17/09/2026
UPI पेमेंट पर फीस का मामला सुप्रीम कोर्ट में, चार्ज को लेकर बढ़ी बहस
नई दिल्ली। UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस के जरिए होने वाले डिजिटल भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर बहस तेज हो गई है। यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जिसके बाद आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट से जुड़े लोगों की नजर इस पूरे विवाद पर बनी हुई है।
वित्त मंत्रालय, भारत सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि ₹2,000 से कम के UPI लेनदेन पर किसी प्रकार का चार्ज नहीं लगाया जाएगा। वहीं, बड़े मूल्य के कुछ लेनदेन को लेकर MDR यानी Merchant Discount Rate (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) की चर्चा सामने आई है।
बताए जा रहे उदाहरण के अनुसार, ₹10,000 के भुगतान पर करीब ₹40, जबकि ₹75,000 के भुगतान पर करीब ₹300 और ₹1 लाख के भुगतान पर करीब ₹400 तक MDR का उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, शुल्क किस प्रकार के लेनदेन पर लागू होगा और इसकी वास्तविक जिम्मेदारी ग्राहक या व्यापारी में से किसकी होगी, यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण है।
वहीं, एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले सामान्य UPI भुगतान को चार्ज-फ्री रखने की बात कही जा रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बड़े व्यावसायिक लेनदेन पर MDR लागू होता है, तो इसका असर व्यापारियों और डिजिटल भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं पर किस रूप में पड़ेगा।
इस पूरे मामले को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज है। विपक्ष का आरोप है कि यह फैसला विदेशी दबाव में लिया गया है, जबकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि और सरकार का आधिकारिक पक्ष इस विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण है।
UPI आज देश में रोजमर्रा के भुगतान का एक बड़ा माध्यम बन चुका है। ऐसे में शुल्क से जुड़ा कोई भी निर्णय करोड़ों डिजिटल लेनदेन और छोटे-बड़े कारोबारियों पर असर डाल सकता है।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और सरकार की आगे की स्पष्ट स्थिति पर टिकी हैं।
आप इस पूरे मामले को किस नजरिए से देखते हैं? क्या बड़े डिजिटल लेनदेन पर MDR उचित है या UPI को पूरी तरह शुल्क-मुक्त रखा जाना चाहिए? अपने विचार कमेंट में जरूर बताएं।