Auraiya औरैया اوریہ

Auraiya   औरैया   اوریہ All people from Auraiya are welcome to join this community.

जनपद औरैया अपने नये युवा रत्नों के साथ आज आगे बढ़ता जा रहा है. साथियो, वो दिन था १७ सितम्बर,१९९७ जब दो तहसील औरैया और बिधूना जनपद इटावा से अलग कर दीं गयीं और जन्म हुआ हमारे राज्य के नये जनपद औरैया का जो कि जनपद का मुख्यालय भी है.

हमारा जनपद औरैया मुग़ल सराय मार्ग(रा.रा. ०२) पर कानपुर से १०४ किमी पश्चिम में, और इटावा से ६४ किमी दूर पूर्व में स्थित है.

समय के साथ हमारे जनपद ने बहुत जल्द ही राजनैति

क विसंगतियों से ग्रसित कुछ 'महापुरुषों' का कोप भी झेला है पर जैसा कि सर्वविदित है "जाके राखे साइंयां... " वो लोग भी हमारे इस जनपद का कुछ न कर सके.

🕉️ कैलाश में शिव: भगवान शिव का अनन्त निवास— एक आध्यात्मिक ब्लॉग लेखदुनिया में कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो सिर्फ पहाड़ या ध...
06/11/2025

🕉️ कैलाश में शिव: भगवान शिव का अनन्त निवास

— एक आध्यात्मिक ब्लॉग लेख

दुनिया में कुछ स्थान ऐसे होते हैं जो सिर्फ पहाड़ या धरती नहीं होते—वे ऊर्जा, शांति और दिव्यता का अनुभव कराते हैं। कैलाश पर्वत ऐसा ही एक पवित्र स्थान है। यह वही पर्वत है जिसे भगवान शिव का शाश्वत निवास माना जाता है—वह स्थान जहाँ महादेव समाधि में लीन रहते हैं और जहाँ ब्रह्मांड की ऊर्जा शांत होकर बहती है।

🌄 कैलाश: वह पर्वत जो दिव्यता को संजोए हुए है

कैलाश कोई साधारण पर्वत नहीं है। इसकी आकृति, इसकी ऊँचाई और इसकी रहस्यमय चुप्पी इसे अद्भुत बनाती है।
यह दुनिया का एकमात्र पर्वत है जिस पर किसी ने अब तक चढ़ाई नहीं की। शायद इसी कारण यह आज भी शक्तिमय और पवित्र बना हुआ है।
भक्तों का मानना है कि यहाँ भगवान शिव ध्यान में लीन रहते हैं और यही स्थान ब्रह्मांड का ऊर्जा केंद्र है।

🧘‍♂️ शिव कैलाश पर क्यों रहते हैं?

कहते हैं, शिव वैराग्य, ध्यान और सत्य के देवता हैं। कैलाश इन्हीं गुणों का प्रतीक है—

मौन, जिसमें उत्तर छुपे हैं

निश्छलता, जो मन को स्थिर करती है

शुद्धता, जिसे मानव स्पर्श भी नहीं छू पाया

ऊर्जा, जो हर दिशा में शांत रूप से फैलती है

कैलाश वही स्थान है जहाँ शक्ति और शांति एक साथ महसूस होती है।

🔱 कई धर्मों में पूज्य एक पर्वत

कैलाश की विशेषता यह है कि यह केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि कई धर्मों के लिए पवित्र माना जाता है:

हिंदू धर्म में यह शिव-पार्वती का निवास है

बौद्ध धर्म इसे "कांग रिम्पोचे" यानी ‘अमूल्य पर्वत’ कहते हैं

जैन धर्म में यहाँ प्रथम तीर्थंकर को मोक्ष प्राप्त हुआ माना जाता है

बोन धर्म इसे ब्रह्मांड की धुरी कहता है

एक पर्वत—कई आस्थाएँ—एक दिव्य ऊर्जा।

✨ कैलाश पर बैठे शिव का संदेश

भगवान शिव का कैलाश पर ध्यानमग्न स्वरूप हमें जीवन के कुछ गहरे संदेश देता है:

शांति बाहर नहीं, भीतर से आती है

मौन अक्सर शब्दों से अधिक ताकतवर होता है

आत्मसंयम ही वास्तविक शक्ति है

विरक्ति से ही स्पष्टता आती है

ब्रह्मांड का संतुलन शांत मन से चलता है

कैलाश, हर साधक के लिए, किसी यात्रा का अंत नहीं—आत्म-यात्रा की शुरुआत है।

🕉️ कैलाश की खिंचाव शक्ति

कहा जाता है कि कैलाश को कोई देखने जाए या सिर्फ तस्वीरों में देख ले—दिल में एक अजीब सी खिंचाव महसूस होती है।
भक्त कहते हैं:
“कैलाश कोई खुद नहीं जाता, कैलाश बुलाता है।”

🌌 निष्कर्ष: जहाँ धरती और दिव्यता मिलते हैं

कैलाश हमें याद दिलाता है कि आध्यात्मिकता प्रकृति से अलग नहीं, बल्कि उसका ही स्वर है।
और इसी पवित्र मौन में बैठे हैं भगवान शिव—अनन्त, शांत और सृष्टि पर निगाह रखते हुए।

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30/10/2025

नचिकेता की कहानी हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ कठोपनिषद् में वर्णित है। यह कहानी बालक नचिकेता और मृत्यु के देवता यमराज के ब...
25/10/2025

नचिकेता की कहानी हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथ कठोपनिषद् में वर्णित है। यह कहानी बालक नचिकेता और मृत्यु के देवता यमराज के बीच हुए संवाद पर आधारित है।
​कहानी का सार (Summary of the Story):
नचिकेता के पिता, महर्षि वाजश्रवा, एक यज्ञ कर रहे थे। इस यज्ञ में उन्हें अपनी प्रिय और उत्तम वस्तुएं दान करनी थीं। लेकिन नचिकेता ने देखा कि उनके पिता बूढ़ी, कमजोर और कम दूध देने वाली गायें दान कर रहे थे, जो किसी काम की नहीं थीं। नचिकेता ने अपने पिता को टोकते हुए पूछा कि जब दान में सबसे प्रिय वस्तु दी जाती है, तो वे उसे (नचिकेता को) किसे दान करेंगे, क्योंकि वह उन्हें सबसे प्रिय है। बार-बार पूछे जाने पर, पिता वाजश्रवा क्रोधित हो गए और गुस्से में कह दिया कि "जा, मैं तुझे यम को दान करता हूँ।"
नचिकेता ने इसे पिता की आज्ञा मानकर यमलोक (मृत्यु के देवता यमराज का निवास) जाने का निश्चय किया। जब वह यमपुरी पहुंचे, तो यमराज वहाँ नहीं थे।
नचिकेता पूरे तीन दिन तक यमराज के द्वार पर भूखे-प्यासे बैठे उनकी प्रतीक्षा करते रहे। भारतीय संस्कृति में अतिथि को भगवान के समान माना जाता है, इसलिए यमराज जब लौटे और उन्होंने एक बालक को बिना अतिथि सत्कार के तीन दिन तक प्रतीक्षा करते देखा, तो उन्हें बहुत दुःख हुआ।
अपनी गलती की भरपाई के लिए, यमराज ने नचिकेता से तीन रात की प्रतीक्षा के बदले तीन वरदान मांगने को कहा।
​पहला वरदान: नचिकेता ने माँगा कि जब वह अपने पिता के पास वापस जाएँ, तो उनके पिता का क्रोध शांत हो जाए और वे उन्हें पहले की तरह प्यार करें। यमराज मान गए।
​दूसरा वरदान: नचिकेता ने स्वर्ग की प्राप्ति कराने वाली अग्नि विद्या (यज्ञ विधि) के बारे में पूछा। यमराज ने उसे वह विद्या सिखाई, जो बाद में 'नचिकेताग्नि' के नाम से प्रसिद्ध हुई।
​तीसरा वरदान: नचिकेता ने सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न पूछा - "मृत्यु के बाद आत्मा का क्या होता है? क्या आत्मा शरीर के नाश के साथ नष्ट हो जाती है, या उसका अस्तित्व बना रहता है?"
​आत्मज्ञान की प्राप्ति:
यमराज ने इस प्रश्न को कठिन बताते हुए नचिकेता को कई भौतिक सुख-सुविधाओं और लम्बी आयु का लालच दिया ताकि वह अपना वरदान बदल ले। लेकिन नचिकेता अपने निश्चय पर अडिग रहे और बोले कि ये क्षणिक सुख किसी काम के नहीं, उन्हें केवल आत्मा का रहस्य जानना है। नचिकेता की इस दृढ़ता और जिज्ञासा से प्रभावित होकर, यमराज ने उन्हें आत्मज्ञान और ब्रह्म-विद्या का उपदेश दिया, जिसमें आत्मा के अमर और अविनाशी स्वरूप का विस्तृत वर्णन किया गया है।

🎭 कहानी: “राजा भोज और गरीब ब्राह्मण का सच्चा मालिक”एक दिन राजा भोज अपने दरबार में न्याय कर रहे थे।तभी एक गरीब ब्राह्मण द...
17/10/2025

🎭 कहानी: “राजा भोज और गरीब ब्राह्मण का सच्चा मालिक”

एक दिन राजा भोज अपने दरबार में न्याय कर रहे थे।
तभी एक गरीब ब्राह्मण दौड़ा-दौड़ा आया और बोला —

> “महाराज! मेरे पड़ोसी ने मेरा बैल चुरा लिया है, पर कोई मेरी बात नहीं सुनता!”

राजा भोज ने तुरंत पड़ोसी को बुलाया।
पड़ोसी बोला —

> “महाराज, झूठ बोल रहा है, बैल मेरा है!”

राजा भोज ने मुस्कराते हुए कहा —

> “ठीक है, दोनों अपने-अपने बैल को बुलाओ, जो तुम्हारी आवाज़ पर दौड़ा आएगा, वही मालिक होगा!”

पहले पड़ोसी ने आवाज़ दी — बैल ने सिर तक नहीं उठाया।
फिर गरीब ब्राह्मण ने प्यार से पुकारा —

> “आ जा मेरे लाडले, तू ही मेरा सहारा है…”

और तभी बैल जोर से रंभाता हुआ दौड़ा आया,
सीधा ब्राह्मण के पैरों में आकर गिर गया! 🐂

राजा भोज मुस्कराए और बोले —

> “झूठ के पैर नहीं होते, लेकिन सच खुद दौड़कर सामने आता है।”

इतना सुनते ही सिंहासन से एक गुड़िया बोली —

> “वाह राजन! आपने वही न्याय किया जैसा महान राजा विक्रमादित्य करते थे।”

16/10/2025
05/10/2025

#भारतमाताकीजय

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