27/10/2021
गांव वाले इंतिज़ार में ही रहे
तारण पंचायत के मुखिया मेराज आलम ने रात 11 बजे मेरे चचा तबरेज़ आलम को फ़ोन किया कि कल विधायक Shahnawaz Alam - AIMIM शाहनवाज़ आलम रामरई गांव जायेंगे और दोपहर का खाना वहीं खाएंगे, सुबह सवेरे लोगों को विधायक महोदय जी की आने की लोगों को जानकारी दी गई , बाढ़ प्रभावित लोग और एक सड़क से वंचित गांव के वाले , और दूसरे समसस्याओं से झूझ रहे लोग पुरे दिन गांव के लोग विधायक महोदय और मुखिया मेराज आलम का इंतिज़ार करते रहे लेकिन विधायक महोदय की तरफ से न फ़ोन आया और न विधायक महोदय की तरफ से दौरा रद्द करने की बात बताई गई , बाद में सोशल मीडिया के माध्यम से मालूम हुवा की विधायक जी मझवा गांव से वापस चले गए
कुछ लोग बता रहे हैं कि विधायक महोदय और मुखिया मेराज आलम रास्ते में पानी और कीचड़ होने के कारण रामरई गांव नहीं आए और मझवा गांव से वापस चले गए , जो लोग रास्ते सही न होने के कारण विधायक जी के रामरई गांव दौरा रद्द होने की बात कर रहे हैं , मैं उन लोगों को थोड़ा पीछे इतिहास में ले जा कर बताना चाहता हूँ
1967 से जोकीहाट विधानसभा चुनाव हो रहा है, जोकीहाट के सबसे पहले विधायक नज़मुद्दीन साहिब हैं, 1969 से 1980 तक तीन टर्म लगातार तस्लीमुद्दीन साहिब विधायक रहे , उसके बाद मोईदूर रहमान , फिर तस्लीमुद्दीन और फिर एक टर्म मोईदूर रहमान, उसके बाद तस्लीमुद्दीन और सफराज़ आलम विधायक रहे ,इस बीच एक मंज़र आलम विधायक बने, उसके बाद फिर लगातार तस्लीमुद्दीन परिवार से ही पहले सरफ़राज़ फिर शाहनवाज़ आलम विधायक बनते चले आ रहे हैं ,जोकीहाट विधान सभा सीट पर इनमे से अलग अलग पार्टियों से चार लोग ही विधायक रहे हैं
1967 से 2021 तक कुल 54 साला मुद्दत रहा है , इनमे दो साल विधायक नज़मुद्दीन साहब , 10 साल मोईदूर रहमान और 5 साल मंज़र आलम विधायक रहे , 54 साल में से सिर्फ 17 साल दूसरे विधायक जोकीहाट पर राज किये , बाक़ी तस्लीमुद्दीन और उनके परिवार से 37 साल राज करते आ रहे हैं और रामरई गांव उसी जोकीहाट विधान सभा का हिस्सा रहा है और है लेकिन 17 सालों में नज़मुद्दीन , मोईदूर रहमान और मंज़र आलम की निगाह कभी रामरई पर पड़ी और सब से ज़ियादा राज करने वाले परिवार सुवर्गीय तस्लीमुद्दीन साहब परिवार ने कभी गांव विकास की नज़र से देखा , हालांकि गांव वालों ने हमेशा सुवर्गीय तस्लीमुद्दीन साहब और उनके बेटों को ही वोट किया है,
37 सालों एक बार भी गांव को विकास की नज़र से देखते और सड़कें बनवा देते तो आज विधायक महोदय मोटर साईकिल या चार चक्के से आने में कोई परेशानी नहीं होती ,
याद रहे कि इसमें सिर्फ सुवर्गीय तस्लीमुद्दीन साहब और उनके बेटों विधायक पीरियड के बारे में हैं हालांकि इस परिवार के संसदीय क्षेत्र में भी रामरई गांव रहा है , जब किशनगंज से सांसद होते तो ये गांव किशनगंज में था अब ये अररिया संसदीय क्षेत्र में है
आप को बता दें कि तारण पंचायत के रामरई के तीन तरफ से बकरा नदी है और एक तरफ से नदी नहीं है , उसी तरफ से गांव से निकलने का रास्ता है लेकिन कई सालों से टूटी हुइ कच्ची सड़क है , बाढ़ के दिनों में उस रास्ते पर छाती भर और हेला पानी रहता है , बाढ़ के दिनों में पैदल भी नहीं आना जाना कर सकते है , मोटर साईकिल और चार चक्के की बात ही करना ही छोड़ दीजिए ,गांव के लोग जान हथेली पर रख कर भंगिया की तरफ से नाव से आवाजाही करते हैं, नाव भी तीन साल पुराना है , प्रतिनिधियों की तरफ से न सड़क बन पाती है और न नाव मिलता है,
लेखक: राशिदुल इस्लाम
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