10/03/2023
कुछ जातिवादी, वर्णवादी लोग बेवजह तेजस्वी पर खार खाए हुये है। मुख्यमंत्री के घर में पैदा होना कोई गुनाह नहीं है। पैदा होने के बाद आदमी अपने कर्म और प्रारब्ध के दम पर आगे बढ़ता है।
पूर्व मुख्यमंत्री दारोगा प्रसाद राय के बच्चे, पूर्व मुख्यमंत्री बी पी मंडल के बच्चे भी चांदी के चम्मच लेकर ही पैदा हुये। उनके ऊपर कोई कुछ नहीं कमेंट करता है क्यों? वो लोग भी तो यादव जाति में ही पैदा लिये।
पूर्व मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह के बेटे भी चांदी के चम्मच लेकर ही पैदा लिये। विधायक, मंत्री बने, उन्हें किसी ने नहीं रोका।
पूर्व मुख्यमंत्री के बी सहाय, महामाया प्रसाद सिन्हा, के पुत्र राजनीति में उस उँचाई को नहीं छू पाये जहाँ उनके पिता थे,
विवेकानन्द झा, जगन्नाथ मिश्र, बिन्देश्वरी दुबे, भागवत झा आजाद , केदार पाण्डेय के बेटे भी राजनीति में कुछ खास मकाम नहीं पा सके।
पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर के पुत्र भी राजनीति में हैं। राज्य सभा सांसद बने।
पूर्व उप मुख्यमंत्री डॉ अनुग्रह नारायण सिंह के पुत्र चांदी के चम्मच लेकर पैदा हुये और बिहार के मुख्यमंत्री बने सत्येंद्र नारायण सिंह । बाद में इनके पुत्र निखिल कुमार सांसद बने और राज्यपाल भी। इनका मुख्यमंत्री के बेटे होने के कारण किसी ने विरोध नहीं किया। वहीं बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रशेखर सिंह के पुत्र राजनीति में कुछ खास नहीं कर पाये।
अभी वर्तमान मुख्यमंत्री नीतीश जी के पुत्र की राजनीति में कोई रुचि नहीं है, लेकिन भविष्य में इनका पुत्र राजनीति में आते हैं तो कोई नहीं रोक सकता।
कोई भी व्यक्ति अपने कर्म , संस्कार , प्रतिभा और प्रारब्ध पर ही आगे बढ़ता है, जन्म के आधार पर कुछ विशेष अवसर उसे जरुर मिलता है लेकिन किसी उँचाई पर पहुंचने के लिये लगन, मेहनत, निष्ठा भी जरूरी है।