30/05/2026
शिवपुर बनकट, जिला श्रावस्ती के पेश इमाम हज़रत कारी अय्यूब खान साहब ने ईदगाह में ईद की नमाज़ के बाद एक बेहद ख़ूबसूरत और नसीहत भरा पैग़ाम दिया, जिसने वहां मौजूद लोगों के दिलों को छू लिया।
हज़रत ने मुस्कुराते हुए मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि "ईद की नमाज़ खत्म होते ही आप लोग ऐसे भागना कि ईदगाह में कोई नज़र ही न आना, कहीं किसी से गले भी न लग जाना!" यह बात उन्होंने इलाके के लोगों के रवैये पर हल्के-फुल्के अंदाज़ में तंज़ करते हुए कही, लेकिन इसके पीछे एक बहुत बड़ा संदेश छिपा हुआ था।
इसके बाद हज़रत ने बड़ी दर्दमंदी के साथ फरमाया कि अल्लाह के वास्ते आपसी रंजिशों, नाराज़गियों और दिलों की दूरियों को खत्म कर दीजिए। ईदगाह से भागकर नहीं, बल्कि ईदगाह में रुककर एक-दूसरे को गले लगाइए। क्योंकि एक मोमिन दूसरे मोमिन का भाई होता है।
हज़रत ने आगे कहा कि कुर्बानी सिर्फ जानवर की नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपने घमंड, अपनी ज़िद, अपने बुग्ज़, अपनी नफरत और अपने हसद की भी कुर्बानी देनी चाहिए। अगर इंसान इस मुबारक मौके पर अपनी बुराइयों को भी कुर्बान कर दे, तो इंशाअल्लाह उसे अल्लाह की रज़ा भी हासिल होगी, दुनिया में भी कामयाबी मिलेगी और आखिरत भी संवर जाएगी।
माशाअल्लाह! हज़रत कारी अय्यूब खान साहब की इन नसीहतों का असर भी साफ़ दिखाई दिया। शिवपुर बनकट ईदगाह में नमाज़ के बाद लोग रुके, एक-दूसरे से गले मिले, पुरानी बातों को भुलाया और मोहब्बत व भाईचारे के साथ ईद की मुबारकबाद पेश की।
यक़ीनन यही ईद का असली पैग़ाम है — मोहब्बत, भाईचारा, एकता और दिलों को जोड़ना।
अल्लाह तआला हम सभी को आपसी मोहब्बत और इत्तेहाद के साथ ज़िंदगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।