25/12/2025
दिसंबर 2025 में मयमनसिंह शहर के एक हिंदू कर्मचारी, दीपु चंद्र दास, की भीड़ द्वारा लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) कर दी गई और उसके शव को जला दिया गया। उन पर ईशनिंदा का झूठा आरोप लगाया गया था। इस घटना के विरोध में भारत में भी कड़े प्रदर्शन हुए हैं।
सांप्रदायिक हमलों के आंकड़े: 'बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद' (BHBCUC) के अनुसार, अगस्त 2024 से जुलाई 2025 के बीच अल्पसंख्यकों के खिलाफ 2,442 हिंसक घटनाएं दर्ज की गईं। अकेले 2025 की पहली छमाही में कम से कम 258 हमले हुए, जिनमें 27 हत्याएं और 20 बलात्कार की घटनाएं शामिल थीं।
धार्मिक स्थलों और संपत्तियों पर हमले: 2024-2025 की अवधि में 150 से अधिक मंदिरों में तोड़फोड़ की गई और सैकड़ों हिंदू घरों व व्यवसायों को आग के हवाले कर दिया गया या लूटा गया।
ईशनिंदा के झूठे आरोप: हिंदुओं को निशाना बनाने के लिए सोशल मीडिया पर "ईशनिंदा" के फर्जी पोस्ट का उपयोग किया जा रहा है। जुलाई 2025 में रंगपुर में एक हिंदू छात्र पर फर्जी फेसबुक अकाउंट के जरिए अपमानजनक सामग्री पोस्ट करने का आरोप लगाकर हिंदू परिवारों के खिलाफ हिंसा भड़काई गई।
महिलाओं का उत्पीड़न: रिपोर्टों के अनुसार, हिंदू महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर सिंदूर पहनने या अपनी धार्मिक पहचान प्रकट करने पर डराया-धमकाया जा रहा है।
प्रणालीगत भेदभाव: अल्पसंख्यकों को पुलिस और न्यायिक नियुक्तियों में कम प्रतिनिधित्व और नागरिक सेवा परीक्षाओं में भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। ❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️ #ʙᴀᴊʀᴀɴɢᴅᴀʟ🚩 जय हिंद जय भारत 🇮🇳