13/05/2026
बैंक में पड़ा पैसा अब लोगों को सुरक्षा नहीं, बल्कि बिल्ली की निगरानी में दूध रखने जैसा महसूस होने लगा है।
इसीलिए भारत में अचानक नकदी निकालने की गति तेज हो गई है।
RBI और SBI के आँकड़े बता रहे हैं कि केवल अप्रैल 2026 के पहले 15 दिनों में ही करीब ₹61,000 करोड़ रुपये बैंकों से निकाल लिए गए।
करेंसी सर्कुलेशन ₹42 लाख करोड़ से भी ऊपर पहुँच चुका है, जो नोटबंदी के बाद का सबसे बड़ा स्तर माना जा रहा है।
कारण केवल आर्थिक नहीं, मानसिक भी हैं।
जब व्यापारियों को UPI और डिजिटल लेन-देन के आधार पर टैक्स नोटिस मिलने लगें, तब लोगों को यह एहसास होने लगता है कि सुविधा के नाम पर हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है।
दक्षिण भारत के कई व्यापारियों ने इसी कारण फिर से कैश लेन-देन को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।
दूसरी ओर, बैंक ब्याज लगातार गिर रहा है।
लोगों को लगने लगा है कि बैंक में पैसा रखने से न लाभ है, ना गोपनीयता और ना स्वतंत्रता।
इसलिए बहुत से लोग अब “डिजिटल नंबर” की जगह “हाथ में नकदी” को अधिक सुरक्षित मानने लगे हैं।
चुनावों के समय बढ़ती कैश डिमांड भी इस बदलाव को और तेज कर रही है।
यह केवल आर्थिक बदलाव नहीं है, यह लोगों के मन में बढ़ते अविश्वास का संकेत है।
जिस व्यवस्था पर भरोसा कम होने लगे, वहाँ लोग सबसे पहले अपना धन अपने नियंत्रण में लेना शुरू करते हैं।