22/09/2025
*जयगुरुदेव*
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समय का संदेश
21.09.2025 सायंकाल
बाबा जयगुरुदेव आश्रम, उज्जैन, म. प्र.
*1. मनुष्य शरीर से जीवात्मा तभी निकलेगी जब त्रियताप ढीले पड़ेंगे।*
17.20 - 20.26
(तीन दिन में तमोगुण), तीन दिन में रजोगुण, तीन दिन में सतोगुण; ये ढीले पड़ते हैं। कब? जब उपवास रहा जाता है। लेकिन ये मुर्दा नहीं होते हैं, अपंग नहीं होते हैं। ये जब तक अपंग नहीं होंगे, तब तक काल भगवान ने ऐसा सिस्टम बना दिया है कि जीव निकल ही नहीं सकता है इस पिंजरे से। *इस पिंजरे से, मनुष्य रूपी शरीर से जीवात्मा तभी निकलेगी जब ये सब ढीले पड़ेंगे, नहीं तो ये वहां तक (घाट तक) पहुंचने ही नहीं देंगे।* सन्तों ने क्या किया? इसके लिए रास्ता निकाला कि ये सब ढीले पड़ जाएं, ये सब मुर्दा हो जाएं तब ये साधना की विधि बताई। सुमिरन-ध्यान-भजन बताया जब सन्त लोग आए, तब तक मलीनता भी आ गई थी, कलयुग भी आ गया था। कलयुग के असर से भी ये मजबूत हो रहे थे, इनमें बल आ रहा था, इन भूतों में ताकत आ रही थी। जैसे आजकल ये राजनैतिक पार्टियां हैं, ये खत्म कोई नहीं हो रहीं हैं लेकिन सत्ता पार्टी में और लोग रहते हैं; उनके जो कार्यकर्ता रहते हैं बड़े एक्टिव हो जाते हैं और उनमें बल आ जाता है लेकिन जो विरोधी रहते हैं वो पड़े रहते हैं। जब उनका समय आता है, उनकी पार्टी बन गई, उनका नेता कोई बन गया तो उनमें भी ताकत आ जाती है। ऐसे ही आपको समझना चाहिए कि ये खत्म ऐसे नहीं होते हैं, मुर्दा नहीं होते हैं। तब सन्त जब आए, बोले भाई ऐसा रास्ता निकाला जाए जिससे ये मुर्दा जैसे हो जाएं। मर जाएं ये। मर जाएं, जो बाधा डालते हैं, जो घाट तक पहुँचने ही नहीं देते हैं। जीव को होश ही नहीं आता है कि हमको कहीं जाना है। ये अपने ही जाल में फंसाए रखते हैं। तब उन्होंने ये नामदान देना शुरू किया। सुमिरन-ध्यान-भजन कराना शुरू किया और *मुहूर्त के हिसाब से, जैसे देखो मौसम ठंडा है, अब इनमें आप बैठे रहो आराम से, कितना देर साधना करो। न ज्यादा गर्मी है, न ज्यादा ठंडी है। ये मौसम क्या है? ये अनुकूल है। गुलाबी मौसम कहलाता है। क्वार का महीना भी गुलाबी रहता है और चैत्र का महीना गुलाबी रहता है। इसी तरह से अनुकूल समय निकाला सन्तों ने। वैसे तो रोज का बताया लेकिन अनुकूल समय निकाला।*
*2. कल सुबह 7 बजे नवरात्रि साधना के बारे में समझाया जाएगा।*
22.02 - 24.40
कल साधना शुरू हो जाएगी। प्रातःकाल 7 बजे तक आप लोग तैयार होकर के यहीं पर आ जाइएगा। अब ये जो सुबह 4 बजे घंटी बजती है, 4:30 से होता है; कल वो नहीं हो पाएगा। कल वो नहीं होगा। कल तो घंटी बजे न बजे, 7 बजे से पहले-पहले चले आना। बज गई तो ठीक है। आधा घंटा पहले बज गई तो ठीक है। पौन घंटा पहले बज गई तो ठीक है और नहीं तो आप यहां आ जाना और फिर आपको कुछ थोड़ा बहुत बता दिया जाएगा, उसके बाद आपको बैठा दिया जाएगा। *बताना इसलिए जरूरी होगा कि पूरे देश में ही नहीं, विदेशों में भी जहां संगत है, प्रेमी हैं, वो लोग भी कल सुबह बैठेंगे। सब बैठेंगे। थोड़ी ही देर चाहे बैठेंगे, करेंगे। सुनेंगे भी लोग ऑनलाइन, यह सिस्टम इस वक्त पर बन गया है कि सब जगह खबर जाती है।* मैं जो बोल रहा हूं इसको हर देश में लोग सुन रहे होंगे तो सब लोग सुनेंगे। तो जिनको पूरी जानकारी नहीं है वो लोग भी बैठेंगे। आप ये समझो जो स्कूल में एक तरह से भर्ती हुए हैं। जैसे अभी मैं दुबई में नामदान दे कर के आया। बहुत लोगों ने नामदान लिया वहां। अब आप यह समझो कि उनको मालूम नहीं, ना कोई बता पाया हो किस तरह से करना रहेगा, तो वो सुन लेंगे। तो *कल थोड़ा समझा दूंगा और समझाने के बाद कैसे करना रहेगा यह भी बता दूंगा।* तो आप लोग तो जानते हो क्योंकि आप लोगों को अनुभव वाले लोगों को ही बुलाया गया है यहां, क्योंकि यहां पर अखंड साधना शिविर चलेगी 9 दिन की। नवरात्र में यहां अकेले चलेगी ये (शिविर)। केवल एक यही जगह है पूरे देश-विदेश में इस नवरात्र में कि जहां एक जगह इकट्ठा हो कर के साधना लोग करेंगे और अखंड करेंगे। बाकी अपने-अपने हिसाब से करेंगे सब लोग और जब समापन होगा तब ऑनलाइन सबके लिए समापन कर दिया जाएगा।
*3. इसी साधना शिविर से बहुत से लोगों की आध्यात्मिक ज्ञान की शुरुआत हो जाएगी।*
26.11 - 27.20
साधना शिविर से ही बात बनेगी। बहुत से लोगों को इसी से शुरुआत हो जाएगी आध्यात्मिक ज्ञान की। आध्यात्मिक विकास का ज्ञान हो जाएगा, उसकी शुरुआत हो जाएगी। विश्वास हो जाएगा कि हम सही जगह पर हैं, सही स्कूल में भर्ती हैं; पास हो जाएंगे। किसी लायक हो जाएंगे। काबिल हो जाएंगे। पढ़–लिख ले जाएंगे। अधिकारी बन जाएंगे। अधिकारियों के बगल बैठने लायक हो जाएंगे। यह उनके लिए हो जाएगा मालिक की दया से। *दया बरसेगी, सबके ऊपर बरसेगी। लेकिन जब तौर–तरीके, संयम और नियम से लोग करेंगे तब होगा। ऐसे नहीं होगा। तो संयम नियम भी बताया गया। तौर-तरीका भी बता दिया जाएगा और लगन लगेगी जब, विश्वास होगा गुरु पर तब करेंगे लोग।*
*4. परमार्थी सेवा का आध्यात्मिक लाभ मिल जाता है।*
29.00 - 30.28
आश्रम वासियों के लिए, आप लोग कैसे भी हो सबको यह सुविधा रहेगी क्योंकि आप सेवा में लगे हुए हो और सेवा का फल मिलता है, सेवा भजन में जुड़ता है। जो बाल बच्चों की सेवा में लगे हुए हैं, उनको तो इसमें लाभ नहीं मिलता है परमार्थ में। वो *जो गृहस्थ धर्म का पालन करते हैं उनको तो भौतिक लाभ ही मिलता है; जिससे शरीर को सुख मिलता है और यह जो आप परमार्थी काम में लगे हुए हो आश्रम वासी, जहां-जहां भी सेवा में लोग लगे हुए हैं जैसे भी, उनको आध्यात्मिक लाभ मिल जाता है, मदद मिल जाती है भजन-ध्यान में लेकिन करना सब लोगों को रहेगा।* समय निकाल करके, आ करके यहीं कर लिया करना। यहां देर तक बैठ पाओगे और यहां मन आपका लगेगा, सबके साथ जब करोगे अच्छे साधकों के साथ बैठकर करोगे। अपनी जगह पर भी कर सकते हो लेकिन यह देख लो कि वहां मन रुक जाएगा, कोई बाधा डिस्टर्ब नहीं करेगा आपको; जहां पर रात्रि में विश्राम करते हो आप आश्रम वासी और वहां पर अगर दिक्कत होगी तो यहीं चले आना, यहां पर बैठकर कर लिया करना।