10/08/2026
कानून हाथ में लेने पर सख्त संदेश: मध्य प्रदेश में 2022 की मॉब लिंचिंग मामले में 14 दोषियों को उम्रकैद ॥
विशेष रिपोर्ट
नर्मदापुरम/सिवनी मालवा: मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम जिले में साल 2022 के बहुचर्चित मॉब लिंचिंग मामले में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कुल 14 दोषियों को आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है। कथित गौरक्षा के नाम पर हुई इस हिंसा में नजीर अहमद नाम के व्यक्ति की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जबकि उनके दो साथी गंभीर रूप से घायल हो गए थे।
कब और किस कोर्ट ने सुनाया फैसला?
सजा की तिथि: 12 जून 2026
फैसला सुनाने वाली अदालत: प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश (सिवनी मालवा, जिला नर्मदापुरम)
न्यायाधीश: एडीजे तबस्सुम खान
लगभग चार साल चले मुकदमे (ट्रायल) के बाद, 55 पन्नों के अपने विस्तृत फैसले में कोर्ट ने माना कि यह मामला संगठित मॉब लिंचिंग और बर्बरता का स्पष्ट उदाहरण है, जिसमें भीड़ ने कानून की धज्जियां उड़ाईं।
घटनाक्रम का पूरा ब्योरा (क्या हुआ था?)
2-3 अगस्त 2022 की रात: महाराष्ट्र के अमरावती निवासी नजीर अहमद, ड्राइवर शेख लाला और शेख मुश्ताक एक पिकअप वाहन में मवेशियों को लेकर अमरावती की ओर जा रहे थे।
बराखड़ गांव के पास हमला: सिवनी मालवा तहसील के बराखड़ गांव के पास खुद को गौरक्षक बताने वाले स्थानीय युवकों और ग्रामीणों की भीड़ ने वाहन को रोक लिया।
अंधाधुंध मारपीट: मवेशी तस्करी के संदेह में भीड़ ने तीनों व्यक्तियों को वाहन से घसीटकर लाठी, डंडों और घातक हथियारों से पीटना शुरू कर दिया।
इलाज के दौरान मौत: सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने घायलों को अस्पताल पहुंचाया, जहां गंभीर रूप से घायल नजीर अहमद की इलाज के दौरान मृत्यु हो गई, जबकि दो अन्य बुरी तरह घायल हुए।
किन धाराओं में हुई सजा?
अदालत ने पुलिस की जांच, गवाहों के बयानों और मेडिकल रिपोर्ट को आधार बनाते हुए दीपक उर्फ बाबा केवट, अजय राठौर, प्रकाश कौशल, पवन बाथम, अमर, कन्हैया, अनुज, संजू, आकाश, गौरव यादव, आकाश सराठे, चेतन मराठा, देवेंद्र और संदीप समेत 14 अभियुक्तों को दोषी ठहराया।
धारा 302/149 (IPC): गैरकानूनी जनसमूह द्वारा हत्या के लिए आजीवन कारावास।
धारा 307/149 (IPC): हत्या के प्रयास के जुर्म में 10 साल की कठोर कैद।
धारा 148 (IPC): घातक हथियारों से बलवा करने पर 3 साल की सजा।
फैसले का मुख्य निष्कर्ष
न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी की कि यदि किसी नागरिक को अवैध गतिविधि या तस्करी की शंका होती है, तो उसका वैधानिक कर्तव्य पुलिस को सूचना देना है। भीड़ बनाकर किसी पर हमला करना या स्वयं न्यायाधीश बनकर सजा देना संविधान और कानून व्यवस्था के खिलाफ है। News24 Bihar & Jharkhand Bihar Police