Dr.Girish Pandey

Dr.Girish Pandey Ex.intern-Distt.Hospitsl Ayodhya
Pharmaceutical expert -Committed to better Health & quality care

 #दिवाली के दिन (ओल)  #सुरन की सब्जी खाना क्यों अनिवार्य है? तो मेरा मानना था की पहले के समय में सब्जियों के विकल्प बहुत...
21/10/2025

#दिवाली के दिन (ओल) #सुरन की सब्जी खाना क्यों अनिवार्य है? तो मेरा मानना था की पहले के समय में सब्जियों के विकल्प बहुत सीमित हुआ करते थे,और ऐसे मसाले वाली सब्जियां केवल त्योहारों के दिन या किसी खास दिन ही बनते थे, जैसे आज कल पूड़ी — कचोरी बनना आम बात है, और पनीर वगेरह के विकल्प पहले नही हुआ करते थे। इसलिए हो सकता है की ऐसा बनाया गया होगा।

लेकिन बड़े लोगो से पूछने पे पता चला की पहले के समय में जो चीज़े बनाई गई थी उसके पीछे कारण हुआ करते थे। समस्या बस यह है की हमे चीज़े करने के लिए कहा जाता है लेकिन उसके कारण नही बताए जाते, इसके वजह से हम ऐसी चीजों को अंध श्रद्धा के साथ जोड़ देते है।

तो मित्रों अब जानते हैं दिवाली के दिन सूरन की सब्जी खाने व खिलाने के मुख्य कारण - दरअसल सूरन को अपने देश में कई नामो से जाना जाता है, जैसे सूरन,जिमीकन्द (कहीं कहीं ओल) और कांद भी बोलते हैं, आजकल तो बाजार में हाईब्रीड सूरन आ गया है,, कभी-कभी देशी वाला सूरन भी मिल जाता है , दीपावली के 3-4 दिन पहले से ही बाजार में हर सब्जी वाला (खास कर के उत्तर भारत में) सूरन जरूर रखता है,और मजे की बात है कि इसकी लाइफ भी बहुत होती है।

सब्जियो में सूरन ही एक ऐसी सब्जी है जिसमें फास्फोरस अत्यधिक मात्रा में पाया जाता है, और अब तो मेडिकल साइंस ने भी मान लिया है कि इस एक दिन यदि हम देशी सूरन की सब्जी खा ले तो स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में महीनों फास्फोरस की कमी नही होगी,,

यह बवासीर से लेकर कैंसर जैसी भयंकर बीमारियों से बचाए रखता है। इसमें फाइबर, विटामिन सी, विटामिन बी6, विटामिन बी1 और फोलिक एसिड होता है,साथ ही इसमें पोटेशियम, आयरन, मैग्नीशियम और कैल्शियम भी पाया जाता है ।

मुझे नही पता कि ये परंपरा कब से चल रही है लेकिन सोचीए तो सही कि हमारे लोक मान्यताओं में भी वैज्ञानिकता छुपी हुई होती थी।

धन्य हों हमारे पूर्वज जिन्होंने विज्ञान को हमारी परम्पराओं, रीतियों और संस्कारों में पिरो दिया🙏🙏🙏🙏
#झगड़ते #घुटने #अजगर #दिवाली

      मानव शरीर का सबसे अद्भुत और जटिल अंगों में से एक है — स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु)।यह मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सो...
21/10/2025

मानव शरीर का सबसे अद्भुत और जटिल अंगों में से एक है — स्पाइनल कॉर्ड (मेरुरज्जु)।
यह मस्तिष्क और शरीर के बाकी हिस्सों के बीच संपर्क सूत्र का काम करता है।
सरल शब्दों में कहें तो, स्पाइनल कॉर्ड हमारे शरीर का ‘डेटा केबल’ है, जो हर आदेश और प्रतिक्रिया को जोड़ता है — चाहे हाथ हिलाना हो, दर्द महसूस करना हो या चलना-फिरना।

स्पाइनल कॉर्ड ब्रेन स्टेम से शुरू होकर रीढ़ की हड्डियों (Vertebral Column) के अंदर एक लंबी नली की तरह फैली होती है, जो लगभग 45 सेमी लंबी (पुरुषों में) और 43 सेमी (महिलाओं में) होती है।

🦴 स्थिति (Position of Spinal Cord)

स्पाइनल कॉर्ड रीढ़ की हड्डियों (Spine) के भीतर एक सुरक्षात्मक नलिका में स्थित होती है।
रीढ़ की हड्डी में 33 कशेरुकाएँ (Vertebrae) होती हैं — Cervical (गर्दन), Thoracic (पीठ), Lumbar (कमर), Sacral और Coccygeal भागों में विभाजित।
स्पाइनल कॉर्ड को Cerebrospinal Fluid (CSF) घेरे रहता है, जो इसे चोटों और झटकों से बचाता है।

⚙️ कैसे काम करता है स्पाइनल कॉर्ड? (How It Works)

स्पाइनल कॉर्ड शरीर का नर्व ट्रांसमिशन हब है। यह दो तरह के संकेत भेजता है —

1️⃣ Afferent Nerves (Sensor Signals):
शरीर के अंगों से महसूस होने वाली जानकारी (जैसे दर्द, गर्मी, ठंड) मस्तिष्क तक पहुँचाना।

2️⃣ Efferent Nerves (Motor Signals):
मस्तिष्क से मिले आदेशों को अंगों तक पहुँचाना — जैसे हाथ हिलाना, पैर चलाना आदि।

👉 यानी जब आप किसी गर्म वस्तु को छूते हैं, तो स्पाइनल कॉर्ड तुरंत सिग्नल भेजकर हाथ हटाने का आदेश देता है, इससे पहले कि मस्तिष्क सोचे — यही “Reflex Action” है।

💎 स्पाइनल कॉर्ड का महत्त्व (Importance of Spinal Cord)

1️⃣ मस्तिष्क और शरीर का पुल:
यह दोनों के बीच संचार सुनिश्चित करता है।
स्पाइनल कॉर्ड के बिना शरीर मस्तिष्क के आदेशों को समझ ही नहीं पाएगा।

2️⃣ रिफ्लेक्स सेंटर:
यह शरीर की त्वरित प्रतिक्रिया का केंद्र है — जिससे दुर्घटनाओं से बचाव होता है।

3️⃣ मूवमेंट और बैलेंस का नियंत्रण:
स्पाइनल कॉर्ड ही मांसपेशियों और हड्डियों की हर गति को नियंत्रित करता है।

4️⃣ संवेदनशीलता (Sensation):
छूने, दर्द, दबाव या तापमान की हर अनुभूति स्पाइनल कॉर्ड के माध्यम से मस्तिष्क तक पहुँचती है।

5️⃣ जीवन रक्षा में भूमिका:
यदि यह क्षतिग्रस्त हो जाए, तो व्यक्ति चल-फिर नहीं सकता, और कई बार सांस लेने तक में कठिनाई हो सकती है।

⚠️ स्पाइनल कॉर्ड से जुड़ी प्रमुख बीमारियाँ (Common Spinal Cord Diseases)
🩸 1️⃣ Spinal Cord Injury (मेरुरज्जु चोट):

दुर्घटनाओं, गिरने या खेल के दौरान चोट लगने से होती है।
👉 लक्षण: चलने-फिरने में कठिनाई, सुन्नपन, लकवा।

🦠 2️⃣ Myelitis (मेरुरज्जु शोथ):

वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण से स्पाइनल कॉर्ड में सूजन हो जाती है।

💥 3️⃣ Slipped Disc / Compression:

कशेरुकाओं के बीच की हड्डियों का दबाव बढ़ने से नर्व्स पर असर पड़ता है, जिससे पीठ या पैरों में दर्द होता है।

🧬 4️⃣ Multiple Sclerosis (MS):

यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर की रोग प्रतिरोधक प्रणाली खुद स्पाइनल कॉर्ड की नर्व्स को नुकसान पहुँचाती है।

🏠 स्पाइनल कॉर्ड को स्वस्थ रखने के घरेलू और आयुर्वेदिक उपाय (Home Remedies & Ayurvedic Tips)
🌿 1️⃣ अश्वगंधा और शतावरी:

ये दोनों औषधियाँ नसों को मजबूती देती हैं और तनाव कम करती हैं।

रोज़ाना 1 चम्मच दूध के साथ लें।

🧘‍♀️ 2️⃣ योगासन:

भुजंगासन, मकरासन, शलभासन और ताड़ासन स्पाइनल फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ाते हैं।

सूर्य नमस्कार रीढ़ की हड्डी के लिए सर्वोत्तम व्यायाम है।

🧴 3️⃣ तेल मालिश (Abhyanga):

नारायण तेल, महास्नेह तेल या कुंजल तेल से रोज़ाना पीठ की हल्की मालिश करें।

यह नर्व्स में रक्त प्रवाह सुधारता है।

🥦 4️⃣ आहार सुधार:

विटामिन B12, D, कैल्शियम और मैग्नीशियम युक्त भोजन लें — जैसे दूध, अंडा, बादाम, पालक, तिल।

पर्याप्त जल सेवन करें।

🚶‍♂️ 5️⃣ सही मुद्रा रखें:

झुककर बैठने की आदत छोड़ें।

लंबे समय तक मोबाइल या लैपटॉप एक ही स्थिति में न देखें।

🌸 स्पाइनल कॉर्ड से जुड़े दुर्लभ लेकिन सत्य तथ्य (Rare but True Facts):

1️⃣ स्पाइनल कॉर्ड की लंबाई बढ़ना जन्म के बाद बंद हो जाती है — लेकिन रीढ़ की हड्डियाँ बढ़ती रहती हैं।
2️⃣ मनुष्य में लगभग 31 जोड़ी स्पाइनल नर्व्स होती हैं, जो शरीर के हर हिस्से को नियंत्रित करती हैं।
3️⃣ स्पाइनल कॉर्ड खुद निर्णय लेने की क्षमता रखता है — जिसे “Reflex Arc” कहते हैं।
4️⃣ रात में खराब नींद या तनाव स्पाइनल फ्लूइड के प्रवाह को बाधित करता है, जिससे पीठ दर्द और मानसिक थकान बढ़ती है।
5️⃣ योग में “सुषुम्ना नाड़ी” का संबंध स्पाइनल कॉर्ड से माना गया है — जो ऊर्जा और चैतन्य का केंद्र है।

💡 निष्कर्ष:

स्पाइनल कॉर्ड सिर्फ हड्डियों के बीच की नस नहीं, बल्कि जीवन का नियंत्रण केंद्र है।
इसे स्वस्थ रखना मतलब शरीर, मन और जीवन को संतुलित रखना।
सही मुद्रा, योग, पौष्टिक आहार और मानसिक शांति — यही हैं इसके चार रक्षक।

🌿 #हैशटैग्स

#स्वस्थरीढ़ #आयुर्वेदिकउपचार

  शतावरी औषधि एक गुण अनेकहिमलाय में 4 से 9 हजार फीट की ऊँचाई तक मिलती है, जिसे एस्पेरेगस फिलिसिनस नाम से जाना जाता है।[1...
21/10/2025


शतावरी औषधि एक गुण अनेक
हिमलाय में 4 से 9 हजार फीट की ऊँचाई तक मिलती है, जिसे एस्पेरेगस फिलिसिनस नाम से जाना जाता है।[1]

यह 1 से 2 मीटर तक लंबी बेल होती है जो हर तरह के जंगलों और मैदानी इलाकों में पाई जाती है। आयुर्वेद में इसे ‘औषधियों की रानी’ माना जाता है। इसकी गांठ या कंद का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें जो महत्वपूर्ण रासायनिक घटक पाए जाते हैं वे हैं ऐस्मेरेगेमीन ए नामक पॉलिसाइक्लिक एल्कालॉइड, स्टेराइडल सैपोनिन, शैटेवैरोसाइड ए, शैटेवैरोसाइड बी, फिलियास्पैरोसाइड सी और आइसोफ्लेवोंस। सतावर का इस्तेमाल दर्द कम करने, महिलाओं में स्तन्य (दूध) की मात्रा बढ़ाने, मूत्र विसर्जनं के समय होने वाली जलन को कम करने और कामोत्तेजक के रूप में किया जाता है। इसकी जड़ तंत्रिका प्रणाली और पाचन तंत्र की बीमारियों के इलाज, ट्यूमर, गले के संक्रमण, ब्रोंकाइटिस और कमजोरी में फायदेमंद होती है। यह पौधा कम भूख लगने व अनिद्रा की बीमारी में भी फायदेमंद है। अतिसक्रिय बच्चों और ऐसे लोगों को जिनका वजन कम है, उन्हें भी ऐस्पैरेगस से फायदा होता है। इसे महिलाओं के लिए एक बढ़िया टॉनिक माना जाता है। इसका इस्तेमाल कामोत्तेजना की कमी और पुरुषों व महिलाओं में बांझपन को दूर करने और रजोनिवृत्ति के लक्षणों के इलाज में भी होता है।

इसका उपयोग सिद्धा तथा होम्योपैथिक दवाइयों में होता है। यह आकलन किया गया है कि भारत में विभिन्न औषधियों को बनाने के लिए प्रति वर्ष 500 टन सतावर की जड़ों की जरूरत पड़ती है। यह यूरोप एवं पश्चिमी एशिया का देशज है। इसकी खेती २००० वर्ष से भी पहले से की जाती रही है। भारत के ठण्डे प्रदेशों में इसकी खेती की जाती है। इसकी कंदिल जडें मधुर तथा रसयुक्त होती हैं। यह पादप बहुवर्षी होता है। इसकी जो शाखाएँ निकलतीं हैं वे बाद में पत्तियों का रूप धारण कर लेतीं हैं, इन्हें क्लैडोड (cladodes) कहते हैं।

औषधीय उपयोग

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इसका उपयोग स्त्री रोगों जैसे प्रसव के उपरान्त दूध का न आना, बांझपन, गर्भपात आदि में किया जाता है। यह जोडों के दर्द एवं मिर्गी में भी लाभप्रद होता है। इसका उपयोग प्रतिरोधात्मक शक्ति बढाने के लिए भी किया जाता है। शतावर जंगल में स्वतः उत्पन्न होती है। चूंकि इसका औषधीय महत्व भी है अतः अब इसका व्यावसायिक उत्पादन भी है। इसकी लतादार झाडी की पत्तियां पतली और सुई के समान होती है। इसका फल

📱 नया खतरा: ईयरफोन और ईयरबड्स से बढ़ रही कान की समस्या!लंबे समय तक ईयरबड्स का इस्तेमाल आपके कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा...
21/10/2025

📱 नया खतरा: ईयरफोन और ईयरबड्स से बढ़ रही कान की समस्या!
लंबे समय तक ईयरबड्स का इस्तेमाल आपके कानों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है — जैसे कान लॉक, जबड़ा ब्लॉक और सुनने की क्षमता में कमी।
ध्यान रखें: आराम के बीच कानों को भी आराम चाहिए! 🎧🚫

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21/10/2025

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