26/08/2026
🐚 श्रीकृष्ण ने पांचजन्य शंख कहाँ से प्राप्त किया?
प्राचीन कथा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण और बलराम ने अपने गुरु सांदीपनि मुनि के आश्रम में शिक्षा प्राप्त की। शिक्षा पूरी होने पर श्रीकृष्ण ने गुरु से गुरुदक्षिणा माँगी।
सांदीपनि मुनि ने बताया कि उनका पुत्र समुद्र के किनारे से लापता हो गया था। गुरु ने इच्छा व्यक्त की कि श्रीकृष्ण उनके पुत्र को वापस ले आएँ।
श्रीकृष्ण और बलराम समुद्र के तट पर पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण ने समुद्र देव से गुरु-पुत्र के बारे में पूछा। समुद्र देव ने बताया कि पांचजन नामक एक असुर समुद्र में रहता है और संभव है कि वही इस घटना से जुड़ा हो।
श्रीकृष्ण समुद्र की गहराइयों में पहुँचे और पांचजन नामक असुर का सामना किया। कथा के अनुसार, युद्ध के बाद श्रीकृष्ण को उसके शरीर से एक अद्भुत शंख प्राप्त हुआ। यही शंख आगे चलकर पांचजन्य कहलाया।
लेकिन श्रीकृष्ण को गुरु-पुत्र वहाँ नहीं मिला। तब वे उसे खोजते हुए यमलोक पहुँचे। वहाँ श्रीकृष्ण ने अपने गुरु के पुत्र को वापस लाकर सांदीपनि मुनि को सौंप दिया।
गुरु अपने पुत्र को वापस पाकर अत्यंत प्रसन्न हुए और श्रीकृष्ण को आशीर्वाद दिया।
बाद में पांचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण का दिव्य शंख बन गया। महाभारत में भी श्रीकृष्ण के पांचजन्य शंख का विशेष महत्व बताया गया है। माना जाता है कि युद्धभूमि में इसके नाद से धर्म और विजय का संदेश गूँजता था।
🙏 श्रीकृष्ण का पांचजन्य केवल एक शंख नहीं, बल्कि धर्म, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है।
राधे राधे 🦚💙