25/01/2026
मैं कविता नहीं एहसास लिख रहा हूँ आज तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ
जब मैं तुमसे मिला. तुम अलग सी लगी हम रोज. मिलने लगे. फिर दूर हो गए आज तुमसे मिलने की आस लिख रहा हूँ तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ
अजनबी से तुम पहचान बन गयी पहचान बढते बढते जान बन गयी मेरी जान तुमको जीने की प्यास लिख रहा हूँ तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ
तेरे आने-जाने से मैं यूँ शायर बना शब्द कागज़ पे कैसे बैठते. पता ही नहीं अपने सीने में दबी साँस लिख रहा हूँ सच तुम्हारे लिए कुछ खास लिख रहा हूँ