19/09/2025
बेलगाम खर्च, बेकार व्यवस्था: बलिया में कचरा उठाने वाले वाहन बने कबाड़
बलिया ज़िले में स्वच्छ भारत मिशन के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर खरीदे गए कचरा उठाने वाले वाहन आज गांवों की शोभा नहीं, बल्कि लापरवाही की मिसाल बन गए हैं। ताज़ा रिपोर्ट से पता चलता है कि ग्राम पंचायतों में खरीदे गए 1,933 ई-रिक्शा व कचरा वाहन या तो प्रधानों के घरों में खड़े-खड़े जंग खा रहे हैं, या फिर शुरू से ही इस्तेमाल में नहीं लाए गए।
करोड़ों का हिसाब, ज़मीन पर ज़ीरो काम
– लगभग 20 करोड़ रुपये की लागत से ये वाहन 2020 में खरीदे गए थे।
– दावा किया गया कि हर महीने 6.95 लाख घरों से कचरा उठाया जाएगा।
– ज़मीनी हकीकत: वाहन चल ही नहीं रहे, कचरा निस्तारण केन्द्रों पर ताले पड़े हैं।
आंकड़ों की सच्चाई
विभागीय जानकारी के मुताबिक, 18 ब्लॉकों के 1,803 गांवों में कचरा निस्तारण केन्द्र और 4,978 सॉलिड वेस्ट डंप बनाए गए। फिर भी ज़्यादातर जगहों पर 6.28 करोड़ की लागत से खरीदे गए ई-रिक्शा वर्षों से धूल खा रहे हैं। कई वाहन तो सीधे प्रधानों के घर पर खड़े हैं, जिनका कोई हिसाब-किताब नहीं।
जनता की जेब पर बोझ
हर महीने लगभग 1.25 करोड़ रुपये का रखरखाव खर्च दिखाया जा रहा है, जबकि काम नगण्य है। गांवों में गंदगी जस की तस है और लोग खुद अपने स्तर पर सफाई करने को मजबूर हैं।
सवाल जो उठते हैं
क्या ये सिर्फ कागज़ी योजना बनकर रह गई?
जिन पर रखरखाव का खर्च दिख रहा है, उसकी जांच कौन करेगा?
जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई कब होगी?
जनता की मांग
बलिया की जनता अब पारदर्शी जांच और जवाबदेही चाहती है। ज़िला प्रशासन और पंचायत विभाग को चाहिए कि:
सभी वाहनों का भौतिक सत्यापन कर उनकी स्थिति सार्वजनिक करे।
दोषी अधिकारियों और प्रधानों पर कार्रवाई करे।
गांवों में ठोस कचरा प्रबंधन की नई कार्ययोजना बनाए और उसे सख्ती से लागू करे।
निचोड़
स्वच्छ भारत मिशन की यह कहानी बताती है कि सिर्फ योजनाएं बनाना काफी नहीं, ईमानदार क्रियान्वयन ही असली सफाई लाता है। बलिया की जनता अब सिर्फ आश्वासन नहीं, असल सफाई देखना चाहती है Chief Minister Office Uttar Pradesh Dayashankar Singh