Experiment nd it's result in primary school

Experiment nd it's result in primary school basic education
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Right??
27/09/2026

Right??

फेसबुक पर एक पोस्ट पढ़ी सच में ऐसा ही होना चाहिए 👇साहब… मारपीट की शिकायत बाद में लिख लेना… पहले मेरे बच्चों के लिए कुछ ख...
27/09/2026

फेसबुक पर एक पोस्ट पढ़ी सच में ऐसा ही होना चाहिए 👇

साहब… मारपीट की शिकायत बाद में लिख लेना… पहले मेरे बच्चों के लिए कुछ खाने का इंतजाम करवा दो… तीन दिन से चूल्हा नहीं जला है! 💔

ये बात अगर किसी थाने में सुनाई दे और सामने बैठा इंसान सिर्फ कानून की किताब देखता रहे, तो शायद शिकायत लिखकर मामला खत्म हो जाए।

लेकिन प्रतापगढ़ के दरोगा लक्ष्मीकांत सेंगर ने उस दिन सिर्फ शिकायत नहीं सुनी…

उन्होंने एक माँ की मजबूरी सुनी।
एक पिता की गलती के पीछे छिपे परिवार का दर्द देखा।
और सबसे बढ़कर… भूखे बच्चों की आँखें देखीं। 😢

एक महिला अपने शराबी पति की शिकायत लेकर पहुँची थी।

बोली—
“साहब, शराब पीकर रोज मारता है… घर में खाने को कुछ नहीं है… बच्चे भूखे हैं।”

दरोगा जी चाहते तो आदमी को पकड़कर थाने में बैठा देते और अपनी कार्रवाई पूरी समझ लेते।

लेकिन उन्होंने कहा—
“पहले घर चलकर देखते हैं।”

और साहब जब घर पहुँचे…

तो वहाँ कोई कहानी नहीं थी।

सचमुच चूल्हा ठंडा पड़ा था।
घर में राशन नहीं था।
बच्चों के चेहरे पर भूख साफ दिखाई दे रही थी।

सोचिए…

जिस उम्र में बच्चे माँ से रोटी माँगते हैं, उस उम्र में अगर बच्चा भूख से चुप बैठा हो तो उस घर की हालत क्या होगी?

वर्दी पहने दरोगा ने शायद बहुत अपराध देखे होंगे…

लेकिन उस दिन उनके सामने सबसे बड़ा दर्द था—

एक बच्चे की भूख। 💔

उन्होंने जेब से कानून की धाराएँ नहीं निकालीं…

उन्होंने इंसानियत निकाल ली।

तुरंत बच्चों के लिए खाने-पीने का सामान और जरूरत के कपड़ों की व्यवस्था कराई।

फिर उस शराबी पिता के पास जाकर उसे समझाया।

कोई गाली नहीं…

कोई दिखावा नहीं…

बस इतना समझाया—

“भाई, शराब के लिए अपने बच्चों का बचपन मत बेचो।
जिस हाथ से बच्चे के सिर पर प्यार होना चाहिए, उसी हाथ से मारोगे तो कल ये बच्चे तुम्हें कैसे याद करेंगे?”

कहते हैं ना…

कभी-कभी डंडे से नहीं, किसी के प्यार से इंसान टूट जाता है।

वही हुआ।

उस आदमी की आँखों में आँसू आ गए।

शायद उसे पहली बार महसूस हुआ कि वह सिर्फ शराब नहीं पी रहा था…

वह अपने ही बच्चों की भूख पी रहा था।
अपने घर की खुशियाँ जला रहा था।
अपनी पत्नी की आँखों के आँसू बढ़ा रहा था।

उसने गलती मानी और आगे से ऐसा न करने का वादा किया।

अब जरा सोचिए…

अगर उस दिन सिर्फ गिरफ्तारी होती, तो शायद एक आदमी जेल चला जाता।

लेकिन दरोगा लक्ष्मीकांत सेंगर ने कोशिश की कि—

एक आदमी सुधरे,
एक पत्नी का घर बचे,
और बच्चों के चूल्हे में फिर से आग जले। ❤️‍🩹

यही तो असली पुलिसिंग है…

जहाँ कानून भी जिंदा रहे और इंसानियत भी।

हम पुलिस की गलतियों की खबर खूब दिखाते हैं।

दिखानी भी चाहिए—गलत होगा तो सवाल भी होना चाहिए।

लेकिन जहाँ कोई पुलिसकर्मी अपनी ड्यूटी से एक कदम आगे बढ़कर किसी भूखे बच्चे के चेहरे पर मुस्कान लाए…

वहाँ उसकी कहानी भी समाज तक पहुँचनी चाहिए।

क्योंकि वर्दी सिर्फ खाकी कपड़ा नहीं होती…

कभी-कभी उसी खाकी के अंदर एक ऐसा दिल धड़क रहा होता है,
जो किसी अनजान बच्चे की भूख देखकर खुद बेचैन हो जाता है। 🙏❤️

दरोगा लक्ष्मीकांत सेंगर साहब… सलाम है आपकी इस इंसानियत को। 👮‍♂️❤️

काश ऐसी खबरें भी उतनी ही तेजी से फैलें, जितनी तेजी से नकारात्मक खबरें फैलती हैं।

क्योंकि समाज को सिर्फ अपराधियों की कहानियाँ नहीं,
अच्छे इंसानों की कहानियाँ भी सुननी चाहिए।

नानी Blinkit सीख रही हैं… और पोती शायद रिश्ते निभाना। ❤️एक नानी कॉपी लेकर बैठी हैं और पोती उन्हें Blinkit चलाना सिखा रही...
27/09/2026

नानी Blinkit सीख रही हैं… और पोती शायद रिश्ते निभाना। ❤️
एक नानी कॉपी लेकर बैठी हैं और पोती उन्हें Blinkit चलाना सिखा रही है। नानी हर स्टेप पूरी गंभीरता से लिख रही हैं।
कभी इन्हीं हाथों ने हमारी उँगली पकड़कर हमें चलना सिखाया था। हमारे हर “क्यों” का जवाब दिया था। आज उन्हीं हाथों को मोबाइल चलाना सिखाने की बारी हमारी है।
बुजुर्गों को यह नहीं सोचना चाहिए कि “अब हमसे क्या होगा…”
और बच्चों को यह नहीं कहना चाहिए कि “आपको नहीं आएगा…”
थोड़ा समय दीजिए, थोड़ा धैर्य रखिए।
आज हम उन्हें तकनीक सिखाएँगे, कल वे हमें जिंदगी का कोई ऐसा सबक सिखाएँगे जो किसी ऐप में नहीं मिलेगा।
बच्चों के पास तकनीक है, बुजुर्गों के पास अनुभव।
यही पीढ़ियों का असली लेन-देन है। ❤️
रिश्तों को अपडेट करने के लिए किसी ऐप की नहीं,
बस समय, धैर्य और अपनापन चाहिए।
#बुजुर्ग #नानीऔरपोती #रिश्ते #परिवार #अपनापन #संस्कार #पीढ़ियोंकासाथ

मम्मी कहते कहते थक गईं—“बेटा, खाना बनाना सीख ले… कभी काम आएगा!” 😂तब तो एक ही जवाब—“मम्मी, हमें क्या करना है खाना बना के,...
27/09/2026

मम्मी कहते कहते थक गईं—
“बेटा, खाना बनाना सीख ले… कभी काम आएगा!” 😂

तब तो एक ही जवाब—
“मम्मी, हमें क्या करना है खाना बना के,अभी इतनी जल्दी किस बात की है…!” 😜

लेकिन वक्त का खेल देखिए…
अब बारिश हो रही है तो छुट्टी होना भी लाज़मी है और mumma को अपना टैलेंट दिखाना ही पड़ेगा अब👩‍🍳😂

रोज़ नौकरी और घर की भागदौड़ में कहाँ समय मिलता है कि किचन में नए-नए नवाचार किए जाएँ! 🤣

एक के बाद एक चीज़ ट्राई हुई…
मेहनत के बाद जब लगा कि
“हाँ, अब कुछ खाने लायक तो लग ही रहा है!” 😂
तो अगला विचार आया—
चलो किसी को बुलाकर खिलाया भी जाए।

वैसे भी लोगों की शिकायत रहती है—
“कुछ अच्छा सा बनाओ, कभी बुलाती ही नहीं हो!” 😜

फिर देखा—बारिश हो रही है, अभी दो-चार काम और बढ़ जाएंगे और इतनी देर किचन में कौन खड़ा रहेगा! 😂

तो समाधान भी झटपट निकल आया—
न किसी को बुलाएँगे, न ज्यादा मेहनत करेंगे… जो बना है वही अपना है। ❤️

अब मम्मी को तब थोड़ा न पता था जब हम किचेन में टैलेंट दिखाएंगे तो दाल रोटी सब्जी चावल वाला मेन्यू काम नहीं करेगा तब तक पता नहीं क्या क्या नवाचारी आइटम आ चुके होंगे किचेन में ❤️

मम्मी की सीख ने एक खूबसूरत चक्कर पूरा कर लिया—
मम्मी से बेटी… और बेटी से बेटे तक! ❤️

बारिश 🌧️ + छुट्टी 😍 + किचन एक्सपेरिमेंट 👩‍🍳 + बेटा ❤️
= मम्मी की सलाह का असली रिजल्ट! 😂

काश ये बात हर महिला को समझ आती जो दो चार को समझ आती है उन्हें अलग अलग तरह के टैग दे दिए जाते हैं।पता नहीं कब अपने लिए जी...
27/09/2026

काश ये बात हर महिला को समझ आती जो दो चार को समझ आती है उन्हें अलग अलग तरह के टैग दे दिए जाते हैं।पता नहीं कब अपने लिए जीना सीखेंगे ये लोग🤔🤔

बारिश का प्रकोप।हर किसी के लिए बरसात सुहानी नहीं होती😔लगातार 4 दिनों से हो रही इस बारिश में ये कच्चा मकान ढह गया और एक ह...
27/09/2026

बारिश का प्रकोप।हर किसी के लिए बरसात सुहानी नहीं होती😔लगातार 4 दिनों से हो रही इस बारिश में ये कच्चा मकान ढह गया और एक हंसता खेलता परिवार चला गया।प्रकृति से छेड़छाड़ का यही नतीजा है कभी तो प्रकृति भी अपना रौद्र रूप दिखाएगी और परिणाम बहुत ही भयावह मिलते हैं अभी नेपाल त्रासदी के बाद इतनी जल्दी इस तरह का कहर।हे भगवान जो जहां है उसे वहीं सलामत रखो 🙏🙏

जब पंचायत भवन ही ताले में बंद मिले, तो सवाल सिर्फ ताले का नहीं है…सरकारी योजनाओं में पंचायत भवनों को गाँव की व्यवस्था का...
26/09/2026

जब पंचायत भवन ही ताले में बंद मिले, तो सवाल सिर्फ ताले का नहीं है…
सरकारी योजनाओं में पंचायत भवनों को गाँव की व्यवस्था का महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहाँ ग्रामीणों को सुविधाएँ मिलनी चाहिए, समस्याओं पर चर्चा होनी चाहिए और पंचायत से जुड़े काम आसानी से होने चाहिए।
लेकिन तस्वीरें कुछ और ही कहानी कह रही हैं।
कहीं सुबह 11:58 बजे पंचायत भवन पर सन्नाटा, कहीं दोपहर 12:30 बजे भी दरवाजे बंद, तो कहीं पंचायत भवन पर ताला अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से निभाता हुआ नजर आ रहा है। 😐
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं कि ताला क्यों लगा था…
सवाल यह है कि जिस भवन को ग्रामीणों की सुविधा के लिए बनाया गया, वहाँ ग्रामीणों को सुविधा आखिर मिलेगी कब?
शिक्षकों और परिषदीय विद्यालयों की उपस्थिति पर सवाल उठाना बिल्कुल जरूरी है, लेकिन व्यवस्था के हर उस हिस्से पर नजर होना भी उतना ही जरूरी है, जहाँ सरकारी पैसा, सरकारी भवन और जनता की सुविधा जुड़ी हुई है।
जवाबदेही एकतरफा नहीं होनी चाहिए।
विद्यालय हो या पंचायत भवन, शिक्षक हों या पंचायत कर्मचारी—जहाँ भी सार्वजनिक जिम्मेदारी है, वहाँ समय पर उपस्थिति और कामकाज की निगरानी भी होनी चाहिए।
क्योंकि जनता के लिए बना भवन अगर जनता के काम के समय ही बंद मिले,
तो सवाल उठना स्वाभाविक है—
“आखिर ताला भवन पर लगा है या व्यवस्था पर?” 🔐

*जय युवा जय अटेवा* 💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻_*सम्मानित शिक्षक कर्मचारी साथियों NPS/ UPS व निजीकरण विरुद्ध पेंशन महारैली की सफ...
26/09/2026

*जय युवा जय अटेवा*
💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻
_*सम्मानित शिक्षक कर्मचारी साथियों NPS/ UPS व निजीकरण विरुद्ध पेंशन महारैली की सफलता के लिए आप सभी को बहुत बहुत बधाई और पेंशन पुरुष आदरणीय विजय कुमार बन्धु जी,नीरज पति त्रिपाठी जी सहित पूरी राष्ट्रीय कार्यकारिणी एवं प्रदेश कार्यकारिणी को सफलतम आयोजन के लिए नमन करते हुए आनन्द कुमार शुक्ल जी द्वारा पेंशन महारैली की झलकियों की स्वरचित पंक्तियां आपके समक्ष प्रस्तुत हैं-*_
👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻👇🏻
*शिक्षक कर्मचारी मिल कर महारैली में,*
*झमझम बारिश होने पर भी देखा डटे हुए थे।*
*पद, विभाग,गुट , संगठनों के भेद त्यागकर,*
*इको गार्डेन में आ आकर जमे हुए थे।।*

*मातृ-शक्तियां निकली नन्हे बच्चों के संग,*
*और दिव्यांग साथियों ने ,भी हुंकार भरा है।*
*सामाजिक सुरक्षा के, इस आंदोलन ने,*
*फिर से अपना एक नया इतिहास रचा है।*

*पूरे देश का शिक्षक कर्मी मांग रहा है,*
*दे दो साहब छिना हुआ अधिकार हमारा।*
*NPS /UPS में, केवल धोखा है साहब,*
*OPS ही है 'आनन्द' सरताज हमारा।*

💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻💪🏻

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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26/09/2026

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हमारे ज़माने के नंबर 😂99.60% आए… फिर भी बच्ची को चैन नहीं! 😂रीचेकिंग करवा डाली…और भाई साहब, किस्मत भी देखिए— 100% हो गए!...
25/09/2026

हमारे ज़माने के नंबर 😂
99.60% आए… फिर भी बच्ची को चैन नहीं! 😂
रीचेकिंग करवा डाली…
और भाई साहब, किस्मत भी देखिए— 100% हो गए! 🤣
हमारे ज़माने में 33% आते थे तो घर में ऐसा माहौल बनता था जैसे
“बेटा पास हो गया!” नहीं, “बेटा बच गया!” 😂🙏
तब 1-2 नंबर बढ़वाने की अर्जी लेकर मास्टर जी के पास जाना मतलब
अपनी कॉपी के साथ अपनी किस्मत भी रिस्क पर लगाना! 😭🤣
मास्टर जी कहते—
“अच्छा… नंबर बढ़वाने आए हो?” 😏
और कॉपी देखने के बाद डर रहता था कि
कहीं 2 नंबर बढ़ने की जगह 2 नंबर और न घट जाएँ! 😂🙈
तब: 33% = जश्न 🥳
आज: 99.60% = रिचेकिंग 😭
सच में…
हम पढ़ाई करते थे पास होने के लिए,
आजकल के बच्चे शायद 100% से कम पर भी आत्मा की शांति ढूँढते हैं! 🤣🤣

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