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11/09/2026
19/08/2026

Ye kya ho raha hai bhai

19/08/2026

Sahi hai bahi

09/08/2026

अतीक अहमद के बेटे के इंतकाल में शामिल हुए तीनों बेटे

कहते हैं, बाप के जाने के बाद बड़ा भाई ही छोटे भाइयों के लिए बाप का साया बन जाता है… आज उमर ने इस बात को सिर्फ़ कहा नहीं,...
09/08/2026

कहते हैं, बाप के जाने के बाद बड़ा भाई ही छोटे भाइयों के लिए बाप का साया बन जाता है…

आज उमर ने इस बात को सिर्फ़ कहा नहीं, बल्कि अपनी आँखों के सामने सच कर दिखाया।

कई साल बाद अपने भाइयों के बीच पहुँचे… लेकिन ये मुलाक़ात कैसी थी—एक भाई सामने था, मगर ज़िंदगी की नहीं, आख़िरी सफ़र की ख़बर लेकर।

अपने सीने में भाई को खोने का दर्द दबाए, खुद टूटे हुए होकर भी दोनों भाइयों को संभालते रहे, उन्हें हौसला देते रहे।

और फिर जिस भाई को कुछ वक़्त पहले तक गले लगाने की उम्मीद थी, उसी लख़्त-ए-जिगर की नमाज़-ए-जनाज़ा ख़ुद पढ़ानी पड़ी।

उफ़्फ़… एक भाई के लिए इससे बड़ा इम्तिहान और क्या होगा।
जिस उम्र में भाई का हाथ थामकर उसे आगे बढ़ाना था, उसी भाई को अपने हाथों से आख़िरी सफ़र पर रवाना करना पड़ा।

उमर भाई, अल्लाह आपके दिल का हाल जानता है।
आपके सब्र को सलाम है। अल्लाह आपके हर दर्द को आसान करे, आपकी तमाम परेशानियाँ दूर फ़रमाए और अबान को जन्नत-उल-फ़िरदौस में आला मक़ाम अता फ़रमाए।

अल्लाह तीनों भाइयों को एक-दूसरे का सहारा बनाए रखे और इस परिवार को इस सदमे से उबरने की ताक़त दे।

आमीन या रब्बुल आलमीन।

कहते हैं 'सपनों को हकीकत में बदलने के लिए संसाधनों का अंबार नहीं, बल्कि सही दिशा और खुद पर विश्वास जरूरी होता है।' नोएडा...
29/07/2026

कहते हैं 'सपनों को हकीकत में बदलने के लिए संसाधनों का अंबार नहीं, बल्कि सही दिशा और खुद पर विश्वास जरूरी होता है।' नोएडा की रहने वाली करिश्मा चौहनी इसका बेहतरीन उदाहरण है। जिन्होंने उत्तर प्रदेश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षाओं में से एक UP PCS क्रैक साबित कर दिया कि जब हौसले बुलंद हों, तो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसी नए जमाने की तकनीक भी सफलता का रास्ता आसान बना देती हैं।

उन्होंने बताया कि मेन्स एग्जाम की तैयारी के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल किया था। जनरल स्टडी पेपर 1 से 4 तक चैटजीपीटी का स्मार्ट तरीके से यूज किया। उन्होंने ऐसे ही 20 से 30 निबंध तैयार किए थे, जिनमें से तीन निबंध हूबहू परीक्षा में आ गए थे। यूपी पीसीएस 2024, करिश्मा चौहान का दूसरा अटेम्प्ट था। इस बार उन्होंने न सिर्फ एग्जाम क्वालिफाई किया, बल्कि 17वीं रैंक लाकर टॉप 20 में जगह बनाई थी।

21/07/2026

दिल्ली संसद मार्च के दौरान का नया वीडियो

बिहार के मुजफ्फरपुर में दरोगा मुस्तकीम खान के खिलाफ़ SP ने इसलिए जांच बिठाई क्योंकि मुस्तकीम ने मुहर्रम ताज़िया के दौरान...
28/06/2026

बिहार के मुजफ्फरपुर में दरोगा मुस्तकीम खान के खिलाफ़ SP ने इसलिए जांच बिठाई क्योंकि मुस्तकीम ने मुहर्रम ताज़िया के दौरान करतब दिखाया अपना हुनर दिखाया, अब मुस्तकीम खान को लाइन हाजिर कर दिया गया है।

मैंने जो अन्य तस्वीरें पोस्ट की है उन्हें गौर से देखने की ज़रूरत नहीं क्योंकि ये तस्वीरें हर व्यक्ति की आंखों और यादों में हैं कि कैसे संभल का तत्कालीन CO अनुज चौधरी हाथ में गदा लेकर एक किष्किंधा रथयात्रा में गदा लेकर चल रहा था, तीसरी तस्वीर भी याद है कि कैसे अमरोहा के SP और पुलिसकर्मी कावड़ियों के न सिर्फ़ पैर दबा रहे थे बल्कि उनके पैरों की मालिश भी कर रहे थे, याद हैं वो तस्वीर भी जिसमें बड़े अधिकारी हेलिकॉप्टर में सवार होकर कैसे कावड़ियों पर फूल बरसा रहे थे, इन अधिकारियों के खिलाफ़ कार्रवाई तो छोड़े जांच तक नहीं हुई थी।

बुलडोज़र और एनकाउंटर नीति की परीक्षाउत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के खेकड़ा के रहने वाले पंकज धामा दिल्ली मेट्रो में गार्ड ...
26/06/2026

बुलडोज़र और एनकाउंटर नीति की परीक्षा

उत्तर प्रदेश के बागपत जनपद के खेकड़ा के रहने वाले पंकज धामा दिल्ली मेट्रो में गार्ड की नौकरी करते थे। बीते रोज़ भी वो अपनी ड्यूटी समाप्त करके अपने घर लौट रहे थे। शाहदरा रेलवे स्टेशन पर योगा एक्सप्रेस आई तो पंकज ने उसमें बैठने की कोशिश की, इसी कोशिश के दौरान उनकी ट्रेन में मौजूद सहयात्रियों से कहा सुनी हो गई। चंद मिनट में ही मारपीट शुरू हो गई। पंकज को सहयात्रियों ने बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया। वहां मौजूद किसी भी यात्री ने पंकज को बचाने या बीच-बचाव करने की कोशिश तक नहीं की, सब तमाशबीन बने रहे। पंकज काफी देर तक वहीं तड़पते रहे। जब तक उन्हें अस्पताल ले जाया जाता, तब तक देर हो चुकी थी, ज़िंदगी ने पंकज का साथ छोड़ दिया था।

अब दिल्ली पुलिस ने पंकज की हत्या में शामिल रोहित, सागर हर्षित, निशांत, जीवन, प्रिंस, आकाश और रोहित को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तारी तो हो चुकी है, अब सवाल पंकज को न्याय का है। क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में न्याय की बुलडोज़र नीति अमल में लाई गई है। दिल्ली का तरुण हत्याकांड हो, ग़ाज़ियाबाद का सूर्या हत्याकांड हो या फिर देहरादून का विनोद कश्यप हत्याकांड। ये वो हत्याकांड हैं जिसमें सरकार ने त्वरित कर्रावाई करते हुए आरोपितों के घरों को बुलडोज़र चलाकर ध्वस्त किया है। और एक कड़वी सच्चाई यह भी है कि बुलडोज़र की यह ‘न्याय नीति’ सिर्फ उन्हीं मामलों में ‘न्याय’ कर पाई है, जिसमें आरोपी ‘दूसरे’ समुदाय के थे। इसके अलावा जिन ‘सनातनियों’ की हत्या के आरोपी ‘दूसरे’ नहीं थे, उसमें ‘न्याय’ का बुलडोज़र एक इंच भी नहीं खिसक पाया। ग़ाज़ियाबाद में चिराग़ त्यागी के पिता अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए सरकार से मांग करते रह गए, कि उनके बेटे के हत्यारों का एनकाउंटर हो, उनके घरों पर बुलडोज़र चले! लेकिन किसी ने भी उनकी इस मांग को नहीं सुना। उत्तराखंड में केतन के घर वाले भी यही मांग करते रह गए, लेकिन सरकार और पुलिस ने बुलडोज़र चलाने या आरोपितों का एनकाउंटर करने की हिम्मत ही नहीं जुटाई।

यहां से सवाल उठता है कि पंकज धामा को इंसाफ मिलेगा या नहीं? इसका सीधा सा जवाब है कि यदि पंकज को मारने वालो में ‘दूसरे’ लोग शामिल होते तो अब तक पुलिस और सरकार पंकज की हत्या का बदला लेकर उसे ‘इंसाफ’ देने की घोषणा कर चुकी होती। लेकिन आरोपी ‘दूसरे’ नहीं हैं, इसलिए खामोशी है, सन्नाटा है। कोई हिन्दुवादी संगठन खेकड़ा स्थित पंकज के घर सांत्वना देने नहीं जाएगा, इसकी भी उम्मीद कम ही है। हाँ! अगर आरोपी ‘दूसरे’ होते तो अब तक बवाल मच चुका होता, हिन्दुवादी संगठनों के अराजक तत्व पंकज धामा को न्याय दिलाने के नाम पर ‘दूसरे’ समुदाय के खिलाफ घृणा, कुंठा, सांप्रदायिकता का नंगा नाच कर रहे होते। कोई जनसंहार का आह्वान कर रहा होता, तो कोई बहिष्कार का आह्वान कर रहा होता। लेकिन अब! अब सब खामोश हैं। क्यों? क्या पंकज सनातनी नहीं थे? क्या वो हिंदू नहीं थे? क्या उनकी लिंचिंग नहीं हुई है? क्या वो इंसाफ के हक़दार नहीं हैं? क्या हिन्दुवादी संगठनों के ये लोग ऐसे लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए प्रतिबद्ध नहीं हैं, जिन्हें ‘दूसरों’ ने नही मारा?

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