Sainik Arvind Yadav

Sainik Arvind Yadav cow lover

देश की जनता के रोने के दिन अभी तो शुरू हुए हैं, आगे कितना रोना है देखते जाओ। देश की जनता को बीजेपी सरकार की हकीकत जब तक ...
07/06/2026

देश की जनता के रोने के दिन अभी तो शुरू हुए हैं, आगे कितना रोना है देखते जाओ। देश की जनता को बीजेपी सरकार की हकीकत जब तक समझ में आई तब तक बहुत देर हो गई। देश की जनता अगर ए सोचे की वोट की ताकत से बीजेपी को सत्ता से हटा देगी तो अब संभव नही है। जब तक जनता की आंख खुली तब तक बीजेपी ने चुनाव जीतने का सिस्टम पूरी तरह से मजबूत कर लिया।
बीजेपी को अपने सिर पर किसी समाज ने बैठाया तो सवर्ण समाज ने बैठाया। और सबसे ज्यादा कोई रोएगा तो सवर्ण समाज ही रोएगा। बाकी सारे समाज रो चुके हैं।

क्या UGC लाने के लिए SC ST OBC समाज की ओर से किसी ने बीजेपी सरकार से निवेदन किया था ? क्या विपक्ष के किसी नेता ने या किसी विपक्षी दल ने UGC लाने के लिए सरकार पर दबाव बनाया था ?
उत्तर होगा नही
फिर बीजेपी सरकार UGC बिल क्यों लेकर आई ?

UGC बिल से अब तक मुझे बस एक ही बात समझ में आई है की पढ़ाई लिखाई करने वाले सभी वर्ग के बच्चों को आपस में कोर्ट कचहरी मुकदमे बाजी के चक्कर में ऐसा उलझा दो जिससे बच्चों की पढ़ाई लिखाई बन्द हो जाय। क्योंकि सभी वर्ग के बच्चे पढ़ लिखकर शिक्षित बन जाएंगे तो रोजगार की मांग करेंगे। फिर अंधभक्त बनकर पार्टी का झंडा कौन ढोएगा, दरी कौन बिछाएगा। पढ़ाई पीरियड में जब बच्चे कोर्ट कचहरी मुकदमे के चक्कर में उलझेंगे तो उनका जीवन बर्बाद होगा। जब किसी बच्चे का जीवन बर्बाद होगा तो जाहिर सी बात है वो अपराधी बनेगा। पढ़ाई लिखाई करने वाला बच्चा जब अपराधी बनेगा तो वो अपने संरक्षण के लिए किसी सांसद विधायक नेता मंत्री के पास जाकर सहायता मांगेगा। नेताओं को ऐसे ही युवाओं की तलाश रहती है जो उनके इशारे पर नाचता रहे।
बीजेपी के नेताओं को SC ST OBC सामान्य वर्ग के बच्चों की अगर इतनी ही चिन्ता है तो सभी वर्ग के बच्चों के लिए अलग अलग स्कूल कालेज बनवा दो UGC की जरूरत ही नही पड़ेगी। बच्चियों के लिए अलग गर्ल्स स्कूल कालेज बनवा दो जिसमें सिर्फ महिला टीचर ही पढाएं। बच्चियां भी सुरक्षित रहेंगी।

लेकिन नही ! पहले सरकारी स्कूल बन्द किए गए। दारू के ठेकों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी की गई। इतना करने के बाद भी जब बच्चों की पढ़ाई लिखाई नही रुकी तब ऐसा बिल लाया गया जिससे बच्चों की पढ़ाई लिखाई बन्द हो सके। फूट डालो राज करो वाली अंग्रेजी
नीति अपनाई जा रही है।

SC ST OBC समाज को अगर ए लगता है की बीजेपी सरकार ने UGC लाकर अमृत का घड़ा दे दिया है तो बहुत बड़ी भूल है। जो बीजेपी सरकार कोविसील्ड बनाने वाली कम्पनी से करोड़ों रुपया चंदा लेकर देश की जनता को जहरीली वैक्सीन लगवा सकती है, बीफ निर्यातक कम्पनियों से अरबों रुपया चंदा लेकर भारत को बीफ निर्यात में ऊंचाई के स्थान में दूसरे नम्बर पर पहुंचा सकती है फिर वो बीजेपी सरकार भला OBC SC ST समाज को अमृत का घड़ा कैसे दे देगी?
भंवर जब भी डुबोएगा उलारा देके मरेगा, बहुत शातिर कसाई है चारा देके मारेगा।

हम गाय को अपनी माता मानते हैं। गाय हमारी माता है और रहेगी। लेकिन हम अपनी गाय माता को और समस्त गौवंश को तभी सुरक्षित कर प...
03/06/2026

हम गाय को अपनी माता मानते हैं। गाय हमारी माता है और रहेगी। लेकिन हम अपनी गाय माता को और समस्त गौवंश को तभी सुरक्षित कर पाएंगे जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संवैधानिक अधिकार दिया जाएगा। हम हजारों वर्षों से गाय को अपनी माता मानते आ रहे हैं फिर भी हम उनको राक्षसों की क्रूरता से नहीं बचा पाए। राष्ट्रीय पशु घोषित करने से ही गौवंश सुरक्षित हो पाएंगे। गाय को राष्ट्र माता घोषित करने के साथ गाय माता को सुरक्षित और संरक्षित करने के लिए नियम कानून भी बनाना पड़ेगा। सवाल ए है की गाय माता के अलावा जो नर बच्चे (बछड़े) हैं उनको क्या कहकर सुरक्षित करेंगे।
जब समस्त गौवंश को राष्ट्रीय पशु घोषित कर दिया जाएगा तो सबसे पहले कोई भी व्यक्ति गौवंश को खरीद बिक्री नही कर पाएगा। गौहत्यारी सरकार गौवंश का मांस नही बेच पाएगी। गौहत्यारी सरकार को बीफ निर्यातक कम्पनियों से टेंपू भर भरकर चंदा नही मिलेगा। पशु तस्कर गौवंश की तस्करी नही कर पाएंगे क्योंकि जब किसी पशु पक्षी को राष्ट्रीय पशु पक्षी घोषित कर दिया जाता है तो उस पशु पक्षी के साथ क्रूरता करने वालों को जेल होती है। । कत्लखाने वाले किसी भी गौवंश को काटने से पहले हजार बार सोचेंगे। कालनेमी सरकार 14 साल के बाद भी किसी गौवंश की हत्या नही कर पाएगी। फिर कोई हरामी घर के अंदर गाय का मांस खाने के लिए नही कह पाएगा।

03/06/2026

इस दुनिया में बहुत बड़े बड़े महाक्रूर पापी कुकर्मी लोग भी रहते हैं। हमें सभी शाकाहारी पशु पक्षियों को पापी कुकर्मी हरामी दैत्य दानव शैतान निशाचर राक्षस पिसाच से बचाना है। बहुत जरूरी है। मनुष्य की तरह पशु पक्षियों को भी स्वतंत्रता पूर्वक जीने का अधिकार है।

01/06/2026

डेढ़ साल का वो मासूम शुरू में एक बार चीखा था 😥😥😥
लेकिन नर पिसाच दानव के मन में थोड़ी सी भी दया नही आई। जज साहब इस राक्षस को दुनिया की सबसे भयंकर सजा दी जाय। इस दानव को तड़पा तड़पा कर मार डालने की सजा दी जाय जज साहब

19/05/2026

क्या यह वीडियो माननीय सुप्रीम कोर्ट के हमारे न्यायाधीश के पास तक पहुंच सकता है ?

15/05/2026

इस दुनिया में कितने बड़े बड़े निर्दई लोग हैं इसका अंदाजा लगाना असंभव है। कभी कभी आंखों में आंसू भर जाते हैं

शुद्ध शाकाहारी  परम कुलीन  महा पराक्रमी  महायोद्धा  परम प्रतापी  वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी को कोटि कोटि प्रणाम करता ...
09/05/2026

शुद्ध शाकाहारी परम कुलीन महा पराक्रमी महायोद्धा परम प्रतापी वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जी को कोटि कोटि प्रणाम करता हूं 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

07/05/2026

गाय भैंस की और गाय भैंस के बच्चों की जितनी भी नृशंस हत्याएं हो रही हैं उसका सबसे बड़ा मूल कारण है मनुष्य का जीवन भर दूध पीने की सनक।
दूध पूर्ण रूप से शिशु आहार है,
दूध सिर्फ और सिर्फ बच्चों के लिए होता है। बड़ों के लिए नही । क्या किसी स्त्री के दूध से दही घी मक्खन चाय पनीर मिठाई बनाया जा सकता है ? क्या किसी स्त्री के दूध को बेचा जा सकता है ? क्या किसी स्त्री के दूध को पूजा करने के नाम पर व्यर्थ में बहाया जा सकता है ?
उत्तर होगा नहीं !
फिर क्यों किसी मां के दूध को छीनकर चाय दूध दही घी मक्खन पनीर बनाया जा रहा है।
फिर किसी मां का दूध क्यों बेचा जा रहा है।
किसी मां के दूध को पूजा करने के नाम पर व्यर्थ में क्यों बहाया जा रहा है।
गाय भैंस के बच्चों का दूध छीनना बन्द करो
लानत है हमारे मां के दूध पर यदि हम बड़े होने के बाद भी किसी बच्चे का दूध छीनकर पी रहे हैं।
हमें हमारी मां का दूध पीने से किसी ने नही रोका। फिर हम किसी बच्चे को उसकी मां का दूध पीने से रोकने वाले कौन होते हैं। गाय भैंस के नवजात बच्चे को रस्सी से इसलिए बांध दिया जाता है जिससे वो अपनी मां का दूध ना पी सके।
किसी भी मादा पशु का दूध उसके बच्चे के लिए होता है।
सभी से निवेदन है की दूध से बनी हुई मिठाई का परित्याग करें। पनीर का परित्याग करें। दूध से बने खाद्य पदार्थों का परित्याग करें।
दिमागी रूप से विकलांग लोग कुतर्क करते हैं की गाय भैंस का बच्चा अपनी मां का सारा दूध पी लेगा तो बीमार हो जाएगा।
उत्तर – यदि इन्सान के बच्चे को दिन भर सिर्फ दो बार सुबह को और साम को ही दूध पिलाया जाए तो बच्चा बीमार हो जाएगा। इसलिए माताएं अपने बच्चों को दिन भर में कई बार दूध पिलाती हैं। इसी प्रकार से गाय भैंस का बच्चा भी जब दिन भर में कई बार दूध पिएगा तो बीमार नही होगा।
स्वार्थी मनुष्य ने अधिक मात्रा में दूध उपजाने के लिए गाय भैंस की ब्रीडिंग करके उनके प्राकृतिक रूप के साथ छेड़छाड़ करके अन्याय किया है। जंगल में रहने वाली किसी भी गाय भैंस का बच्चा दूध पीने से कभी बीमार नही होता।
गाय भैंस के दूध का उपयोग जरूरत हो तभी करें, जैसे इन्सान के बच्चे को पिलाने की जरूरत हो तब पिलाएं। किसी बीमार व्यक्ति को आवश्यकता हो तब पिलाएं। जो लोग चाय के बिना नही जी सकते वो लेमन टी पीने की आदत डालें।

लोग दूध से बने खाद्य पदार्थ का सेवन नही करेंगे तो दूध की खपत कम होगी। व्यापारी लोग गाय भैंस का प्रजनन कम करवाएंगे। बेसहारा पशुओं की संख्या में कमी होगी। पशु क्रूरता पर नियन्त्रण पाने में आसानी होगी।
दूध बेचने के लिए गाय भैंस पालने वाले दूध निकाल कर उन्हें सड़कों पर छोड़ देते हैं। अधिकतर गाय भैंस कूड़ा कचड़ा खाती हुई दिखाई देती हैं।
स्वार्थी इन्सान ना जाने किस मुंह से गाय को माता कहता है। माता कहकर इनके बच्चों के हिस्से का दूध छीन लेता है। फिर इनके नर बच्चों को कतलखानें पहुंचा देता है। अन्त में बूढ़ी होने पर जब दूध देने की हिम्मत नही रह जाती तब या तो बेसहारा छोड़ देता है या कत्लखानों में पहुंचा देता है। माना की चाय नही छूट रही है बाकी सारे दूध के अन्य प्रोडक्ट तो छोड़ ही सकते हैं। चाय बनाने के लिए एक कप दूध में दो कप पानी मिलाएं, उसमें चीनी चायपत्ती लौंग इलाइची काली मिर्च डालें। थोड़ा सा अदरक डालकर अच्छी तरह से पकाएं।

आदि शंकराचार्य 🌹🙏🙏 (788-820 ईस्वी) भारत के महान दार्शनिक, संत और अद्वैत वेदांत के प्रचारक थे, जिन्होंने सनातन धर्म को पु...
21/04/2026

आदि शंकराचार्य 🌹🙏🙏 (788-820 ईस्वी) भारत के महान दार्शनिक, संत और अद्वैत वेदांत के प्रचारक थे, जिन्होंने सनातन धर्म को पुनर्जीवित किया। केरल में जन्में शंकराचार्य ने मात्र 8 वर्ष की आयु में संन्यास लिया, वेदों का अध्ययन किया और 32 वर्ष की अल्पायु में भारत के चारों कोनों (द्वारका, पुरी, श्रृंगेरी, बद्रीनाथ) में मठ स्थापित कर राष्ट्र को एकता के सूत्र में पिरोया।
Sanskriti IAS
Sanskriti IAS
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आदि शंकराचार्य का संक्षिप्त जीवन परिचय:
जन्म और स्थान: केरल के एर्नाकुलम जिले के कलाडी (Kalady) गांव में 788 ईस्वी में हुआ।
माता-पिता: पिता शिवगुरु और माता आर्याम्बा, जो भगवान शिव के भक्त थे।
बाल्यकाल: वे बचपन से ही विलक्षण बुद्धि के धनी थे, दो साल की उम्र में संस्कृत बोल सकते थे और 8 साल की उम्र तक सभी वेदों के ज्ञाता बन चुके थे।
संन्यास और गुरु: माता की आज्ञा से 8 साल की उम्र में संन्यास लेकर वे गुरु गोविंद भगवत्पाद की शरण में नर्मदा तट पर गए।
दर्शन (Philosophy): उन्होंने अद्वैत वेदांत (Non-dualism) का प्रचार किया, जिसका अर्थ है कि आत्मा और ब्रह्म (परमात्मा) एक ही हैं।
प्रमुख कार्य और योगदान:
चार मठों की स्थापना: देश में सांस्कृतिक एकता के लिए पूर्व में गोवर्धन मठ (पुरी), पश्चिम में शारदा मठ (द्वारका), दक्षिण में श्रृंगेरी मठ और उत्तर में ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ) की स्थापना की।
भाष्य रचना: उन्होंने उपनिषदों, भगवद गीता और ब्रह्मसूत्र पर भाष्य (टीका) लिखे।
प्रमुख ग्रंथ: 'विवेकचूड़ामणि', 'आत्मबोध', 'मनीषा पंचकम्', और 'भजगोविंदम' स्तोत्र की रचना की।
सुधार: पाखंडवाद और नास्तिकता का खंडन किया।
समाधि: उन्होंने 32 वर्ष की अल्पायु में उत्तराखंड के केदारनाथ/केदारतीर्थ में समाधि ली।

शंकराचार्य को भगवान शिव का अवतार माना जाता है और उन्होंने पूरे भारत में भ्रमण कर ज्ञान व भक्ति का अलख जगाया।

19/04/2026

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