08/10/2025
किस्मत का खेल
एक बन्जारा था ....जो मुल्तानी मिट्टी का व्यापार करता था
राजस्थान से अपने 2 बैलों पर मिट्टी लाकर के दिल्ली मे बेचता था...
एक बार वो अपने दोनों बैलों की पीठ पर दोनों तरफ मिट्टी लाध के अपने एक नौकर के साथ दिल्ली जा रहा था ...
आधी मिट्टी रास्ते मे ही बिक गई और दोनों बैलों के एक तरफ के बोरे खाली हो गए , जिसके कारण एक तरफ भार ज्यादा हो गया और बोरें फिसलने लगे ...
नौकर ने पूछा :- " मालिक , एक तरफ के बोरें अब गिर रहे है क्या करे ..."
मालिक ने कहा :- " यहाँ राजस्थान मे बहुत रेत है , एक तरफ के बोरे मे वही भर दे , सन्तुलन हो जाएगा ..."
नौकर ने तुरंत बोरों मे रेत भर दिए और वो आगे दिल्ली के चल दिए ...
तभी वहाँ से एक और व्यापारी निकल रहा था , उसने रेत के बोरें देख कर पूछा ...यह रेत क्यों लाध रखी है , रेत कोई नहीं खरीदता ...
बन्जारा बोला संतुलन के लिए है ...
तो दूसरा व्यापारी हँसने लगा और बोला...
" यह क्या नासमझी है .. एक बैल की पीठ से बोरे हटा के दूसरे बैल की पीठ पर रख दो ....संतुलन भी हो जाएगा और एक बैल भार मुक्त भी हो जाएगा ..."
बन्जारे ने व्यापारी से पूछा ?? :- " आप कहाँ जा रहे है ???"
वो बोला ... :- " मैं दिल्ली व्यापार करने गया था , बीमार हो गया , इलाज मे सारा मुनाफा चला गया , घाटा हो गया , अब घर जा रहा हूँ..."
बन्जारे ने कहा :- " ठीक है , पर हम तो ऐसे ही रेत लाध कर ही जाऊँगा ..."
और वो दिल्ली की ओर निकल पड़ा..
नौकर ने पूछा :- " मालिक आपने उसकी बात क्यों नहीं मानी .."
मालिक बोला :- " बात तो उसने बुद्धिमानी की ही कही थी , वो बुद्धिमान था पर फिर भी घाटे मे था , यानि उस पर भगवान की कृपा नहीं है , बुद्धि तो अच्छी उसकी चलती है पर अच्छे नतीजे नहीं मिलते ...
हम बुद्धिमान तो नहीं है , पर कभी घाटे मे नहीं रहे , यानी हम पर ईश्वर की कृपा है | बुद्धि हमारी कैसी भी चलती हो , नतीजे अच्छे मिलते है , इसलिए उसकी बुद्धि से नहीं चलेगे , अपनी बुद्धि से ही चलेंगे ..."
दिल्ली पहुँचा उसकी पूरी मुल्तानी मिट्टी बिक गई ,
कुछ लोग चरम रोग के इलाज के लिए राजस्थान की रेत खोज रहे थे , तो उसकी रेत भी अच्छे भाव मे बिक गई ...
मालिक ने नौकर से कहा :- " देखा ??? मुफ़्त के पैसे रेत से मिल गए ...खाली बैल लाते तो भी क्या ही फायदा होता...
एक खाली बैल से भरा हुआ बैल हमेशा ज्यादा अच्छा होता है..बहुत बार जो हमारे लिए मिट्टी होती है...दूसरों के लिए वो सोना होती है..उधर बहुत रेत थी..इसलिए उसकी ज्यादा वैल्यू नहीं थी..पर जहाँ जो चीज नहीं होती है या कम होती है... वहाँ उसकी कीमत बढ़ जाती है...
जो उन्नति कर लेते है उनका विवेक विकसित हो जाता है ...जिसके नतीजे अच्छे है उसी का अनुसरण करो...और कर्म जरूर करो़ फल की चिन्ता मत करों... ✍️ विनोद