20/04/2026
डीएसआर तकनीक से धान बुआई को बढ़ावा, सुपर सीडर/हैप्पी सीडर से किसानों को बड़ा लाभ
बालाघाट जिले में धान उत्पादन को अधिक लाभकारी और संसाधन-संरक्षण आधारित बनाने के लिए कृषि विभाग द्वारा किसानों को डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस पद्धति के साथ सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर मशीन के उपयोग से किसानों को लागत में कमी और बेहतर उत्पादन मिल रहा है।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि पारंपरिक रोपाई पद्धति की तुलना में डीएसआर से धान बुआई करने पर 15 से 30 प्रतिशत तक पानी की बचत होती है। समतल एवं नमी युक्त खेत में सीड ड्रिल के माध्यम से 2-3 सेमी गहराई पर बीज बोने से लगभग 100 प्रतिशत अंकुरण संभव होता है। इस विधि से एक माह तक समय की बचत होती है और श्रम लागत भी कम हो जाती है। साथ ही पहली सिंचाई की आवश्यकता करीब 21 दिन बाद होती है।
उप संचालक श्री मालवीय ने बताया कि सुपर सीडर मशीन से जुताई, बुवाई और बीज ढकने का कार्य एक साथ किया जाता है, जिससे पराली को जलाने की जरूरत नहीं पड़ती और मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है। इससे फसल की पैदावार में भी वृद्धि होती है। प्रति एकड़ लगभग 10 हजार रुपये तक की लागत बचत संभव है और कम बीज दर (30-40 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर) में समान अंकुरण प्राप्त होता है।
वहीं पारंपरिक रोपाई विधि में अधिक श्रम (280-300 मानव-घंटे प्रति हेक्टेयर) की आवश्यकता होती है, मजदूरों की कमी से कार्य प्रभावित होता है और मिट्टी की संरचना भी खराब होती है, जिससे रबी फसलों के उत्पादन पर असर पड़ता है।
उप संचालक कृषि श्री फूलसिंह मालवीय ने बताया कि किसानों के लिए डायरेक्ट बुवाई आधुनिक और लाभकारी विकल्प बनकर उभर रही है। उन्होंने कहा—“पैसा बचाएँ, भूमि का स्वास्थ्य सुधारें, सीधी बुआई से अपनी किस्मत सँवारें।हैप्पी सीडर का जब साथ होगा, कम मेहनत में उन्नत परिणाम होगा। रोपा छोड़ें, सीधा बीज लगाएँ, हैप्पी सीडर से खेती को सरल बनाएँ। पैसा बचेगा, सुधरेगी आपकी ज़मीन, मेहनत कम और फसल होगी बेहतरीन।”
कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे डीएसआर तकनीक अपनाकर आधुनिक खेती की ओर कदम बढ़ाएँ। सुपर सीडर एवं हैप्पी सीडर मशीन किराए पर प्राप्त करने के लिए किसान J-Farm App डाउनलोड कर पंजीयन कर सकते हैं।