14/06/2026
बुद्ध के जीवन में उल्लेख है—एक फ़कीर मिलने आया। एक साधु मिलने आया। एक परिव्राजक, घुमक्कड़।
उसने आकर बुद्ध से कहा,
"पूछने योग्य शब्द मेरे पास नहीं हैं। क्या पूछना चाहता हूँ, उसे शब्दों में बाँधने की मेरे पास कोई कुशलता नहीं है। आप तो जानते ही हैं, समझ लें। जो मेरे योग्य हो, कह दें।"
यह ज्ञानी की जिज्ञासा है।
बुद्ध चुप बैठे रहे। उन्होंने कुछ भी न कहा। थोड़ी देर बाद, जैसे कुछ घटा! वह जो आदमी चुपचाप बैठा बुद्ध की तरफ देखता रहा था, उसकी आँखों से आँसुओं की धार बहने लगी। वह चरणों में झुका, नमस्कार किया और कहा,
"धन्यवाद! मैं बड़ा धन्यभागी हूँ। जो लेने आया था, आपने दे दिया।"
वह उठकर चला भी गया। उसके चेहरे पर अपूर्व आभा थी। वह नाचता हुआ गया। 🙏✨
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