहें, अपमानित कर पार्टी से निकालते रहें, तो कौन आपके लिए काम करेगा! राजद के जंगलराज-भ्रष्टाचार और नीतीश की धूर्तता के बारे में प्रलाप करने से कोई फायदा नहीं,जब तक आप स्वयं कमजोर हैं। क्योंकि कलयुग में कमजोर होना पाप है।
बिहार भाजपा के नेताओं को डेप्यूटेशन पर उत्तर प्रदेश भेजकर प्रशिक्षित किया जाना चाहिए ताकि उन्हें पता चल सके कि कैडर और विचारधारा क्या चीज होती है,और सत्ता में रहने के बावजूद भी संघर्ष और समर्पण किसे कहते हैं! तभी इस अभागे राज्य में कोई योगी आदित्यनाथ पैदा हो पाएगा, जो बिहार को जहालत से निकाल पाएगा...अन्यथा आने वाले पीढियां रोज चीख-चीख कर हमसे बर्बाद हो चुके बिहार का हिसाब मांगेंगी।..और हाँ, सेक्युलरिज्म की अफीम के प्रभाव से मुहर्रम को भी बधाई पर्व मानकर नंगा नाच करने वाले ललटेनियों, थोड़ा धैर्य रखो;2024 में गम का ताजिया निकालने का भरपूर अवसर मिलेगा। जय श्री राम।