05/07/2026
नज़रिया
चढ़ावा चोरी, आस्था और संघ
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का भांडा फूट जाने से हिंदू समाज की आस्था को गहरी ठेस पहुंची है। देश का हिंदू समाज चढ़ावा चोरों की असलियत जानना और उन्हें सलाखों के पीछे देखना चाहता है। हिंदू समाज ने चोरी के विरोध में ना तो सड़कों पर उतरकर अब तक कोई धरना-प्रदर्शन किया है और ना ही मंदिरों में चढ़ावा ना चढ़ाने जैसी कोई देशव्यापी मुहिम शुरू की है। यानी आस्था पुख्ता और अटूट है। हिंदू समाज ने जून, 2023 में केदारनाथ धाम के गर्भ गृह से सोना चोरी के आरोपों पर भी कोई तीखी प्रतिक्रिया नहीं जतायी थी। सबरीमाला मंदिर के सोना चोरी के आरोपों पर भी समाज पूरी तरह शांत रहा। यहां तक कि सितंबर, 2024 में प्रसिद्ध तिरुपति मंदिर के प्रसाद में गाय और अन्य पशुओं की चर्बी से बने घी का प्रयोग किये जाने की घटना सामने आने के बाद भी हिंदू समाज आंदोलित व उत्तेजित नहीं हुआ था। जबकि करोड़ों शाकाहारी हिंदुओं की आस्था और दीन-ईमान पर ये सीधा हमला था। अब राम मंदिर के चढ़ावा चोरी की घटना को भी कुछ राजनीतिक और मंदिर से सीधे जुड़े रहे चंद लोगों को छोड़ दें, तो संपूर्ण हिंदू समाज बड़े कौतुक के साथ जांच, गिरफ्तारी और बचाव के इस खेल को देख रहा है।
राममंदिर से चढ़ावा चोरी के आरोप पहली बार सार्वजनिक रूप से उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सात जून को मीडिया में लगाये थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ ने तत्काल एसआईटी बनाकर जांच शुरू करवा दी। और धीरे-धीरे निचले दर्जें के कर्मचारियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय तथा ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद नये-नये गड़बड़झाले सामने आते गये और जांच का दायरा बढ़ता चला गया। इस बीच आरएसएस जो कि अराजनीतिक और अपंजीकृत संस्था है तथा खुद को देश के हिंदुओं की सबसे बड़ी खैरख्वाह मानती है, साथ ही हिंदुत्व के नाम पर सत्ता पर काबिज केंद्र सरकार तक इस मामले में पूरी तरह मौन साधे हुए थे। यहां तक कि साधु समाज भी पूरे मामले पर पर्दादारी रखने के लिए शांति बनाए हुए हैं। करीब पच्चीस दिन बाद आरएसएस के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबले ने शुक्रवार को एक्स पर कहा, "इस घटना से हम सभी बहुत दुखी और आक्रोशित हैं।" राममंदिर चढ़ावा चोरी के मामले को लेकर आरएसएस की ओर से ये पहली प्रतिक्रिया सामने आयी है। होसबले ने कहा कि हिन्दू विरोधी और राष्ट्र विरोधी ताकतें इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का फायदा उठाकर कर हिंदू धर्म को बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने हिंदू समाज को धैर्य रखकर अपने खिलाफ हो रही साजिशों को विफल करने की अपील भी की।
विचारणीय विषय ये है कि आखिर चढ़ावा चोरी की घटना उजागर होने के पच्चीस दिन बाद संघ को हिंदू समाज से धैर्य रखने की अपील क्यों करनी पड़ रही है। इसके तीन मुख्य कारण हो सकते हैं। पहला ये कि चढ़ावा चोरी का मामला बहुत बड़ा हो सकता है। एसआईटी जांच के बढ़ते दायरे में चंपतराय और डॉ. अनिल मिश्रा के अलावा और भी महत्वपूर्ण व प्रभावशाली लोग आ सकते हैं! दूसरे ये कि लोगों की आस्था को गहरी ठेस लगने से संघ और बीजेपी की साख को तगड़ा झटका लग सकता है। तीसरी बड़ी वजह विपक्षी पार्टियां चढ़ावा चोरी के भावनात्मक मुद्दे को भुनाने की कोशिश कर सकती हैं। उक्त तीनों ही संभावनाओं से इंकार नहीं किया जा सकता। अपने बयान में सरकार्यवाह होसबले बीजेपी और संघ विरोधियों को हिंदू विरोधी और राष्ट्र विरोधी भी करार देने से नहीं चूके। जबकि वास्तविकता ये है कि ना तो अधिकतर विपक्षी दल हिंदू विरोधी हैं और ना ही राष्ट्र विरोधी। राममंदिर का चढ़ावा चोरी की जांच और दोषियों के लिए कड़ी सजा की मांग करना किसी भी तरह राष्ट्र विरोधी और हिंदू विरोधी नहीं हो सकती है। जाहिर है संघ और उससे जुड़े संगठनों के लोग ही 'श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट' के ट्रस्टी हैं और वहां काम करने वाले लोग भी इन्हीं संगठनों के कारिंदे हैं। चोरी के आरोप में पकड़े गये सभी लोग ट्रस्टीज के नजदीकी हैं। सही बात तो ये है कि ट्रस्ट के कर्ताधर्ता अपनी जिम्मेदारी निभाने में पूरी तरह विफल रहे हैं और ये देश के तमाम हिंदुओं के साथ विश्वासघात है। जरूरत ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को दोषरहित और पारदर्शी बनाने की है, ताकि लोगों का विश्वास बहाल हो सके।।