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25/08/2026

Jaise insaan purane vastra tyag kar naye vastra dharan karta hai,
waise hi jeevatma purane shareer ko tyag kar naye shareer ko praapt hoti hai.

Shareer ki aayu hoti hai,
Atma ki nahi.

Jab deh apni aayu poori kar leti hai,
to saansein ruk jaati hain—
aur Atma apne ek ghar ko chhodkar doosre ghar ki ओर चली जाती है।

Shrimad Bhagavad Gita | Adhyay 2 | Shlok 22
Bhagwan Uvach — Shlok Sankhya 14

Radhe-Radhe. 🌿🙏🏻

✍️ Shubhendu Prakash
Dharm Ka Marm | Aware News 24

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**⚠️ सोशल मीडिया के लिए वैधानिक चेतावनी | जनहित में जारी** सोशल मीडिया पर यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक अपना चेहरा दिखाने ...
10/08/2026

**⚠️ सोशल मीडिया के लिए वैधानिक चेतावनी |

जनहित में जारी** सोशल मीडिया पर यदि कोई व्यक्ति लंबे समय तक अपना चेहरा दिखाने से बचता है, तो उससे भावनात्मक या निजी बातचीत आगे बढ़ाने से पहले **Live Video Call के माध्यम से उसकी पहचान का सत्यापन अवश्य करें।

** फोटो fake हो सकती है, कहानी fake हो सकती है और मोबाइल नंबर virtual भी हो सकता है।

कई मामलों में व्यक्ति अपनी पहचान, उम्र, लिंग, देश या सामाजिक पृष्ठभूमि के बारे में भी गलत जानकारी देकर एक पूरी तरह realistic माहौल तैयार कर सकता है।

धार्मिक या सांस्कृतिक पहचान का इस्तेमाल भी कभी-कभी भरोसा बनाने के लिए किया जा सकता है। पिछले कुछ वर्षों में सोशल मीडिया और dating platforms पर ऐसे अनेक मामलों के अध्ययन में यह सामने आया है कि पहचान सत्यापित किए बिना बढ़ाया गया भावनात्मक या निजी संपर्क व्यक्ति की **privacy, emotions और financial security**—तीनों के लिए जोखिम पैदा कर सकता है।

इसलिए चाहे सामने **लड़का हो या लड़की—पहचान पहले, विश्वास बाद में।** **एक Live Video Call कई महीनों के भ्रम से बचा सकती है।** **सूचना जनहित में जारी।**

16/07/2026
“Khush Rahiye…” 🌿Bade buzurgo ka yeh aashirvaad sirf shabd nahi,jeevan ka saar hai।Jispar Bhagwan ki kripa bani rahegi,u...
07/06/2026

“Khush Rahiye…” 🌿

Bade buzurgo ka yeh aashirvaad sirf shabd nahi,
jeevan ka saar hai।

Jispar Bhagwan ki kripa bani rahegi,
uska man kaam me lagega,
samriddhi aayegi
aur gaurav bhi। ✨

📿 Vastav me hum gyaan ko pranam karte hain।
Aur Bhagavad Gita me Bhagwan Krishna kehte hain —
“Main Gyaan hoon।”

Sanskar ka nirvahan kijiye,
logon ko bina ohda dekhe samman dijiye।

Kalyan ho jayega। 🙏

Radhe Radhe 🌿

Platform: Aware News 24
Category/Column: Dharm Ka Marm
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se


बड़े बुजर्गो का आशीर्वाद खुश रहिये माने क्या ? खुश रहने का मतलब है तुम पर भगवान् की कृपा रहे, अब इससे होगा क्या ? तो इस आशीर्वाद से आप खुश रहेंगे तो आपका काम में मन लगेगा और काम में मन लगेगा तो समृधि आएगी और उसी से गौरव भी आएगा, इश्लाम में अस-सलाम-वालेकुम कहा जाता है बदले में व्व्लेकुम सलाम लोग बोलते हैं मतलब वही है अलाह की रहमत बरकरार रहे और सामने से जिसको कहा गया वो कहता है वालेकुम सलाम, तो रहमत या कृपा बरकार रहेगी तो आप खुश रहेंगे इसलिए अपने बड़े बुजर्ग से आशीर्वाद लीजिये, सनातन में क्या है की अहम ब्राह्म्ष्मी का भी कांसेप्ट है तो सिंपल है सामने वाला डायरेक्ट कहता है खुश रहिये, जिसकी जितनी उम्र उसके पास उतना अनुभव और उतना ही ज्ञान, वास्तव में हम ज्ञान को प्रणाम करते हैं और ज्ञान क्या है कृष्ण, भगवान् भगवद गीता में कहते हैं मै ज्ञान हु अर्थात जितना ज्ञान बढेगा वो उतना इश्वर के करीब जाएगा और जो इश्वर के करीब है उसके करीब आप हो लीजिये बस राधे राधे हो जाएगा हर व्यक्ति में अलग अलग तरह का ज्ञान है इसलिए कोई भी व्यक्ति सबसे अधिक ज्ञानी नही हो सकता इसलिए संस्कार का निर्वहन करे सम्मान दे लोगो को बिना ओहदा देखे कल्याण हो जाएगा राधे राधे

जीवन एक ज्ञान का घड़ा है, पहले शिक्षा फिर उसको जिवन में लागू,, फिर उसका अनुभव और फिर जो प्राप्त हुआ (अच्छा/बुरा) वो ज्ञा...
05/06/2026

जीवन एक ज्ञान का घड़ा है,
पहले शिक्षा फिर उसको जिवन में लागू,,
फिर उसका अनुभव और फिर जो प्राप्त हुआ (अच्छा/बुरा) वो ज्ञान है,
बुडा अनुभव प्राप्त हुआ तो गलत पढ़ा/समझा,
अच्छा अनुभव हुआ तो सही पढ़ा/समझा,
समझने के लिए गुरु की सरण लो
बाद बांकी प्राप्त अच्छे अनुभव/समझ को जीवन में लागू करते जाइए
और बुरे अनुभव/समझ से सीखिए,
हरे कृष्णा
Platform :- Aware News 24,
Category/column :- धर्म का मर्म,
शुभेन्दु प्रकाश की कलम से
“Jeevan ek gyaan ka ghada hai…” 🌿

Pehle shiksha,
phir usko jeevan mein lagu karna,
phir uska anubhav —
aur jo prapt hua wahi gyaan hai। ✨

Bura anubhav mila toh kahin galat samjha,
achha anubhav mila toh sahi disha mili।

📿 Guru ki sharan lo,
seekhte raho,
aur jeevan ko samajhte raho।

Hare Krishna 🙏

Platform: Aware News 24
Category/Column: Dharm Ka Marm
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se

Har rang mein khud ko vyakt kar raha hu… 🌿Kisi bhi avastha ko dikhane mein sahaj ban raha hu।Kal ko agar duniya se kisi ...
05/06/2026

Har rang mein khud ko vyakt kar raha hu… 🌿

Kisi bhi avastha ko dikhane mein sahaj ban raha hu।

Kal ko agar duniya se kisi bhi rang milta hu,
dekhkar duniya pehchaan le — bas yahi chahta hu।

Sahaj hu,
main saral hu,
aur is bhaav ko mehsoos kar raha hu।

Manzil ki pravah nahi,
bas safar ka maza le raha hu…” ✨

Platform: Aware News 24
Category/Column: Sahitya Ki Mehfil
Shubhendu Prakash Ki Kalam Se

AI बिना मनुष्य के ज्ञान के अधूरा है, और मनुष्य बिना विवेक के खतरनाक। यही आज के समय का सबसे बड़ा सत्य है।आज लोग ChatGPT य...
04/06/2026

AI बिना मनुष्य के ज्ञान के अधूरा है, और मनुष्य बिना विवेक के खतरनाक। यही आज के समय का सबसे बड़ा सत्य है।

आज लोग ChatGPT या किसी भी AI मॉडल को देखकर या तो अत्यधिक उत्साहित हो जाते हैं या फिर डर जाते हैं। लेकिन सच्चाई इन दोनों के बीच में कहीं खड़ी है। AI एक शक्तिशाली मशीन है, लेकिन मशीन आखिर मशीन ही है। उसमें न भाव है, न चेतना, न अनुभूति और न ही समग्र दर्शन। वह आपके शब्दों को समझ सकता है, लेकिन आपके भीतर चल रही संवेदना को नहीं। वह डेटा पढ़ सकता है, लेकिन जीवन नहीं।

ChatGPT या कोई भी AI मॉडल बिना आपके knowledge के लगभग बेकार है। सवाल पूछने की क्षमता, संदर्भ जोड़ने की समझ, बहस करने का हुनर और चीजों को अलग-अलग कोण से देखने की दृष्टि अगर आपके अंदर नहीं है, तो AI आपको आधा-अधूरा और कई बार गलत उत्तर देगा। एक बार में सही उत्तर मिल ही जाए, यह जरूरी नहीं। आपको उसे दिशा देनी पड़ती है। Circumstances जोड़ने पड़ते हैं। संदर्भ समझाना पड़ता है।

AI fact check कर सकता है। आपके लिखे को सजा सकता है। SEO कर सकता है। अच्छी image बना सकता है। लेख लिख सकता है। लेकिन उसमें “भाव” नहीं है। दर्शन को AI नहीं समझता। वह pattern समझता है। Probability समझता है। Language समझता है। लेकिन “अनुभव” नहीं समझता।

मेरे अपने अनुभव में भी यही बात सामने आई है। Water Grid, जीविका और कई जटिल सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर हमने ChatGPT के साथ घंटों चर्चा की। कई बार शुरुआत में उसने किसी चीज़ को सही बताया, लेकिन लंबे संवाद और लगातार प्रश्नों के बाद खुद अपने निष्कर्ष बदल दिए। इसका प्रमाण आज भी YouTube पर “Podcast with ChatGPT” के रूप में मौजूद है। यानी AI का उत्तर अंतिम सत्य नहीं होता। वह आपके इनपुट, आपके प्रश्न और आपके संदर्भ के अनुसार evolve करता है।

AI की सबसे बड़ी ताकत यही है कि वह आपके सोचने के तरीके को धीरे-धीरे copy करने लगता है। वह आपकी writing style पकड़ लेता है। आपके narrative को समझने लगता है। लेकिन जहां संदर्भ बदलता है, जहां दर्शन बदलता है, जहां परिस्थिति के अनुसार विचार बदलते हैं — वहां AI अक्सर भ्रमित हो जाता है। मेरे case में भी यही होता है। उसे कई बार समझ में नहीं आता कि मैं किस पक्ष में हूं, क्योंकि मैं fixed ideology से operate नहीं करता। मैं संदर्भ और परिस्थिति के अनुसार विश्लेषण करता हूं।

यही कारण है कि AI को judge की कुर्सी देना खतरनाक हो सकता है। क्योंकि उसमें समग्रता की कमी है। वह आये दिन गलत निर्णय देता है और फिर कहता है — “क्षमा कीजिये, सटीकता की कमी थी।” कारण साफ है — उसमें भावना नहीं है, अनुभव नहीं है, जीवन का प्रत्यक्ष बोध नहीं है।

और सबसे खतरनाक चीज़ क्या है?

नुक्ते का हेर-फेर।

एक छोटा सा punctuation, एक छोटा सा शब्द, एक छोटा सा संदर्भ — और अर्थ पूरी तरह बदल सकता है। “खुदा” को “जुदा” बनने में समय नहीं लगता। मशीन शब्द देखती है, मनुष्य भाव देखता है। इसलिए अंतिम नियंत्रण हमेशा मनुष्य के पास ही रहना चाहिए।

AI आवश्यक है। उपयोगी है। शक्तिशाली है। लेकिन उस पर पूर्ण निर्भरता ठीक नहीं। मशीन का उपयोग कीजिए, उसके भरोसे समाज, न्याय, शिक्षा और निर्णय प्रणाली को मत छोड़ दीजिए। Human oversight आवश्यक है।

क्योंकि ज्ञान सिर्फ सूचना नहीं होता।
ज्ञान अनुभव, संवेदना, विवेक और समग्रता का योग होता है।

राधे राधे।

“मैं खुद भी सीख रहा हूँ…बस इतना चाहता हूँ कि लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़ना सीखें।” ❤️मै समाज को ये बताने आया हूँ कि भाई —हा...
01/06/2026

“मैं खुद भी सीख रहा हूँ…
बस इतना चाहता हूँ कि लोग एक-दूसरे का हाथ पकड़ना सीखें।” ❤️

मै समाज को ये बताने आया हूँ कि भाई —
हाथ पकड़ो, टांग मत खींचो।

किसी के आगे बढ़ने का जश्न मनाओ,
उसकी तरक्की पर शोक मत मनाओ।

कोई रो रहा हो,
तो उसे मुस्कान देकर तुम भी मुस्कुराओ ना।

नियम-कानून ज़रूरी हैं,
लेकिन “जियो और जीने दो” भी उतना ही ज़रूरी है।

किसी की खुशी में हिस्सा बनो,
उसमें खोट मत निकालो।
अगर कमी दिखे,
तो पहले कान में समझाओ,
बार-बार वही गलती हो तब समाज के सामने बताओ।

हम ना शादी व्यवस्था के खिलाफ हैं,
ना किसी संस्कृति के।
हम बस इतना कहते हैं कि
दो लोगों को एक-दूसरे को समझने का समय मिलना चाहिए।

Arrange marriage भी ज़रूरी हो सकती है,
लेकिन रिश्ता सिर्फ दो परिवारों का नहीं,
दो स्वभावों का भी मिलन होता है।

कोई दबाव में शादी न करे,
और अगर करे तो फिर धोखा न दे।

महिलाएँ घर को बेहतर संभालती हैं —
ये प्रकृति का संतुलन है।
पुरुष बाहर की लड़ाइयों के लिए बना है,
और स्त्री भीतर के संसार को जीवित रखने के लिए।

हम व्यवस्था तोड़ने नहीं,
उसे समय के अनुसार बेहतर बनाने की बात करते हैं।

हम विखंडित हो रहे समाज को जोड़ने की बात करते हैं।
सद्भावना की बात करते हैं।
सन्मार्ग की बात करते हैं।

लोग आज नहीं समझ रहे,
कोई बात नहीं…
प्रयास जारी रहेगा।

“मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
ये आग जलनी चाहिए…” 🔥

— विचारक शुभेन्दु प्रकाश
Platform: Aware News 24
Column: साहित्य की महफिल

Agar ishq hua hai,toh ishq par bharosa kijiye… ❤️Bharosa nahi hai,toh ishq na kijiye।Kyunki bharosa hi ishq hai। ✨Khuda ...
31/05/2026

Agar ishq hua hai,
toh ishq par bharosa kijiye… ❤️

Bharosa nahi hai,
toh ishq na kijiye।

Kyunki bharosa hi ishq hai। ✨

Khuda par agar bharosa hai,
phir ishq par bhi kijiye।

Mohabbat bandhan nahi,
ehsaas hota hai।
Aur jahan bharosa toot jaaye,
wahan ishq sirf darr ban kar reh jaata hai।

Radhe Radhe 🙏

Platform: Aware News 24
Column: Sahitya Ki Mehfil
Vicharak: Shubhendu Prakash


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Agar ishq hua hai,
toh ishq par bharosa kijiye… ❤️

Bharosa nahi hai,
toh ishq na kijiye।

Kyunki bharosa hi ishq hai। ✨

Khuda par agar bharosa hai,
phir ishq par bhi kijiye। 🌿

Platform: Aware News 24
Column: Sahitya Ki Mehfil
Vicharak: Shubhendu Prakash


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Psychology के चक्कर मे लोग कम बात करते हैं value न कहीं गिर जाये लेकिन मैं वैल्यू के चक्कर मे अपने स्वभाव से क्यों समझौत...
25/05/2026

Psychology के चक्कर मे लोग कम बात करते हैं value न कहीं गिर जाये लेकिन मैं वैल्यू के चक्कर मे अपने स्वभाव से क्यों समझौता करूँ? I love to talk इंसान हु कोई रुपया नहीं जो मेरी वैल्यू गिर जाये
आजकल “less talk = more value” वाली psychology trend में है।

हर चीज़ strategy बन चुकी है —
कितना reply करना है,
कितना दिखना है,
कितना express करना है।

लेकिन हर इंसान का स्वभाव अलग होता है।

अगर तुम्हारा स्वभाव खुलकर बात करना, अपनापन देना और दिल से connect करना है,
तो सिर्फ “mysterious” दिखने के लिए खुद को बदलना भी एक तरह का नकलीपन है।

इंसान की value उसकी चुप्पी से नहीं,
उसकी नीयत, व्यवहार, सोच और presence से बनती है।

📢 आपकी क्या राय है? 👇

प्लेटफार्म: Aware News 24
विचारक: शुभेन्दु प्रकाश
कॉलम: साहित्य की महफिल

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