03/06/2026
"एक व्यक्ति जिसने अपने कानों में घंटियाँ बाँध ली थीं ताकि भगवान विष्णु का नाम न सुन सके... आखिर वही व्यक्ति श्री कृष्ण के चरणों में गिरकर रोने क्यों लगा?" 🙏🦚✨
घंटाकर्ण की मुक्ति – घृणा से भक्ति तक की यात्रा
यह कथा स्कन्द पुराण में वर्णित है।
प्राचीन काल में घंटाकर्ण नाम का एक शक्तिशाली योद्धा था। वह भगवान शिव का अत्यंत बड़ा भक्त था। वह दिन-रात शिवजी की आराधना करता था, लेकिन उसके मन में भगवान विष्णु के प्रति गहरा द्वेष था।
उसकी कट्टरता इतनी बढ़ गई थी कि यदि कोई उसके सामने भगवान विष्णु का नाम लेता, तो उसे क्रोध आ जाता।
कहा जाता है कि उसने अपने दोनों कानों में बड़ी-बड़ी घंटियाँ बाँध रखी थीं। उसका विचार था कि यदि कहीं कोई "विष्णु" नाम ले, तो घंटियों की आवाज़ के कारण वह नाम उसके कानों तक न पहुँचे।
समय बीतता गया। वह तपस्या करता रहा, पूजा करता रहा, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिली। बाहर से वह भक्त था, लेकिन भीतर द्वेष की आग जल रही थी।
एक दिन उसकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव उसके सामने प्रकट हुए।
घंटाकर्ण ने हाथ जोड़कर कहा,
"प्रभु! मैंने वर्षों तक आपकी भक्ति की है, फिर भी मेरे हृदय को शांति क्यों नहीं मिलती?"
भगवान शिव मुस्कुराए और बोले,
"घंटाकर्ण, तुम्हारी भक्ति में एक बड़ी कमी है। तुम प्रेम से अधिक द्वेष को अपने हृदय में स्थान दिए हुए हो। जब तक तुम्हारे मन से घृणा समाप्त नहीं होगी, तब तक तुम्हें सच्ची शांति नहीं मिलेगी।"
फिर शिवजी ने कहा,
"यदि मुक्ति चाहते हो, तो भगवान श्री कृष्ण की शरण में जाओ।"
यह सुनकर घंटाकर्ण चौंक गया। जिसे वह जीवन भर नापसंद करता रहा, उसी की शरण में जाने की आज्ञा उसे मिली थी।
लेकिन वह शिवजी की आज्ञा का उल्लंघन नहीं कर सकता था।
वह श्री कृष्ण की खोज में निकल पड़ा।
लंबी यात्रा के बाद उसे भगवान श्री कृष्ण के दर्शन हुए। श्री कृष्ण का दिव्य, करुणामय और तेजस्वी स्वरूप देखकर उसका हृदय पिघल गया।
जिस भगवान का नाम सुनने से वह भागता था, उसी भगवान को सामने देखकर उसकी आँखों से आँसू बहने लगे।
वह भगवान के चरणों में गिर पड़ा और बोला,
"प्रभु, मैंने अज्ञानवश आपके प्रति द्वेष रखा। मुझे क्षमा कर दीजिए।"
भगवान श्री कृष्ण ने उसे प्रेमपूर्वक उठाया और कहा,
"जो अपने हृदय से घृणा को निकाल देता है, वह मेरे बहुत निकट आ जाता है।"
उस क्षण घंटाकर्ण का सारा अहंकार और द्वेष समाप्त हो गया। उसके हृदय में प्रेम, करुणा और भक्ति का प्रकाश भर गया।
कहा जाता है कि भगवान की कृपा से उसे आध्यात्मिक शांति और अंततः मुक्ति प्राप्त हुई।
शिक्षा
✨ सच्ची भक्ति में किसी के प्रति घृणा नहीं होती।
✨ ईश्वर तक पहुँचने का मार्ग प्रेम से होकर जाता है।
✨ कट्टरता मनुष्य को बाँधती है, प्रेम उसे मुक्त करता है।
✨ सभी देवी-देवताओं का सम्मान करना सनातन धर्म की सुंदर परंपरा है।
घंटाकर्ण भगवान को नहीं, अपने मन के द्वेष को ढो रहा था।
जब घृणा समाप्त हुई, तब उसे वही भगवान मिल गए जिनसे वह जीवन भर दूर भागता रहा। 🙏✨
सच्ची भक्ति किसी से द्वेष नहीं, सबके प्रति प्रेम करना सिखाती है। 🦚❤️
🙏🦚✨