Dr. Anoop Patel

Dr. Anoop Patel Ph.D from JNU

06/04/2026

पत्रिका का बढ़ता कारवाँ..

12 अप्रैल को यूपी प्रेस क्लब, लखनऊ मे हो रहे समता अधिकार सम्मेलन मे पत्रिका के "कैम्पस डेमोक्रेसी और सामाजिक न्याय" अंक का विमोचन होगा.

आप सादर आमंत्रित है.
Current Agenda Magazine

Current Agenda Magazine    का अंक रिलीज हो गया है. इस अंक मे " कैम्पस डेमोक्रेसी और सामाजिक न्याय" मे यूजीसी इक्विटी एक्...
18/03/2026

Current Agenda Magazine का अंक रिलीज हो गया है.

इस अंक मे " कैम्पस डेमोक्रेसी और सामाजिक न्याय" मे यूजीसी इक्विटी एक्ट पर महत्वपूर्ण लेख है. लेखों की सूची संलग्न है. अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर लेख है.

आप मैगज़ीन के लिये संपर्क कर सकते है.
मो. 9415455820

18/03/2026

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 #रोज_एक_लेख "ग्रीनलैंड, अमेरिका और सिनेमा" - डा. राकेश कबीर ~ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावे से अमेरिका और यूरोप आमने-सामने ह...
26/02/2026

#रोज_एक_लेख
"ग्रीनलैंड, अमेरिका और सिनेमा" - डा. राकेश कबीर

~ग्रीनलैंड पर अमेरिकी दावे से अमेरिका और यूरोप आमने-सामने हैं. जो यूरोप अमेरिका की दादागिरी में सहमति दिखाता रहा है और अपना दोस्त मानता रहा है, आज डोनाल्ड ट्रम्प की विस्तारवादी नीतियों ने उनके सामने ऐतिहासिक चुनौती खड़ी कर दी है. 'अगेंस्ट द आइस’ फिल्म के माध्यम से ग्रीन लैंड पर अमेरिकी दावे को सौ साल पहले ही निस्तारित कर दिया गया था परन्तु ट्रम्प की महात्वकांक्षा इस विवाद को फिर जीवित कर रही है.~

(डा. राकेश कबीर समकालीन हिंदी कवि, लेखक, फ़िल्म समीक्षक और पर्यावरणविद है, जो अपनी प्रकृति-केंद्रित और यथार्थवादी कविताओं के लिए जाने जाते हैं। उनकी प्रमुख रचनाओं में कविता संग्रह 'नदियाँ बहती रहेंगी', 'तुम तब आना', और 'कुँवरवर्ती कैसे बहे' शामिल हैं।)


 #रोज_एक_लेख " उच्च शिक्षा का लोकतंत्रीकरण: UGC विनियम 2026 और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध निर्णायक मुहिम"- गौतम कुमार~यूजी...
25/02/2026

#रोज_एक_लेख
" उच्च शिक्षा का लोकतंत्रीकरण: UGC विनियम 2026 और जातिगत भेदभाव के विरुद्ध निर्णायक मुहिम"- गौतम कुमार

~यूजीसी एक्ट-2026 केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज या दिशा-निर्देशों की मामूली सूची नहीं है, बल्कि कैंपस के भीतर व्याप्त गहरे संस्थागत सामाजिक अन्याय के विरुद्ध एक सुदृढ़, दीर्घकालिक और ऐतिहासिक वैधानिक प्रहार है।~

(गौतम कुमार दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ स्नातक है )

लोकराजा, प्रथम कुंडबी (कुर्मी)-मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का आज जन्मदिन  है.विदेशी शासन- मुग़ल सल्...
19/02/2026

लोकराजा, प्रथम कुंडबी (कुर्मी)-मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज का आज जन्मदिन है.

विदेशी शासन- मुग़ल सल्तनत की जड़ो को ख़त्म करने की शुरुआत किया था छत्रपति ने.

शिवाजी की सेना में हिन्दू-मुस्लिम सब होते थे।
कुनबी-माली, महार, जाधव कुलकर्णी सब मराठा होते थे।
( मराठा= जो मर के हटा)

उनकी सेना मे 90% किसान होते थे. युद्ध के समय यही किसान सैनिक बन जाते थे. बाकि समय मे किसानी करते थे.

देश की नौसेना (naval army) के संस्थापक माने जाते थे.

सवर्ण हिन्दुओ ने अपने फायदे के लिये शिवाजी की छवि को भी कम्युनल बना दिया। लेकिन छत्रपति का व्यक्तित्व इन बनावटी आवरण से ढक-छिप नहीं पायेगा.

छत्रपति के व्यक्तित्व को पुर्नजीवित महात्मा ज्योतिराव फूले ने किया.

फूले ने छत्रपति की समाधि को साफ-सुथरा करवाया. और उनके जन्मदिन पर मेले लगवाना शुरू किया. फूले अपनी कृति "शिवाजी पावड़ा" मे छत्रपति शिवाजी की महानता को उल्लेखित करते है.

माउंटबेटन ने छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रशंसा करते हुए कहा था, "यदि शिवाजी महाराज इंग्लैंड में पैदा हुए होते, तो हम (अंग्रेज) न केवल पृथ्वी पर, बल्कि पूरी दुनिया पर शासन करते"। यह कथन उनकी अद्भुत सैन्य प्रतिभा, दूरदर्शिता और नेतृत्व क्षमता के प्रति एक विदेशी शासक का सम्मान दर्शाता है।

उनके राज्यरोहण के समय ब्राह्मण पुरोहितो ने नींच काम किया, उस पर फिर कभी लिखेंगे.

लोकराजा को नमन.
जय शिवाजी.

- डा. अनूप पटेल
-को-एडिटर करंट एजेंडा पत्रिका

'बहुजन सिविल सोसाइटी' की मांग ने पकड़ी तेजी..यूजीसी एक्ट-2026 के मसले ने साफ कर दिया है कि राजनैतिक दलों के भरोसे बैठे रह...
10/02/2026

'बहुजन सिविल सोसाइटी' की मांग ने पकड़ी तेजी..

यूजीसी एक्ट-2026 के मसले ने साफ कर दिया है कि राजनैतिक दलों के भरोसे बैठे रहे तो कुछ भी हासिल नहीं होगा..

सरकारी नौकरियों की भर्ती मे भी बहुजन वर्ग के वाजिब पदों की लूट लगातार जारी रहती है.

ताज़ा उदाहरण है..

1.पीजीआई में 158 पदों पर असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती निकली। एससी-एसटी, ओबीसी को 50 फीसदी पद मिलना चाहिए था लेकिन उन्हें 72 पद मिला। अनारक्षित को 86 पद मिले। आखिर ये कैसे संभव है। मतलब सीधी गड़बड़ी हुई है।

2.स्वास्थ्य शिक्षा अधिकारी के 221 पद निकले। इसमें ओबीसी के 27 फीसदी आरक्षण के मुताबिक 60 पद होने चाहिए थे लेकिन मिला सिर्फ 20 पद। आखिर ये किस आधार पर हुआ।

3. पशु चिकित्सा अधिकारी के 404 पदों पर भर्ती निकली। ओबीसी को 110 पद मिलना चाहिए लेकिन जीरो पद मिला। आखिर यह किस आधार पर किया जा रहा है।

सरकार को बताना चाहिए कि आखिर विज्ञापन में ऐसी गड़बड़ी क्यों हो रही है। क्या संवैधानिक पदों पर बैठे लोग नहीं ध्यान दे पा रहे हैं। जो अधिकारी ऐसा कर रहे हैं उनके खिलाफ कोई कार्रवाई क्यों नहीं हो रही है।

लेकिन इसके लिये 'नाईट वाचमैन' की जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी.

क्या आपको लगता है कि एक 'बहुजन सिविल सोसाइटी' होनी चाहिये?

06/02/2026

"युजीसी एक्ट-2026: बहुजन हिन्दुओ मे सोशल चर्निंग"
-एक टिप्पणी

#यूजीसी एक्ट 2026 को लेकर देश की यूनिवर्सिटीज 'सोशल चर्निंग' से गुजर रही है. इस एक्ट के आने पर 'सवर्ण हिन्दू' जमात ने एक 'स्क्रिप्टड़ विरोध' दर्ज कराया. कॉर्पोरेट मीडिया, सवर्ण सिविल सोसाइटी, सोसल इलीट और फाइनली न्यायपालिका के रुख से सवर्ण हिन्दू की एकजुटता सामने आयी.

इस एक्ट को लेकर
सवर्ण जमात के कुछ सवाल थे. जिसे लेकर विरोध प्रदर्शन किया गया. हालांकि एक्ट को सही ढंग से पढ़ा नहीं गया, उसमे कुछ सुधार हो ही सकते है. लेकिन विरोध प्रदर्शन मे जो भाषा, बॉडी लैंगेज दिखी, इसे 'बहुजन हिन्दू' ने ध्यान से देखा. कुछ सवर्ण युटुबरों ने तो सीधा प्रधानमंत्री मोदी को उनकी जाति को लेकर कटाक्ष किया कि वो तेली है इसलिए सवर्णों का अहित कर रहे है. सवर्ण इलीट के एक दुलारे ने तो कैबिनेट मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जाति-विशेष की गालियां दी. एक नये तरीके के 'वल्गर-लूंपन' सवर्ण एकजुटता को देखा गया.

हालांकि इस एकजुटता ने बहुजन हिन्दुओ को एलर्ट भी किया. इस एक्ट ने भाजपा और RSS के हिन्दू-एकता की फाल्टलाइन भी उजागर किया. भाजपा और RSS मे भी बहुजन हिन्दुओ मे नाराजगी साफ दिख रही है.

यूजीसी एक्ट के समर्थन मे विपक्ष मे एकमात्र लेफ्ट पार्टीज समर्थन मे खड़ी हुयी. आजाद समाज पार्टी ने खुलकर समर्थन जताया. यूपी मे ओबीसी वर्ग की नयी पार्टी जनहित विकल्प पार्टी ने इस एक्ट को लेकर गाँव-गांव कैंपेन चलाने की बात रही.

वही विपक्ष मे कांग्रेस इस मामले मे फंस गयी. कांग्रेस की छात्र विंग NSUI ने यूजीसी एक्ट के विरोध में देशव्यापी प्रदर्शन किया. उत्तर प्रदेश कांग्रेस ने तो अपने ऑफिशियल ट्विटर हैंडल से विरोध प्रदर्शन को ट्वीट भी किया. एक्ट को लेकर कांग्रेस का ये रुख राहुल गाँधी के दलित-पिछडो के मुद्दे पर उनकी बन रही इमेज को पलीता लगा दिया.

वहीं समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के ऑब्जरवेशन को सही ठहराया और एक तरीके से मैसेज गया कि कि सपा और बीएसपी एक्ट के विरोध में है, और सवर्ण हिन्दुओ के वोट पाने की आशा कर रहे है.

सपा कांग्रेस और बीएसपी का यूजीसी एक्ट को लेकर लिया गया स्टैंड बहुजन हिंदुओं के बीच गुस्से की वजह बना. अब इस समय पूरे देश में यूजीसी एक्ट के समर्थन में प्रदर्शन हो रहे हैं. यूनिवर्सिटी प्रशासन, पुलिस और छात्रों के बीच लगातार कश्म-कश जारी है.
कई जगह प्रदर्शन करने वाले छात्रों को ऊपर नकेल कसी गई है. जेएनयू में तो पूरे छात्र संघ को ही रस्टिकेट कर दिया गया.

यूजीसी एक्ट को लेकर अब पूरे देश के भिन्न-भिन्न राज्यों में प्रदर्शन हो रहे हैं. एक्ट के समर्थक अब विपक्षी पार्टियों के भरोसे नहीं बैठे है.

अच्छी बात यह हुई कि बहुजन हिंदू अब खुद अपनी लड़ाई लड़ने लगे. खासकर ओबीसी वर्ग जो सन 1990 में मंडल-I और सन 2008 मे मंडल-II के समय प्रमुख रूप से सड़क पर नहीं आया था, उन आंदोलन को नेतृत्व दलित समाज ने दिया था. इस बार ओबीसी वर्ग खुद मैदान पर आया है हालांकि इस बार भी दलित समाज ही नेतृत्व कर रहा है.

मै इसे भारतीय राजनीति में एक नया आगाज की तरह देख रहा हूँ. बहुजन हिन्दुओ ने पहली बार एक 'बहुजन सिविल सोसाइटी' की आवश्यकता महसूस किया.एक सिविल सोसाइटी का निर्माण डॉक्टर,इंजीनियर शिक्षक, एक्टिविस्ट से होता है इस मुद्दे ने ओबीसी के अंदर सिविल सोसाइटी की आवश्यकता को महसूस करवाया है

भाजपा इस एक्ट को लेकर 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। हालांकि इस मामले में कोर्ट ने जो ऑब्जरवेशन दिया है उस पर भाजपा को फैसला लेना पड़ेगा. आगामी 19 मार्च को माननीय कोर्ट यदि यूजीसी एक्ट के विरोध में फैसला देता है और सरकार की तरफ से पैरवी नहीं हुयी तो भाजपा के चिंता का विषय होगा. बहुजन हिंदुओं के बीच भयानक नाराजगी फैलेगी. बहुजन हिन्दुओ के बीच भाजपा को लेकर एक शंका घर कर जायेगी. भाजपा को वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव मे संविधान और आरक्षण के मसले पर जो डेंट हुआ है, वो और बढ़ सकता है.

तो भाजपा क्या करेगी?
भाजपा तो अभी :वेट एंड वॉच' की स्थिति में हो सकती है लेकिन इस एक्ट के समर्थन में संसद में भी कानून बना सकती या नहीं, यह अभी कहना उचित नहीं है.

बाहरहाल इस पूरे प्रकरण को बहुजन हिन्दुओ की सिविल सोसाइटी के भविष्य की तरह देखता हूं क्योंकि किसी भी समाज का बेहतर विकास मे सिविल सोसाइटी की बड़ी भूमिका होती है.

हम वर्ष 1990 से इसे देख रहे हैं. इस एक्ट का भविष्य कुछ भी हो. इसके चलते बहुजन हिन्दुओ मे एक सिविल सोसाइटी के निर्माण की नींव रख दी है.

- डा. अनूप पटेल
06.02.2026

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